आगरालीक्स…बीमार होने पर सोच—विचार करते हैं कि किस डॉक्टर को दिखाना है, क्या कभी सोचा है कि सही पैथोलॉजी का चुनाव कैसे करना है?, डॉ. ऋतु गर्ग से जानें क्योंकि जांच ही इलाज की दिशा तय करती है
आगरा में किसी भी बीमारी का पता लगाने और उसके जोखिमों का सही आंकलन करने में पैथोलॉजी जांचों की भूमिका अहम होती है। यहां तक कि बीमारी के इलाज और मैनेजमेंट से जुड़े 70 प्रतिशत फैसले भी इन्हीं जांचों के आधार पर लिए जाते हैं। तो एक तरह से जांच ही इलाज की आधारशिला हैं। आज इस लेख में आगरा की जानी—मानीं पैथोलॉजिस्ट और आस्था पैथोलॉजी कीं डायरेक्टर डॉ. ऋतु गर्ग ने विस्तार से बताया कि जिस तरह बीमार होने पर आप अपने डॉक्टर का चुनाव बड़ी ही सावधानी से करते हैं वैसे ही एक पैथोलॉजी का चुनाव करने में भी आपको पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। साथ ही डॉ. ऋतु ने यह भी बताया कि आप कैसे एक सही पैथोलॉजी का चुनाव कर सकते हैं और आपको किन किन मानकों को एक डायग्नोस्टिक लैब को परखना चाहिए। इसमें कोई संदेह नहीं कि डायग्नोस्टिक्स हैल्थ सेक्टर की एक अहम कड़ी हैं। लोगों में अपनी सेहत के प्रति जागरूकता के कारण आज डायग्नोस्टिक्स की डिमांड भी काफी बढ़ी है। पिछले कुछ सालों में होम कलेक्शन से लेकर रिपोर्ट्स तक बहुत जल्दी आ जाती हैं, जो बहुत ही राहत की बात है। एक मामूली सा दिखने वाला बुखार डेंगू, मलेरिया, टायफाइड या कोविड किसी के भी कारण हो सकता है तो डॉक्टर केवल देखकर यह नहीं बता सकते कि यह किस तरह का फीवर है। वे अंदाजा जरूर लगा सकते हैं कि क्या हो सकता है लेकिन उसका सटीक इलाज करने के लिए बीमारी को प्रमाणित कराना होता है जो सही जांच से ही संभव है। संयोग से अब भारत में काफी सारे ऐसे टेस्ट उपलब्ध हैं जो पिन प्वाइंट भी कर सकते हैं कि किस तरह की बीमारी है, इससे मरीज को बेहतर इलाज जल्द मिल जाता है।आज से दो दशक पहले की भी बात करें तो पहले मामूली जांचें कराने के लिए काफी दूरी तक जाना पड़ता था, लैब कम होती थीं, लैब तक पहुंचकर भी कई बार नंबर आने का इंतजार करना पड़ता था। फिर सैंपल देने के बाद रिपोर्ट आने में भी कई—कई घंटे लग जाते थे मगर अब ऐसा नहीं है। इस सेक्टर ने खुद को मांग के हिसाब से बदला है। इस बात को पहले ही समझा जा चुका था कि रिपोर्ट्स का जल्दी मिलना बहुत जरूरी है क्योंकि इलाज भी जल्दी तभी शुरू हो सकेगा जब रिपोर्ट्स डॉक्टर के हाथ में होंगी। एक समय ऐसा भी था जहां पूरे देश से सैंपल लिए जाते थे और उनकी समीक्षा केवल दिल्ली, मुंबई और कलकत्ता जैसे बड़े शहरों में ही हो पाती थीं। दूसरे शहरों तक सैंपल्स के आने जाने में ही इतना वक्त लग जाता था कि इलाज शुरू होने में कई बार बहुत देर हो जाती थी लेकिन राहत की बात है कि इस सेक्टर में हुए बदलाव की वजह से इस समय की इस खाई को भी पाटा जा चुका है।
एक चीज है जो आज भी चुनौती बनी हुई है और वो है प्रशिक्षित मैनपॉवर। एक एमडी पैथोलॉजिस्ट को कहीं भी अपनी लैब चलाने के लिए बहुत अनुभवी स्टाफ की जरूरत होती है, क्योंकि बिना उनकी मदद के कुछ भी संभव नहीं है। क्योंकि पैथोलॉजिस्ट ही उस सैंपल को देखता, पढ़ता, समझता है और फिर पेशेंट के लिए डायग्नोस्टिस बनाकर देता है। हम जब छोटे शहरों की बात करते हैं तो वहां आज भी एमडी पैथोलॉजिस्ट का मिल पाना एक चुनौती है। जबकि दूसरी ओर जिस तेजी से जागरूकता बढ़ी है लोगों का जांचों की ओर झुकाव बढ़ा है। एक समय था जब चिकित्सक ही जांच लिखते और कराते थे लेकिन अब लोग स्वयं भी आगे आने लगे हैं। ऐसे में मैन पावर भी ज्यादा चाहिए।
यह कहना गलत नहीं होगा कि आज हर इंसान चाहता है कि मुझे मेरे शरीर के बारे में पता हो, मुझे पता हो कि मेरा कॉलेस्टॉल कितना है, मेरा शुगर लेवल कितना है, विटामिन बी आदि मेरे शरीर के वाइटल्स सही चल रहे हैं या नहीं। यही कारण है कि हर तीन से छह महीने में लोग अपना चैकअप कराने लगा है। कई लोग साल भर में भी जांचें कराते हैं। अब 35 की आयु के बाद जांचें कराने वालों की संख्या काफी बढ़ी है। बेसिक हैल्थ चैकअप के लिए कई लोग पैथोलॉजी लैब्स में संपर्क स्थापित करने लगे हैं और बाद में वे उन जांच रिपोर्ट्स के साथ ही डॉक्टर के पास जाते हैं। इसका एक फायदा समय की बचत के रूप् में भी देखा जाता है।
अब सबसे जरूरी सवाल आता है कि एक सही लैब का चयन कैसे किया जाए ताकि जांच रिपोर्ट्स सटीक हों और इलाज शुरूआत से ही सही दिशा की ओर बढ़े। इसका जवाब है कि आप जहां जांच कराने जा रहे हैं सबसे पहले तो वहां की गुणवत्ता देखें। देखें कि लैब उन मापदंडों को पूरा करती है जो निर्धारित हैं। उस लैब में एमडी पैथोलॉजिस्ट हैं या नहीं, क्योंकि वही सबसे जरूरी भी हैं। एमडी पैथोलॉजिस्ट यानि वह डॉक्टर जो सैंपल को अच्छे से पढ़, समझकर आपकी रिपोर्ट्स बनाते हैं। इसके अलावा टेंपरेचर कंटोल, प्रशिक्षित स्टाफ, सफाई है या नहीं। यह सब बातें देखना भी जरूरी है। जब भी किसी लैब में जाएं तो पूछे कि आपके यहां एमडी पैथोलॉजिस्ट कौन हैं। टेंपेरेचर कैसे नियंित्र त करते हैं, सैंपल कैसे टांसपोर्ट करते हैं। इससे आपको निर्णय में आसानी होगी।
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