आगरालीक्स…कथित धर्म परिवर्तन और तस्करी के आरोप में अरेस्ट दो कैथोलिक ननों की गिरफ्तारी पर आगरा में ईसाई समाज ने निकाला महाशांति जुलूस. कहा—झूठे आरोपों में फंसाया. निष्पक्ष न्याय की मांग
दुर्ग स्टेशन पर 25 जुलाई को कथित रूप से धर्म परिवर्तन व तस्करी के आरोप में दो कैथोलिक ननों की गिरफ्तारी के खिलाफ आगरा में ईसाई समुदाय ने शांतिपूर्ण जनसभा की और महाशांति जुलूस निकालकर इस घटना की कड़ी निंदा की. रविवार को निष्कलंक माता चर्च (सेंट पीटर्स चर्च), आगरा में एक विशेष प्रार्थना सभा एवं शांतिपूर्ण जनजागरण जुलूस का आयोजन किया गया. इस अवसर पर महाधर्माध्यक्ष डॉ. राफ़ी मंजलि ने मीडिया एवं श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए दुर्ग में कैथोलिक धर्मबहनों के साथ हुए अन्यायपूर्ण व्यवहार की कड़ी निंदा की. उन्होंने कहा कि 25 जुलाई 2025 को दो कैथोलिक धर्मबहनें ओरछा की तीन युवतियों और एक युवक (जो उन्हें स्टेशन छोड़ने आया था) को उनकी सहमति और उनके माता-पिता की अनुमति से आगरा अपने संस्था में नौकरी देने हेतु साथ ला रही थीं. वे सभी दुर्ग रेलवे स्टेशन पर ट्रेन की प्रतीक्षा कर रहे थे, तभी बजरंग दल के कुछ तत्व वहाँ पहुँचकर पूर्व नियोजित तरीके से उन्हें घेरकर धर्मांतरण और मानव तस्करी के झूठे आरोपों में फँसा दिया. उन पर शारीरिक हमला, गाली-गलौज और धमकी तक दी गई और प्रशासन पर दबाव बनाकर उन्हें गिरफ़्तार करवा दिया गया.
कैथोलिक चर्च में नहीं होता धर्मांतरण
डॉ. राफ़ी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कैथोलिक ननों का जीवन अत्यंत समर्पित, त्यागमय और अनुशासित होता है. वे समाज के पिछड़े वर्गों की सेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य और आत्मिक उत्थान के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित करती हैं. उन पर धर्मांतरण या मानव तस्करी जैसे झूठे और आधारहीन आरोप लगाना न केवल निंदनीय है, बल्कि यह हमारे लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों पर सीधा आघात है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कैथोलिक चर्च में धर्मांतरण नहीं होता, बल्कि बपतिस्मा (बप्तिस्मा) की एक आध्यात्मिक प्रक्रिया होती है, जो पूरी तरह स्वैच्छिक और व्यक्तिगत निर्णय पर आधारित होती है.
इस अवसर पर चर्च के पल्ली पुरोहित फादर राजन दास, वरिष्ठ पुरोहित फादर मिरांडा, फादर जोसफ डाबरे, फादर डेनिस डिसूजा, फादर साजी, और अन्य प्रोहित के नेतृत्व में हजारों की संख्या में लोगों ने भाग लिया. फादर डॉमिनिक जॉर्ज ने अपने वक्तव्य में कहा कि यह घटना केवल ईसाई समुदाय पर हमला नहीं है, बल्कि यह भारत की धार्मिक सहिष्णुता, न्याय और मानवाधिकार पर सीधा प्रहार है. उन्होंने कहा कि समाज में ननों की सेवा निःस्वार्थ होती है, और इस प्रकार उनके साथ दुर्व्यवहार करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने संविधान में दिए गए धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार की याद दिलाते हुए प्रशासन से निष्पक्ष न्याय की मांग की.

सिस्टर रेखा ने भी अपने वक्तव्यों में धर्मनिरपेक्ष भारत की संकल्पना को मजबूत बनाए रखने की अपील की. श्री.लॉरेंस मसीह ने कहा ईसाई समाज एक शांतिप्रिय समुदाय है जो सेवा, शिक्षा और सौहार्द के मूल्यों पर विश्वास करता है. क्रिश्चियन समाज सेवा सोसाइटी के अध्यक्ष डेनिस सिल्वेरा ने प्रशासन से अपील करते हैं कि संवैधानिक मूल्यों की रक्षा होनी चाहिए.