आगरालीक्स….Agra News: आगरा के आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर 57 महीने में हुए हादसों का कारण आया सामने, 54.71 प्रतिशत हादसे का कारण एक जैसा, जानें, कैसे बचें। ( Agra News: 54.71% Accident on Agra-Lucknow Expressway due to driver sleep or Nap, 9.82% due to over speed#Agra )
आगरा को लखनऊ से जोड़ने वाले 302 किलोमीटर लंबे आगराद लखनऊ एक्सप्रेसवे पर जनवरी 2021 से सितंबर 2025 तक यानी 57 महीनों में 7024 सड़क हादसे दर्ज हुए। इनमें से 3843 हादसे केवल वाहन चालक की नींद या झपकी लगने से हुए, जो कुल हादसों का 54.71 प्रतिशत हैं। सुप्रीम कोर्ट रोड सेफ्टी कमेटी की 24 अक्टूबर 2025 को हुई बैठक में हुआ जिसमें वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन के द्वारा प्रस्तुत सड़क सुरक्षा के मुद्दों पर विस्तार से गहन चर्चा हुयी। इस बैठक की अध्यक्षता कमेटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अभय मनोहर सपरे द्वारा की गयी।
ओवर स्पीड के कारण से 10 प्रतिशत से कम हादसे
ओवरस्पीडिंग के कारण 690 हादसे (9.82 प्रतिशत), टायर फटने से 626 हादसे (8.91 प्रतिशत) और जानवरों के कारण 249 हादसे (3.54 प्रतिशत) हुए। इसके अलावा अन्य कारणों से 1616 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं।
वाहनों का बढ़ रहा दबाव
उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीईडा) द्वारा बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2020 में जहां 5,45,764 वाहन गुजरे थे, वहीं जनवरी 2025 में यह संख्या बढ़कर 11,16,390 हो गई – यानी प्रतिदिन औसतन 36,000 से अधिक वाहन। यह वृद्धि बताती है कि पाँच वर्षों में यातायात लगभग दोगुना हो गया है।
कारें हादसों की सबसे बड़ी शिकार
जनवरी 2025 में एक्सप्रेसवे से गुजरने वाले वाहनों में से 64.29 प्रतिशत कारें थीं – यानी हर 100 वाहनों में से 64 कार। इसी वजह से 2021 से सितंबर 2025 के बीच हुई कुल 7024 दुर्घटनाओं में 3881 हादसे केवल कारों से संबंधित रहे, जिनमें 4264 लोग घायल और 369 की मौत हो गयी। ये आंकड़े कार चालकों को विशेष सतर्कता बरतने की चेतावनी देते हैं।
दोपहिया वाहनों पर चिंता
जनवरी 2020 में 31,361 और जनवरी 2025 में 40,667 दोपहिया वाहन एक्सप्रेसवे से गुजरे – यानी लगभग 30 प्रतिशत वृद्धि। बैठक में यह भी माना गया कि ट्रैफिक नियमों की सबसे अधिक अवहेलना दोपहिया चालकों द्वारा की जाती है। अक्सर तीन सवारियां बिना हेलमेट दिखती हैं। 2021 से सितंबर 2025 के दौरान दोपहियों के 769 हादसों में 1053 घायल और 133 मौतें हुईं।
सवाल यह उठा कि जब एक्सप्रेसवे पर कारों की गति सीमा 120 किमी-घंटा है, तो क्या ऐसी जगहों पर दोपहिया वाहनों को चलने की अनुमति होनी चाहिए? केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के निर्देशानुसार, एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे पर दो और तीन पहिया वाहनों, साइकिलों और पशु-चलित वाहनों का प्रवेश निषिद्ध है।
ये हैं कारण और सुझाव
अपर्याप्त जनसुविधाएं भी हादसे का कारण
बैठक में बताया गया कि आगरा से लखनऊ दिशा में केवल दो स्थानों पर (105 और 227 किमी पर) और लखनऊ से आगरा दिशा में भी दो स्थानों पर (217 और 101 किमी पर) ही जनसुविधाएं हैं – जो यात्रियों के लिए पूरी तरह अपर्याप्त हैं। इंडियन रोड कांग्रेस (आईआरसी) के 11 फरवरी 2021 के मानकों के अनुसार ऐसी सुविधाएं हर 40-60 किमी पर, और 30 जुलाई 2025 के संशोधित प्रारूप के अनुसार हर 30-40 किमी पर होनी चाहिए। यूपीईडा ने बताया कि नई सुविधाएं 160 और 165 किमी माइलस्टोन पर प्रस्तावित हैं, जिन्हें जल्द लागू किया जाएगा। वरिष्ठ अधिवक्ता के.सी. जैन के अनुसार, हर दिशा में कम से कम पाँच जनसुविधा स्थल आवश्यक हैं।
सर्दियों में गति सीमा घटाने की सिफारिश
अधिवक्ता जैन ने कहा कि आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे एक राष्ट्रीय महत्व का कॉरिडोर है, और इसे “पूर्णतः सुरक्षित मार्ग” बनाना प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि सर्दियों में, जब कोहरा घना होता है, कारों की गति सीमा 120 से घटाकर 75 किमी-घंटा कर दी जानी चाहिए जैसा कि यमुना एक्सप्रेसवे पर पहले से लागू है। उन्होंने कहा, “संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ काम किया जाए, तो लखनऊ एक्सप्रेसवे को हादसामुक्त बनाया जा सकता है।”
जनवरी 2021 से सितम्बर 2025 तक हुये 7024 हादसों के कारण सहित हादसों की संख्या
नींद झपकी के कारण 3843 – 54.71 प्रतिशत
ओवरस्पीडिंग के कारण 690 – 9.82 प्रतिशत
टायर बस्ट के कारण 626 – 8.91 प्रतिशत
जानवरों के कारण 249 – 3.54 प्रतिशत
अन्य कारणों से 1616 – 23 प्रतिशत