आगरालीक्स…आगरा को अनिष्ट से बचाने के लिए लगाई जाती है शिव मंदिरों की परिक्रमा. 60 किमी की परिक्रमा देने निकली शिवभक्तों की टोली. जानें कितनी पुरानी है ये शिव परिक्रमा
आगरा में 60 किमी. लंबी शिव मंदिरों की परिक्रमा आज से शुरू हो गई है. हालांकि अभी शिवभक्तों की संख्या कम है लेकिन जैसे—जैसे शाम बीतती जाएगी युवाओं की टोली परिक्रमा के लिए बढ़ती जाएगी. आगरा के चारों शिव मंदिरों बल्केश्वर महादेव, राजेश्वर महादेव, पृथ्वीनाथ महादेव और कैलाश महादेव के साथ ही इनके रास्ते में आने वाले मनकामेश्वर महादेव मंदिर, रावली महादेव और वनखंडी महादेव की परिक्रमा लगाई जाती है. आज रातभर शिवभक्तों की टोली शहर के चारों कोनों पर परिक्रमा लगाएंगे. अपने घर के मंदिर से उठाकर यह शिव परिक्रमा सभी शिव मंदिरों से होती हुई अपने घर के मंदिर पर ही जाकर समाप्त होती है.

आगरा की इस ऐतिहासिक परिक्रमा काफी पुरानी है. हालांकि यह कितनी पुरानी है इसको लेकर अपने—अपने मत हैं. आगरा के श्री मनकामेश्वर मंदिर के महंत महंत योगेश पुरी का कहना है कि 1827 में देश में प्लेग की बीमारी फैली थी, शहर में ये बीमारी न फैले इसके लिए चारों कोनों पर स्थित शिव मंदिरों की परिक्रमा लगाकर प्रार्थना की गई थी. इसका असर ये था कि आगरा में प्लेग नहीं फैला है. इसका ये असर है कि आगरा में तब से लेकर अब तक कोई अनिष्ठ नहीं हुआ है. 1971 में पाकिस्तान ने बम गिराया था लेकिन वो हवाई पट्टी पर गिरा था जिससे कुछ नहीं हुआ था.
इतिहासविद् राजकिशोर राजे के अनुसार ये प्राचीन काल से लगाई जा रही है. औरंगजेब के शासनकाल में इसे रोक दिया गया था. जब औरंगजेब की मौत हो गई 1775 में और मराठाओं का प्रभुत्व बढ़ा तो आगरा भी मराठाओं के साम्राज्य में आ गया. मराठाओं ने आगरा के 14 मंदिरों का सुंदरीकरण कराया जिसके बाद से फिर से आगरा की परिक्रमा शुरू हुई.