आगरालीक्स…यूपी में एस्थेटिक और रीजनरेटिव गायनेकोलाॅजी को बढ़ाने की कोशिश. ये वो समस्याएं हैं जिन्हें शर्म और झिझक की वजह से महिलाएं बता नहीं पातीं…पढ़ें जागरूक करने वाली खबर
आज चिकित्सा विज्ञान बहुत आगे पहुंच गया है। ऐसी तमाम बीमारियों का उपचार मौजूद है जिन्हें हम लाइलाज समझते आए हैं। महिलाओं की भी बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं जिनके बारे में वे शर्म और झिझक की वजह से बात नहीं करतीं और जब पता चलता है बहुत देर हो चुकी होती है। यह समस्याएं एस्थेटिक, रीजनरेटिव, रीकंस्ट्रक्टिव और काॅस्मेटिक गायनेकोलाॅजी से जुड़ी हैं। यही वजह है कि समूचे उत्तर प्रदेश में गायनेकोलाॅजी की नई डिवीजन एस्थेटिक और रीजनरेटिव गायनेकोलाॅजी को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।

इंडियन स्कूल आॅफ एस्थेटिक गायनेकोलाॅजी एवं हेजार जर्मनी की ओर से लखनउ के मानस गायनी काॅस्मेटोलाॅजी एंड लेजर सेंटर पर एक विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। इसके मुख्य संयोजक उजाला सिग्नस रेनबो हॉस्पिटल, आगरा के डाॅ. नरेंद्र मल्होत्रा और लखनउ कीं डाॅ. पूनम मिश्रा थीं। वहीं देश भर के स्त्री रोग विशेषज्ञ इस कार्यशाला का हिस्सा बने। व्याख्यानों के साथ ही लेजर मशीन द्वारा एक डाॅक्टर-एक मरीज हैंड्सआॅन प्रेक्टिस कराई गई। इससे चिकित्सक काफी संतुष्ट नजर आए। विशेषज्ञों के साथ सवाल-जवाब का दौर हुआ, जिसमें चिकित्सकों ने प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाएं शांत कीं।
डाॅ. मल्होत्रा ने बताया कि आगरा में उजाला सिग्नस रेनबो हाॅस्पिटल के साथ ही लखनउ, कानपुर और कई अन्य शहरों में अब ऐसे प्रमुख केंद्र हैं जहां महिलाएं अपनी निजी स्वास्थ्य समस्याओं का उपचार करा सकती हैं। डाॅ. पूनम मिश्रा ने बताया कि यह डिवीजन एक सुपरस्पेशियलिटी डिवीजन है, जिसका उद्देश्य महिलाओं की निजी स्वास्थ्य समस्याओं का निवारण करना है। ऐसी समस्याओं में स्ट्रेस यूरिनरी इनकंटीनेंस, संबंध बनाने में परेशानी, फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन समेत कई समस्याएं शामिल हैं।