आगरालीक्स…आगरा मेें छत्रपति शिवाजी महाराज को कहां किया गया था नजरबंद…आगरा किला?…नहीं, औरंगजेब ने छलकपट से आगरा की इस जगह किया था नजरबंद, अब वहीं बनेगा शिवाजी महाराज का भव्य स्मारक…
आगरा में छत्रपति शिवाजी महाराज का भव्य स्मारक बनाया जाएगा. यह स्मारक आगरा के कोठी मीना बाजार में बनाया जाएगा. कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि शिवाजी महाराज का यह स्मारक युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्थल बनेगा. इस स्मारक के बनने से उत्तर भारत और महाराष्ट्र के लोगों के बीच भी सामंजस्य बढ़ेगा. हाल ही में 18 फरवरी को लाल किला के दीवान ए आम में शिवाजी महाराज की शौर्य गाथा का मंचन किया गया था जिसमें महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के समक्ष आगरा में छत्रपति शिवाजी महाराज और कोठी मीना बाजार के इतिहास को साझा किया गया था. जिसके बाद महाराष्ट्र सरकार ने भी इसके लिए अपने सहयोग की बात कही.

आगरा किला में नजरबंद नहीं किए गए थे शिवाजी महाराज
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने शाहगंज स्थित रेस्टोरेंट में प्रेस वार्ता के दौरान शिवाजी महाराज स्मारक निर्माण की प्रगति और योजना के संकल्प के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि मीना बाजार की कोठी का ऐतिहासिक तथ्य जानने की कहानी 5—6 साल पहले शुरू हुई थी. उन्होंने आरएसएस के सह सर कार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि यह किंवदन्ती गलत है कि छत्रपति शिवाजी महाराज को आगरा के लालकिले में कैद किया गया था. वास्तव में उनको तत्कालीन मुगल बादशाह औरंगजेब ने छलकपट से तत्कालीन जयुपर महाराजा मिर्जा राजा सवाई जयसिंह के पुत्र राम सिंह की कोठी में नजरबंद किया गया था और साथ ही उन्होने उस कोठी को तलाशकर एक प्रेरणा स्थल के रूप में स्मारक बनाने हेतु उपाध्याय को निर्देशित किया.
ऐसे खोजा गया कोठी मीना बाजार का इतिहास
योगेंद्र उपाध्याय द्वारा आगरा के ऐतिहासिक व प्राचीन कोठियों का इतिहास तलाशने और उनके राजस्व अभिलेखों को खंगालने का कार्य शुरू हुआ. इसी बीच आगरा के इतिहासकार डॉ0 सुगम आनन्द एवं अब स्वर्गीय डॉ अमी आधार निडर को भी इस कार्य में लगाया. इस खोज में जयपुर राजघराने के राजस्व अभिलेख और जयपुर हाउस व निकटवर्ती क्षेत्र के प्राचीन राजस्व अभिलेखों से यह तथ्य सामने आये कि मीना बाजार की कोठी वह स्थान है जहां राजा राम सिंह की वही कोठी थी जिसमें छत्रपति शिवाजी महाराज को नजरबंद किया गया था.
स्मारक बनाने का लिया गया फैसला
तथ्य सामने आने के बाद योगेन्द्र उपाध्याय मीना बाजार की कोठी पर शिवाजी महाराज का एक भव्य और दिव्य स्मारक बनवाने की प्रक्रिया में जुट गये. इस सन्दर्भ में उन्होने आगरा, लखनऊ, दिल्ली और मुम्बई तक की यात्रा की उचित स्थानों पर सम्पर्क करके तथ्यों से अवगत कराते हुए उस स्थान को छत्रपति शिवाजी महाराज का स्मारक बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी. जिसमें नौकरशाही के मकड़जाल की अड़चने आयी, न्यायालय के वादों की दुहाई दी गई तथा अन्य अवरोधों की चर्चा की गई. किन्तु सब का हल उपाध्याय द्वारा स्थान-स्थान पर दिया जाता रहा.
आगरा में पर्यटन के विकास को लगेंगे पंख
मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि छत्रपति शिवाजी स्मारक शिवाजी महाराज के शौर्य, साहस, बुद्धिचातुर्य, योजना बनाने की विलक्षण प्रतिभा और उसे क्रियान्वयन कर ले जाने की अद्भुत क्षमता का परिचायक है, को प्रेरणा स्थल बनने से जहां आगरा का पर्यटन बढेगा. वही आगरा में युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान होंगे. यह स्थान आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा स्थल तो बनेगा ही साथ में आगरा के जन-जन के लिए समृद्धि के द्वार भी खोलेगा. इस दृष्टि से उपाध्याय की टीम द्वारा आगरा में छत्रपति शिवाजी महाराज से सम्बन्धित दो बड़े कार्यक्रम प्रारम्भ कराये गये जिनको महाराष्ट्र से जोड़कर राष्ट्रीय एकात्मता और एकता का भी सन्देश दिया गया.
इस तरह परवान चढ़ी कोशिश कोशिश
10 मार्च 2025 को इस योजना को उस समय पंख लगे जब संयोग से इसी तिथि को जहां उ.प्र. के कैबिनेट मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के माध्यम से उ.प्र. शासन के पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश मेश्राम को निर्देशित कराया जा रहा था. वहीं उसी तिथि को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस द्वारा महाराष्ट्र विधानसभा सदन में उपाध्याय से हुई आगरा में वार्ता के अनुक्रम में महाराष्ट्र सरकार के बजट को प्रस्तुत करते समय शिवाजी के स्मारक को आगरा में बनाने हेतु प्रावधान कराया जा रहा था. उन्होंने कहा कि यह स्मारक आगरा में एक ऐसा पर्यटन स्थल बनेगा, जो ताजमहल से अधिक तेजस्वी होगा वहीं आगरा की आम जनता को रोजगार के अवसर प्रदान कर समृद्धि का मार्ग भी प्रशस्त करेगा. इस मौके पर प्रमुख रूप से डॉ अलौकिक उपाध्याय, ओम प्रताप सिंह, सुनील करमचंदानी मौजूद रहे.