आगरालीक्स…आगरा में भी कोरियन गेम के दीवाने हो रहे बच्चे और टीन एजर्स. कोरियन लव ड्रामा और मूवीज भी पसंद कर रहे..कहीं ये लत गंभीर तो नहीं
तीन दिन पहले गाजियाबाद में नौवीं मंजिल से गिरकर तीन बहनों ने सुसाइड कर लिया. इनमें पुलिस की जांच में एक एंगल ये भी सामने आया है कि तीनों बच्चियां मोबाइल गेम खेलने की भी आदी थीं. उन्हें कोरियर गेम्स बहुत पसंद थे और उन पर इन गेम्स का प्रभाव इतना अधिक था कि उन्होंने अपना नाम भी कोरियन नाम पर रख लिया था. दूसरी घटना गोरखपुर से आई है. यहां एक छात्रा कोरियन मूवीज और ड्रामे से इतना अधिक प्रभावित हो गई कि वह दिन में छह से आठ घंटे तक यही देखा करती थी. वह उन्हीं की तरह रहने लगी थी और उसकी बोलचाल में कुछ कोरियन शब्द भी आने लगे थे.पहनावा भी उसने वैसा ही कर लिया था. इस पर परिवार ने काउंसलिंग कराई.तेजी से क्रेजी हो रहे टीएनएजर्स
कोरियन ड्रामे, मोबाइल गेम्स का सबसे अधिक प्रभाव बच्चों और किशारों पर है. आनलाइन गेम्स और कोरियन ड्रामा ने उन्हें क्रेजी बना दिया है. फ्रीफायर, बीजीएमआई, माइनक्राफ्ट, अमंगग अस और कॉल आफ ड्यूटी मोबाइल खास तौर पर पसंद किए जाते हैं. ये गेम्स बच्चों को मल्टीप्लेयर अनुभव, टीमवर्क और क्रिएटिविटी का मौका देते हैं जिसके कारण इनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है. इनके अलावा कोरियन ड्रामे एक्स्ट्रा आर्डिनरी यू, ट्रू ब्यूटी, माई आई इन गनगम ब्यूटी, स्क्व्डि लाइफ, फैंटेसी और इमोसंस को आकर्षक तरीके से दिखाते हैं जिससे टीएन एजर्स इनसे जुड़ाव महसूस करते हैं.
आगरा के मानसिक स्वास्थ्य केंद्र के निदेशक प्रो. दिनेश राठौर का कहना है कि आनलाइन गेम ओर के ड्रामा की लत से बच्चों को बचाने के लिए उनके साथ संवाद करना जरूरी है. बच्चे को डांटने या पूरी तरह रोकने के बजाय उनसे शांत तरीके से बात करनी चाहिए. स्क्रीन टाइम की स्पष्ट सीमा तय हो, रात को सोने का समय निश्चित हो. बच्चों को आउटडोर गेम्स में भाग लेने के लिए प्रेरित करें. संगीत, किताबें और परिवार के साथ समय जैसे विकल्प देना चाहिए.