आगरालीक्स…आजकल शादियां इंस्टाग्राम और रील्स से तय हो रही हैं. शादियों में नए—नए ट्रेंड. लग्ज़री मार्की एक नया स्टैंडर्ड…आगरा में वेडिंग इंडस्ट्री के भविष्य पर हुई चर्चाएं…बताया—ग्राहकों के हिसाब से कस्टमाइज्ड करने पड़ते हैं पैकेज और डिजाइन
वेडिंग इंडस्ट्री एसोसिएशन यूपी द्वारा शनिवार को होटल ताजव्यू, आगरा में “The Future of Wedding Industry” विषय पर भव्य परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। दीप प्रज्वलन में वेडिंग इंडस्ट्री एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष अग्रवाल, महासचिव संदीप उपाध्याय, पर्यटन एवं वेडिंग सेक्टर विशेषज्ञ एवं होटल ताजव्यू के महाप्रबंधक शांतनु घोष, डायरेक्टर सेल्स शोहिव खान, होटल सेल्स मैनेजर देव चौधरी, शुभम स्वरूप तथा संगठन के संरक्षक संजय अग्रवाल, राजेश गोयल उपाध्यक्ष सौरभ सिंगल एवं पंकज गोयल प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

परिचर्चा के मुख्य बिंदु और लेटेस्ट ट्रेंड पर मंथन:
लग्ज़री मार्की का बढ़ता ट्रेंड:
इस सत्र में वक्त के रूप में विमल गोयल दिलीप गुप्ता विपिन गुप्ता सचिन अग्रवाल अमरीश भारद्वाज
वक्ताओं ने कहा कि आज का कस्टमर बैंक्वेट हॉल से ज्यादा लग्ज़री मार्की की डिमांड कर रहा है। ग्राहक को 5-स्टार जैसी फील, ओपन एयर, पूरी तरह से एसी, बड़े स्पान वाली मार्की चाहिए। खासकर भारतीय शादियों में जहाँ 800 से 1500 मेहमान होते हैं, वहाँ लग्ज़री मार्की एक नया स्टैंडर्ड बन गई है। कस्टमर डिमांड है – “शादी महल जैसी नहीं, एक प्राइवेट लग्ज़री डेस्टिनेशन जैसी लगे।”
डेकोरेटर एवं डेकोर डिज़ाइन की भूमिका – सत्र को मॉडरेशन सौरभ सिंघल ने किया स्पीकर के रूप में प्रमुख रूप से मौजूद थे तरुन अग्रवाल जॉनी, विमल गोयल बिजी क्राफ्ट ,रिया शर्मा अरुन सक्सेना। चर्चा में कहा गया कि आज भारतीय शादी सिर्फ शादी नहीं, एक एक्सपीरियंस है। ग्राहक अब Pinterest और Instagram से डिज़ाइन लेकर आते हैं। डेकोर में अब थीम बेस्ड, कल्चरल टच, साउथ इंडियन, राजवाड़ा, बॉलीवुड थीम की मांग है। कस्टमर को फोटो-जेनिक डेकोर चाहिए जो रील में अच्छा लगे। इसलिए डेकोरेटर अब सिर्फ डेकोरेटर नहीं, वेडिंग डिज़ाइनर बन गया है।
सोशल मीडिया का प्रभाव – रील्स और इंस्टाग्राम की शक्ति: इस सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में रहे देवेश पूरी, यश शिवहरे रहे!
सबसे ज्यादा चर्चा इसी विषय पर हुई। आज की शादी Instagram और Reels से तय हो रही है। दूल्हा-दुल्हन की पहली डिमांड होती है – “हमारी शादी की रील वायरल होनी चाहिए।” ग्राहक वेन्यू, डेकोर, फोटोग्राफी सब कुछ इस हिसाब से चुन रहा है कि इंस्टाग्राम पर कैसा दिखेगा। इसलिए वेडिंग इंडस्ट्री को अब सोशल मीडिया फ्रेंडली काम करना होगा।
वेडिंग फोटोग्राफी में बदलते रुझान: इस सत्र में स्पीकर के रूप में रहे , पुनीत भोजवानी, अमित जैन, सिमर सिंह।
पहले केवल पारंपरिक फोटो-वीडियो होता था, अब कस्टमर को सिनेमैटिक, कैंडिड, ड्रोन शॉट, सेम डे एडिट और रील-एडिट की डिमांड है। भारतीय शादियों में इमोशन बहुत होते हैं, इसलिए अब फोटोग्राफर को स्टोरी टेलर बनना पड़ रहा है। ग्राहक कहता है – “हमें एल्बम नहीं, एक पूरी फिल्म चाहिए।”
अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने कहा कि संगठन का एक ही प्रयास है – “उत्तर प्रदेश शादियों के लिए उत्तर प्रदेश”। उन्होंने कहा कि जब तक हम कस्टमर की बदलती डिमांड और लेटेस्ट ट्रेंड के साथ नहीं चलेंगे, तब तक भारतीय शादियों का बाजार बाहर जाएगा। हमें उत्तर प्रदेश को वेडिंग डेस्टिनेशन स्टेट बनाना है। महासचिव संदीप उपाध्याय ने सभी सत्रों का समराइज करते हुए कहा कि आने वाला समय कोलेबोरेशन का है। सभी वेंडर्स को एक साथ मिलकर कस्टमर को 360 डिग्री एक्सपीरियंस देना होगा। कार्यक्रम का समापन एडमिनिस्ट्रेटर अनिल सविता द्वारा धन्यवाद ज्ञापित कर हुआ। कार्यक्रम की व्यवस्था एक्सपर्ट इवेंट से शिरीष सिन्हा विनीत गोयल ने संभाली।