आगरालीक्स…आगरा के गुरुद्वारा गुरु का ताल में लगा कवि दरबार. शुरू हुआ गुरमत समागम
गुरुद्वारा गुरु का ताल में तीन दिवसीय गुरुमत समागम की शुरुआत कवि दरबार के साथ हुई। यह तीन दिवसीय समागम गुरुद्वारा गुरु का ताल की दो दशकों से अधिक समय तक सेवा संभालने वाले संत बाबा साधू सिंह जी मौनी और संत बाबा निरंजन सिंह जी की याद में विगत 38 वर्षों से निरंतर मनाया जाता है। गुरुद्वारा गुरु का ताल के मौजूदा मुखी संत बाबा प्रीतम सिंह जी ने बताया कि पंजाबी साहित्य और कवियों को मंच प्रदान करने की परंपरा शुरुआत से ही जारी है। प्रतिवर्ष समागम के दौरान पंजाबी के वरिष्ठ कवियों को यहां आमंत्रित किया जाता रहा है। इस वर्ष भी लगभग 15 कवि यहां शिरकत करने आए हैं। जिन्होंने मुख्य रूप से गुरुओं के इतिहास, संघर्ष, वीरता, मुगलिया अत्याचार जैसे विषयों से संबंधित अपनी रचनाएं यहां सुनाई है। जिसका मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी में पंजाबी साहित्य व अपने इतिहास की प्रति रुचि पैदा करना व उसे जानना है।

हर गुरुद्वारा शुरू करें ऐसी परंपरा
देश के विभिन्न हिस्सों से आए पंजाबी के कवि व कवित्रियों का मानना है कि गुरुद्वारा गुरु का ताल जिस तरह से कवि दरबार आयोजन की परंपरा निभा रहा है। यह प्रयास देश के हर बड़े गुरुद्वारे को निभानी चाहिए । कवि गुरु प्रोफेसर जोगिंदर सिंह कंग और डॉक्टर भूपेंद्र सिंह सैनी ने कहा यदि सभी बड़े गुरुद्वारा व धार्मिक स्थल वर्ष में एक बार भी अपने समागमों में कवियों को आमंत्रित करें तो ना केवल पंजाबी साहित्य का प्रचार प्रसार होगा बल्कि नई पीढ़ी अपने इतिहास व अपने साहित्य से भी जुड़ेगी। कवि डॉक्टर सतपाल कौर ने कहाजो नई पीढ़ी इस समय केवल पंजाबी पॉप गानों को ही संस्कृति समझ बैठी है उसके लिए इस तरह की साहित्यिक कार्यक्रमों से जुड़ना बहुत जरूरी है ।सभी कवियों ने बाबा प्रीतम सिंह जी कि इस प्रयास को पंजाबी साहित्य के लिए संजीवनी करार दिया ।
2 अक्टूबर को सजेगा कीर्तन दरबार
गुरुद्वारा गुरु का ताल के मीडिया प्रभारी जसबीर सिंह ने बताया कि तीन दिवसीय समागम का मुख्य कार्यक्रम 2 अक्टूबर को रहेगा ।सुबह 9:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक और शाम को 6:00 बजे से रात 12:00 बजे तक कीर्तन समागम आयोजित होगा ।जिसमें देश के अनेक रागी जत्थे ,धर्म प्रचारक ,कथावाचक व प्रमुख गुरुद्वारों के जत्थेदार साहिबान शिरकत करेंगे।

कवियों के नाम व रचना
भूपेंद्र सिंह सैनी – सैनी आखदा सिखी नहीं मुक सकदी, मुकदा एनू मुकान वाला
डॉ सतपाल कौर दिल्ली– खंडे बाटे दी धार चौ होए पैदा,नहीं किसी दे आगे झुकना सिखया है प्रोफेसर जोगिंदर सिंह कंग – दिल्ली शहर तो सतगुरु आ गए सी, कुछ सिख भी ओना दे नाल आए,डेरे आगरा विच लाए सी,
इनके अलावा बीबी सतीश कौर चौहल, बीबी सतनाम कौर सत्ते,बीबी राजेंद्र कौर जीत , अमरजीत कौर नूरी बलविंदर सिंह निराला, रणजीत कौर जीत,मनिदर सिंह परिंदा ने काव्य पाठ किया। मंच संचालन जोगिंदर सिंह कंग ने किया।