आगरालीक्स…वसंत पंचमी को ठाकुर जी को लगेगा पहला गुलाल का टीका. रंगोत्सव में डूबेगा ब्रज..रसिया, धमार जैसे होली गीतों से शुरू हो जाएंगे आयोजन…जानिए
वसंत पंचमी से शुरू हो जाएगा रंगोत्सव
16 फरवरी को वसंत पंचमी से ब्रज में रंगोत्सव की शुरूआत हो जाएगी. ब्रज में इस उत्सव का अपना ही अलग अंदाज है. यहां पर यह उत्सव 40 दिन तक मनाया जाता है. वसंत पंचमी से शुरू होने वाला ये उत्सव धुलेड़ी पर समाप्त होता है. वसंत पंचमी को ठाकुर जी को गुलाल का पहला टीका लगाया जाता है. रसिया, धमार आदि के गीत मंदिरों में गाए जाते हैं और मंदिरों में आने वाले हर श्रद्धालु पर गुलाल के छींटे डाले जाते हैं.
जगह—जगह आयोजन शुरू हो जाते हैं
परम्पराओं के अनुसार ठाकुर जी को गुलाल का टीका लगते ही आम समाज में भी होली का आगाज हो जाता है. फाल्गुन शुक्ल पूर्णमासी की रात होली जलाए जाने वाले चौराहों पर डांढ़ा गाढ़ दिया जाता है. इसके गाढ़ते ही इस बात का आगाज हो जाता है कि ब्रज में होली का उत्सव शुरू हो चुका है. जगह—जगह आयोजन शुरू हो जाते हैं. दरअसल डांढ़ा एक लकड़ी का टुकड़ा होता है जिसके आसपास होलिका सजाई जाती है. इसी दिन बरसाना में पहली चौपहिया बैलगाड़ियों की शोभायात्रा निकाली जाएगी. कस्बावासी पूरे कस्बे में नाचते—गाचते हुए इस शोभायात्रा में भाग लेते हैं. महाशिवरात्रि पर्व पर दूसरी और फाल्गुन शुक्ल नवमी के दिन तीसरी चौपई निकाली जाती है. फाल्गुन शुक्ल नवमी को बरसाना में पूरे भारत में प्रसिद्ध लठामार होली खेली जाती है. जो कि होली का सबसे मुख्य आकर्षण होता है. इस बार 22 मार्च को फाल्गुन शुक्ल नवमी है.
इस दिन रंग पंचमी
फाल्गुन शुक्ल एकादशी को रंगपंचमी मनाई जाती है. इस बार ये 24 मार्च को मनाई जाएगी. इस दिन वृन्दावन में ठा. बांकेबिहारी मंदिर सहित सभी मंदिरों में गुलाल के स्थान पर ठाकुरजी को टेसू के फूलों से बने रंग के छींटे देकर ब्रज में गीले रंगों की होली की शुरु की जाती है. यही रंग प्रसाद रूप में भक्तजनों पर भी छिड़का जाता है. इसी दिन वृन्दावन में ठा. राधारमण लाल जी का डोला (नगर भ्रमण) निकाला जाता है. फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा के दिन रात्रि के अंतिम प्रहर में मथुरा से 50 किमी दूर फालैन गांव में पण्डा समाज का प्रतिनिधि ‘भक्त प्रहलाद’ के रूप में करीब 20-25 फीट ऊंची होली की लपटों के बीच से निकलता है.