आगरालीक्स…(30 May 2021 Agra) 30 जून तक स्थगित रखी जाएं अकादमिक यथा शिक्षण, परीक्षण, शोध आदि गतिविधियां…औटा कार्यकारिणी ने तैयार किए 12 प्रस्ताव
औटा कार्यकारिणी की ‘ऑनलाइन बैठक’ रविवार को संपन्न हुई जिसमें पूर्वनिर्धारित विषयों सहित निम्नलिखित विंदुओं पर सभी पदाधिकारियों एवं कार्यकारिणी सदस्यों की सहमति थी. इस बैठक में अध्यक्ष डॉ० ओमवीर सिंह, महामंत्री डॉ० भूपेन्द्र चिकारा सहित लगभग सभी पदाधिकारी एवं कार्यकारिणी सदस्य उपस्थित रहे तथा विमर्श में अपना महत्वपूर्ण योगदान किया. कार्यकारिणी द्वारा निम्नलिखित प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए जिन्हें विश्वविद्यालय एवं शासन के समक्ष रखा जाएगा.
- 30 जून 2021 तक अथवा कोविड संक्रमण की स्थिति पूर्णतः सामान्य होने तक सभी अकादमिक यथा शिक्षण, परीक्षण , शोध आदि गतिविधियाँ स्थगित रखे जाने का निवेदन विश्वविद्यालय एवं प्रदेश शासन के समक्ष रखा जाय।
- उत्तर प्रदेश सरकार के समक्ष “एक देश, एक क़ानून” एवं “समान कार्य हेतु समान सेवा शर्त” के सिद्धांत के तहत बिना भेदभाव केंद्र एवं अनेक राज्यों के शिक्षकों की भाँति उत्तर प्रदेश में भी सेवानिवृत्ति की आयु UGC के संस्तुतियों के अनुरूप 65 वर्ष किए जाने हेतु माँग रखी जाय।साथ ही शासन के समक्ष मौजूदा हालात में सेवनिवृत्ति उपरांत सामाजिक सुरक्षा की आवश्यकता को ध्यान में रख पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल किए जाने की माँग पुनः शासन के समक्ष प्रभावी तरीक़े से रखी जाय ।
- UGC के द्वारा ऑनलाइन शिक्षण का प्रतिशत बढ़ाने तथा इसे स्थायी व्यवस्था बनाने का पुरज़ोर विरोध करते हुए औटा , महाविद्यालय इकाइयों और प्रत्येक शिक्षक द्वारा इसके विरोध में छः जून के पहले UGC को विरोध पत्र ई मेल किया जाय।
- उच्च शिक्षा में सेवारत कोरोना से दिवंगत हुए शिक्षकों को प्रदेश सरकार द्वारा कम से कम पचास लाख (50 Lacs) की तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान की जाय तथा उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेश स्तर पर एक “उच्च शिक्षा शिक्षक कल्याण कोष” की स्थापना की जाय।
- विश्वविद्यालय स्तर पर शिक्षक कल्याण कोष में परीक्षा आदि कार्यों में व्यवधान तथा निजी एजेंसियों द्वारा परीक्षा मूल्यांकन आदि कार्य कराए जाने से शिक्षकों की TWF कटौती लगभग घटती जा रही।अतः इस कोष में विश्वविद्यालय द्वारा एवं किसी एजेंसी द्वारा एक निश्चित राशि जमा करना तय किया जाय ।
- प्रदेश के राजपत्रित कर्मचारियों के समान शिक्षकों को पूर्ण वेतन सहित चिकित्सा अवकाश जो हाल तक शिक्षकों को प्राप्त था , प्रदान किया जाय तथा इस हेतु तत्काल अधिसूचना जारी किया जाय।
- शिक्षण, परीक्षण और ज्ञान निर्माण ही शिक्षा कार्य एवं सेवाओं का आधार है ।शिक्षकों के स्वास्थ्य और आवागमन सुविधा को ध्यान रख मूल्यांकन हेतु ‘नोडल केंद्र व्यवस्था’ बहाल हो । विश्वविद्यालय स्तर पर परीक्षा संचालन एक आत्मनिर्भर एवं उत्तरदायी परीक्षा विभाग द्वारा बिना किसी बाहरी निजी एजेंसी को आउट्सॉर्सिंग किए अपनी कम्प्यूटर प्रिंटिंग प्रणाली विकसित कर कराई जाय । गत कुछेक वर्षों में परीक्षा एवं प्रमाणन कार्य में संलग्न बाहरी एजेंसियों के कार्यों की ऑडिट कराई जाय जिससे की परीक्षा के नाम पर महाविद्यालयों एवं छात्रों द्वारा जमा राशि का आकलन हो सके ।
- वर्तमान महामारी की परिस्थितियों में वास्तविक धरातल पर विश्वविद्यालय की परीक्षा, मूल्यांकन, परिणाम एवं डिग्री वितरण व्यवस्था की स्थिति और महाविद्यालयों की सेमेस्टर सिस्टम के अनुरूप तैयारी की स्थिति के मद्देनज़र इसके अगले सत्र से क्रियान्वयन की क्षीण संभावना को ध्यान में रखते हुए NEP 2020 के क्रियान्वयन को इस वर्ष स्थगित कर इसके क्रियान्वयन पर पुनर्विचार किया जाय।
- शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों के कर्मचारियों एवं छात्र समुदाय को फ़्रंटलाइन वर्कर्स की भाँति प्रमुखता से नि:शुल्क एवं अनिवार्य टीकाकरण किया जाय।प्रत्येक जिले में महाविद्यालयों में प्रार्थमिकता से टीकाकरण केंद्र बनाया जाय।
- इस महामारी में स्वास्थ्य सेवाओं की अनुपलब्धता एवं कमी देखते हुए विश्वविद्यालय परिसर में प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालयों की भाँति सभी शिक्षकों कर्मचारियों के लिए एक निश्चित बेड एवं अनुभवी चिकित्सक सुविधायुक्त “डॉ० भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय स्वास्थ्य केंद्र एवं चिकित्सालय” की स्थापना की जाय जो पूरे विश्वविद्यालय एवं सम्बद्ध महाविद्यालयों के शिक्षकों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराए ।इस चिकित्सा केंद्र की स्थापना में प्रदेश शासन, विश्वविद्यालय सहित महाविद्यालयों के शिक्षक समुदाय द्वारा भी समुचित योगदान किया जाय।
- निजीकरण व्यवसायीकरण की ग़लत नीतियों से अनुदानित महाविद्यालय के छात्रों का पलायन हो रहा ।शिक्षक-छात्र अनुपात प्रभावित होने के आधार पर शासन अनुदानित महाविद्यालयों के पदों को समाप्त करने की बजाय विश्वविद्यालय के सहयोग से उनमें छात्र संख्या बढ़ाने की योजना तैयार करे ।
- औटा, AIFUCTO की इस माँग से सहमत है कि अनुदानित महाविद्यालयों में कार्यरत वे अंशकालिक , स्ववित्तपोषित, मानदेय आदि के शिक्षक जिन्हें अत्यंत कम वेतन दिया जाता है – कोविड काल में इन्हें वेतन यथावत दिया जाना सुनिश्चित हो जिससे कि उनके परिवारों के समक्ष भुखमरी की स्थिति न उत्पन्न हो । विश्वविद्यालय इस सम्बंध में महाविद्यालयों को आवश्यक निर्देश जारी करे ।
औटा कार्यकारिणी की आन-लाइन बैठक में अध्यक्ष डॉ ओमवीर सिंह, महामंत्री डॉ भूपेंद्र कुमार चिकारा, डॉ अमर कुमार धारीवाल, डॉ वाई एन त्रिपाठी, डॉ शशिकांत पांडे, डॉ गौरव कौशिक, डॉ दिग्विजय सिंह, डॉ अनुराधा गुप्ता, डॉ निर्मला सिंह,, डॉ श्याम गोविंद सिंह, डॉ अतीत श्रीवास्तव, डॉ निर्भय सिंह, डॉ पूनम तिवारी, डॉ अमरप्रकाश, डॉ कुलदीप सिंह, डॉ साहब सिंह, डॉ एम पी सिंह, डॉ प्रवीन कुमार शर्मा, डॉ सुनील बाबू चौधरी, डॉ कवि शंकर वार्ष्णेय, डॉ विजय नारायण सिंह, डॉ बी पी मौर्य ने भाग लिया।