आगरालीक्स…आषाढ़ मास की गुरु पूर्णिमा तिथि सोमवार को है। कई शुभ योगों का संयोग। शुभ मुहूर्त के साथ कई राशियों के लिए होगी लाभदायक। क्या करें उपाय।
आषाढ़ पूर्णिमा का विशेष महत्व

श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान एवं गुरु रत्न भंडार वाले ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजन शर्मा बताते हैं कि हिंदू धर्म में आषाढ़ पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस साल आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि 3 जुलाई को है।
महर्षि वेदव्यास का जन्मोत्सव भी

इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। वेदव्यास ने ही चारों वेदों से जुड़ा ज्ञान बताया था। इस दिन गुरुओं की पूजा की जाती है। इस दिन व्रत रखने वाले लोग भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करते हैं।
यह शुभ संयोग बन रहे
इस बार गुरु पूर्णिमा पर वाशी, सुनफा, बुधादित्य और ब्रह्म योग जैसे शुभ योगों का संयोग रहेगा।
इन राशियों में शशश योग, गुरु पूजा से लाभ
मिथुन, कन्या, धनु और मीन राशि वालों के लिए भद्र योग और वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ राशि वालों के लिए शश योग बन रहा है। इन शुभ योग और मुहूर्त में गुरुदेव की पूजा से विशेष लाभ मिलता है।
गुरु आषाढ़ पूर्णिमा मुहूर्त
आषाढ़ पूर्णिमा- 3 जुलाई 2023, सोमवार
प्रारंभ तिथि- 3 जुलाई 2023 रात्रि 08:21बजे से
समाप्ति तिथि- 4 जुलाई 2023 शाम 05:08 बजे तक
गुरु पूर्णिमा का महत्व
गुरु पूर्णिमा दुनिया भर में हिंदू, जैन, सिख और बौद्ध समुदायों द्वारा गुरुओं या शिक्षकों के सम्मान में मनाई जाती है। बौद्ध धर्म के अनुयायी भी गुरु पूर्णिमा के दिन का सम्मान करते हैं, क्योंकि इसी दिन भगवान बुद्ध ने सारनाथ में अपना पहला उपदेश दिया था।
गुरु पूर्णिमा पर व्रत का विधान
शास्त्रों के अनुसार आषाढ़ पूर्णिमा 2023 को रखे जाने वाले गोपद्म व्रत का विशेष विधान है। गोपद्म व्रत में भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। यह व्रत सभी प्रकार के सुखों को प्रदान करने वाला है।
भगवान विष्णु का मिलता है आशीर्वाद
ऐसा माना जाता है कि यदि कोई व्यक्ति गोपद्म व्रत को भक्तिपूर्वक करता है और सभी अनुष्ठानों का ठीक से पालन करता है, तो उसे भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है; सभी को सांसारिक सुख भी प्राप्त होते हैं। साथ ही गोपद्म व्रत करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और उन्हें जीवन के अंत में मोक्ष का आशीर्वाद मिलता है।