आगरालीक्स…आगरा के गजक व्यापारी को आजीवन कारावास की सजा. 18 साल पुराने मामले में कोर्ट ने सुनाई सजा. एक लाख का जुर्माना भी लगाया
आगरा की प्रसिद्ध बेदरिया राम गजक के व्यापार को लेकर 18 साल पुराने हत्या से जुड़े एक मामले में गजक व्यापारी को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. इसके अलावा एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. गजक व्यापारी का नाम हरी सिंह है. यदि जुर्माना नहीं भरा तो छह महीने की अतिरिक्त कैद भुगतनी पड़ेगी.
2007 का है मामला
ताजगंज क्षेत्र के रहने वाले हरी सिंह गजक का कारोबार करते हैं. इनका अपने बड़े भाई के बीच पुराने समय से विवाद चल रहा था. 16 नवंबर 2007 को इनकी अपने बड़े भाई से तेज बहस हो गई और गुस्से में आकर हरी सिंह ने अपने बड़े भाई पर वार कर दिया था, जिससे वो गंभीर रूप से घायल हो गए थे और बाद में मौके पर ही दम तोड़ दिया. पुलिस ने इस मामले में हरी सिंह समेत चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था. 17 जनवरी 2008 को हरी सिंह को अरेस्ट कर लिया गया था.
18 साल तक चला मुकदमा
18 साल तक चले इस मुकदमे में कई गवाहों के बयान, सबूत ओर मेडिकल रिपोर्ट पेश की गई. जज ने माना कि हरी सिंह ने अपने भाई पर जानलेवा हमला किया जिससे उसकी मौत् हुई. अभियुक्त हरी सिंह के वकील अभय पाठक ने दलील दी कि हरी सिंह एक वृद्ध और बीमार व्यक्ति हैं और न्यायालय कोउनके प्रति उदारता दिखानी चाहिए. इसके विपरीत, अभियोजन पक्ष की तरफ से अधिवक्ता अरविंद शर्मा ने कड़ी सजा की मांग की.
न्यायालय ने सुनाया फैसला
कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि यह स्पष्ट है कि हरी सिंह ने अपने सगे बड़े भाई की हत्या की है. यह हमला आरोपी के आशय को दर्शाता है. न्यायाधीश ने इस बात पर जोर दिया कि हमला करते समय आरोपी ने ये भी नहीं सोचा कि वह जिस व्यक्ति् पर हमला कर रहा है, वह उसका सगा भाई है. न्यायालय ने कहा कि यह कृत्य नैतिकता के विरुद्ध होने के साथ—साथ गंभीर अपराध भी है. इन सभी तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने धारा 304 (भाग 1) भारतीय दंड संहिता के तहत अभियुक्त हरी सिंह को आजीवन कारावास और एक लाख रुपये का अर्थदंड सुनाया. अर्थदंड अदा नहीं करने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा. धारा 504 भारतीय दंड संहिता के तहत अभियुक्त हरी सिंह को छह माह का साधारण कारावास और 10 हजार रुपये का अर्थदंड. इस मामले में हरी सिंह के अलावा अन्य आरोपी पुनीत, विनीत उर्फ वीनू और केशव पाल अनुस्थित थे. जिसके कारण उनकी फाइलें अलग कर दी गई थीं.