आगरालीक्स…आगरा में प्रसिद्ध साहित्यकार, निबंधकार व व्यंग्यकार बाबू गुलाबराय को जन्मजयंती पर किया याद. दिल्ली गेट स्थित प्रतिमा पर किया माल्यार्पण
हिन्दी के श्रेष्ठ निबंधकारों, साहित्यकार और व्यंग्यकार बाबू गुलाबराय की जयंती पर आगरा में उन्हें नमन किया गया और दिल्ली गेट स्थित बाबूजी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया. 17 जनवरी 1888 को जन्मे बाबू गुलाबराय अपनी विवेचनात्क और भावात्मक शैली तथा भाषा के प्रवाह और लालित्य के लिए प्रसिद्ध रहे हैं. इस अवसर पर डॉ. शशी तिवारी, गौरव राय, हर्ष दुबे, सौरभ परिहार और बाबू गुलाब राय स्म्रति संस्थान के उपाध्यक्ष आदर्शन नंदन गुप्त भी मौजूद रहे.
नाट्य विमर्श, हिन्दी साहित्य का सुबोध इतिहास, नवरस, कर्तव्य, आलोचना कुसुमांजलि, भारतीय संस्कृति की रूपरेखा आदि उनकी प्रमुख् कृतियां हैं. उनके निबंधों में चिंतन की गहराई और गंभरीता है, वहीं ठलुआ क्लब फिर निराश क्यों जैसी कृतियों में उन्होंने सहज सरल हास्य विनोद का प्रयोग किया है. साहित्यकोश पत्रिका के संपादक रहे बाबू गुलाबराय की आत्मकथा मेरी असफलताएं को हिंदी की श्रेष्ठ आत्मकथाओं में से एक माना जाता है. 13 अप्रैल 1963 को उनका निधन हुआ था.
