आगरालीक्स…आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विवि ने मनाया अपना गौरवशाली 100वां स्थापना दिवस. कुलपति ने कहा—NAAC A+, NIRF एवं IRF उल्लेखनीय उपलब्धियां. मेधावी हुए सम्मानित तो 100 से अधिक कलाकारों ने दी रंगारंग प्रस्तुतियां
आगरा के . भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय ने बुधवार को अपने गौरवशाली 100वें स्थापना दिवस (शताब्दी स्थापना दिवस) को स्वामी विवेकानंद परिसर (खंदारी कैंपस) स्थित जयप्रकाश नारायण सभागार में अत्यंत भव्य, गरिमामय एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में मनाया। इस दौरान विश्वविद्यालय की शताब्दी गौरवगाथा, समृद्ध शैक्षणिक परंपरा, सांस्कृतिक विरासत, उल्लेखनीय उपलब्धियों एवं भविष्य के विकास विज़न का प्रेरणादायी संगम देखने को मिला। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समारोह को अविस्मरणीय बना दिया। ओडिसी, भरतनाट्यम एवं कथक की संयुक्त प्रस्तुति 'त्रिधारा' विशेष आकर्षण का केंद्र रही। वहीं 'भारत – शांति का संदेशवाहक' विषय पर मूक अभिनय, 'शिक्षा का महत्व' पर लघु नाटिका, दिव्य गीत तथा 'ब्रज के रंग कान्हा के संग' शीर्षक से प्रस्तुत लोकनृत्य ने दर्शकों की भरपूर सराहना एवं तालियाँ प्राप्त कीं। विश्वविद्यालय कुलगीत एवं विशेष रूप से तैयार किए गए शताब्दी गीत की भावपूर्ण प्रस्तुति ने पूरे सभागार को राष्ट्रभक्ति एवं विश्वविद्यालय गौरव की भावना से ओत-प्रोत कर दिया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार के कर्मचारियों के मेधावी बच्चों को सम्मानित कर उनकी उपलब्धियों का अभिनंदन किया गया।
शताब्दी केवल अतीत का उत्सव नहीं, भविष्य के संकल्पों का प्रतीक
कुलपति प्रो. आशु रानी ने कहा कि विश्वविद्यालय की शताब्दी केवल अतीत का उत्सव नहीं, बल्कि भविष्य के संकल्पों का भी प्रतीक है। उन्होंने सभी शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों को शताब्दी स्थापना दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय गुणवत्तापूर्ण, रोजगारपरक एवं नवाचार आधारित शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में ऑनलाइन एवं डिस्टेंस लर्निंग, इंटीग्रेटेड बी.एड., एम.टेक. तथा फुटवियर टेक्नोलॉजी जैसे रोजगारपरक पाठ्यक्रम प्रारंभ करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि विश्वविद्यालय ने गत वर्ष NAAC A+, NIRF एवं IRF में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित की हैं तथा शिक्षा, शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

डॉक्युमेंट्री में दिखाई 100 वर्षों की गौरवगाथा
इस अवसर पर विश्वविद्यालय की 100 वर्षों की गौरवगाथा, ऐतिहासिक विकास यात्रा, शैक्षणिक उपलब्धियों एवं भावी संभावनाओं पर आधारित विशेष लघु डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन किया गया, जिसे विश्वविद्यालय के सामुदायिक रेडियो "आगरा की आवाज़" के इंजीनियर तरुण श्रीवास्तव ने समन्वयक प्रो. संजय चौधरी के निर्देशन में तैयार एवं प्रस्तुत किया। इस डॉक्यूमेंट्री ने विश्वविद्यालय की समृद्ध विरासत, वर्तमान उपलब्धियों और भविष्य के विज़न को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत कर उपस्थित जनसमूह को गौरवान्वित एवं भावविभोर कर दिया। समारोह में शिक्षकों की ओर से प्रो. प्रदीप श्रीधर, प्रो. अचला गक्खड़ एवं प्रो. मोहम्मद हुसैन ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुसंधान एवं भावी विकास योजनाओं पर अपने विचार व्यक्त किए। वहीं गैर-शिक्षण कर्मचारियों की ओर से अरविंद गुप्ता एवं राजीव जैन ने विश्वविद्यालय की प्रगति में कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। महिला सशक्तिकरण का संदेश देते हुए वरिष्ठ महिला कर्मचारी एवं शोध विभागाध्यक्ष डॉ. नीलम शर्मा ने भी अपने विचार साझा किए।
इस अवसर पर कुलसचिव अजय कुमार मिश्रा, अधिष्ठाता छात्र कल्याण एवं कार्यक्रम संयोजक प्रो. भूपेंद्र स्वरूप शर्मा, परीक्षा नियंत्रक डॉ. ओमप्रकाश, वित्त अधिकारी सुदर्शन सिंह उपस्थित रहे। कार्यक्रम की रूपरेखा डॉ. नीलू सिन्हा ने प्रस्तुत की। ललित कला संस्थान के शिक्षक डॉ. देवाशीष गांगुली एवं विद्यार्थियों ने स्वागत गीत के माध्यम से अतिथियों का अभिनंदन किया, जबकि मॉडल स्कूल के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत गणेश वंदना पर आधारित मनोहारी सामूहिक नृत्य ने सभी का मन मोह लिया। स्वागत भाषण देते हुए कार्यक्रम संयोजक प्रो. भूपेंद्र स्वरूप शर्मा ने विश्वविद्यालय की सौ वर्षों की गौरवशाली यात्रा, उसकी शैक्षणिक उपलब्धियों तथा शताब्दी वर्ष के महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. मीनाक्षी चौधरी ने अतिथियों का सम्मान किया। सफल समन्वय में डॉ. रत्ना पांडे, डॉ. मोनिका अस्थाना, डॉ. मीनाक्षी चौधरी तथा विश्वविद्यालय के जनसंपर्क विभाग का विशेष योगदान रहा। जनसंपर्क अधिकारी पूजा सक्सेना, सह जनसंपर्क अधिकारी डॉ. स्वेतलाना, डॉ. संदीप शर्मा, इंजीनियर तरुण श्रीवास्तव तथा दीपक कुलश्रेष्ठ ने विश्वविद्यालय की स्थापना से लेकर वर्तमान तक की विकास यात्रा, उपलब्धियों एवं शताब्दी समारोह के प्रभावी प्रचार-प्रसार और प्रस्तुतीकरण में उल्लेखनीय भूमिका निभाई।