अलीगढ़लीक्स (चमन शर्मा)… जब सुना कि अलीगढ़ के महुआ खेड़ा थाना अंतर्गत क्वार्सी बाईपास स्थित सरोज नगर, गली नं 6 के नजदीक, एटा चुंगी चैराहे पर सड़क किनारे अपने परिवार का पालन-पोषण करने में दिन-रात पसीना बहाने वाले बंजारे, लुहारों को अपने नन्हें-मुन्ने लाड़लों को सोते समय पैरों में जंजीर डालकर चारपाई से जोड़कर ताले से बंद कर सुलाना पड़ता है, तो होश ही उड़ गए, जी हां जनपद में सड़क किनारे बसे बंजारों और लुहारों के टैंट में रात को सोते समय या सुबह जल्दी जाया जाए तो एक नजारा देख कर किसी की भी आंखें फटी की फटी रह सकती हैं।
छोटे-छोटे बच्चों की सुरक्षा के लिए उनके मां-बाप न चाहते हुऐ भी यह करने पर मजबूर हो रहे हैं कि उन्हें अपने बच्चों के पैरों में लोहे, स्टील आदि की जंजीरें डाल कर ताला लगाकर, जिस चारपाई पर सोते हैं उसमें जंजीर को फंसाकर अपने लाडलों की रक्षा करनी होती है। लगता है कि इस समय कोई गैंग सक्रिय है जो सड़क किनारे रह रहे इन बंजारों व लुहारों के छोटे-छोटे बच्चों को शिकार बना रहा है। रात को सोते हुए इन नन्हें-मुन्नों को उठा ले जाते हैं और उनका फिर चाहे जो करते हों।

आज सोमवार की बीती रात को भी एटा चुंगी चैराहे पर बसे बंजारों, लुहारों की एक छोटी बच्ची को रात में उठाने की कोशिश की गई, परन्तु उस बच्ची को वह ले जा नहीं सके क्योंकि उस बच्ची को उसके मां-बाप ने चारपाई से जंजीर पैरों में डाल ताला लगाकर रख रखा था। बच्ची जैसे ही उठाई जंजीर खिंचने से वह रो गई और परिवारीजन जाग गए। बताया जाता है कि बाइक पर आए बच्चा उठाने वाले लोगों को वहां से भागना पड़ा। अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए अधिकतर बंजारे व लुहार अपने बच्चों को रात में बेड़ियों की गिरफ्त में सोंप देते हैं ताकि सुबह वह अपने बच्चे को सुरक्षित पा सकें।
विदित है कि विगत 22 जून की रात्रि 3-4 के बीच अलीगढ़ के महुआ खेड़ा थाना अंतर्गत क्वार्सी बाईपास स्थित सरोज नगर, गली नं 6 के नजदीक बसे लुहार के टैंट से सोती हुई मां-बेटी में से बेटी शिवानी, जो कि 2 साल के लगभग थी, को कोई उठा ले गया। पुलिस में शिकायत हुई, डीएम से मिले परिजन और समाचार माध्यमों मंे भी लगी, लेकिन नतीजा रहा ढाक के तीन पात। एक बच्चे के बाबा लीला लुहार ने भड़ास निकालते हुए कहा कि अगर हम अमीर होते तो हमारी सुनी जाती, हम गरीबों की कौन सुनेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अभी भी इन बंजारों और लुहारों की उम्मीदें शेष हैं। बच्चे सुरक्षित रहें और रात को सोते समय उठाकर कोई न ले जा सके, इसलिए मां-बाप को दिल पे पत्थर रखकर अपने बच्चों के बचपन को जंजीरों में कैद करना पड़ रहा है।