आगरालीक्स…आगरा में अनाथ बेटियों का सावन में रचाया स्नेह का मायका. समाजसेवियों ने बंधवाई राखी, दिया रक्षा का वचन. झूले, मेंहदी, राखी से महका दो दिवसीय आयोजन…
श्रावण मास की ममतामयी छांव में माधवी अग्र महिला मंडल द्वारा आयोजित वार्षिक कार्यक्रम “माधवी बेटियों का मायका” एक बार फिर भावनाओं, परंपरा और सामाजिक ज़िम्मेदारी का अद्भुत संगम बन गया। लोहा मंडी स्थित अग्रसेन भवन में आयोजित इस विशेष आयोजन में हाथरस, अलीगढ़, फिरोजाबाद, फर्रुखाबाद, ईटानगर आदि शहरों से उन अनाथ बेटियों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया, जिनके विवाह इसी संस्था द्वारा कराए गए थे। अब विवाहित जीवन में आगे बढ़ रहीं इन बेटियों के लिए सावन के इस मौसम में यही घर, यही समाज मायके का रूप ले लेता है।अध्यक्ष पुष्पा अग्रवाल, सचिव ऊषा बंसल, कोषाध्यक्ष आभा जैन, संयोजक नमित गोयल सह संयोजक श्वेता अग्रवाल ने तिलक लगाकर और आरती करके बेटियों का स्वागत ममतामई बाहें फैला कर किया। अध्यक्ष पुष्पा अग्रवाल ने बताया कि दो दिवसीय कार्यक्रम में बेटियों के हाथों में मेंहदी रचाई गई, झूले डाले गए, सावन गीतों की गूंज के साथ हंसी-मजाक और खेलों का आयोजन हुआ। संस्था की महिला सदस्याएं एक पूरी रात बेटियों के साथ बिताकर उनके सुख-दुख साझा करती हैं, और उन्हें मां के दुलार से सराबोर करती हैं।

रक्षाबंधन कार्यक्रम के अंतर्गत बेटियों ने समाज के प्रबुद्ध पुरुषों को राखी बांधकर रक्षा, सम्मान और संरक्षण का वचन प्राप्त किया। मुख्य अतिथि नीतेश अग्रवाल, फूलचंद, उमा शंकर, ओम प्रकाश, सुरेश चन्द गर्ग, मोहनलाल अग्रवाल, बीडी अग्रवाल, सुमन प्रकाश जैन (मुंबई), सुरेश चन्द अग्रवाल, राकेश गर्ग ने अपनी कलाइयों पर रेशम की डोर बंधवाई। इस मौके पर नितेश अग्रवाल ने कहा कि माधवी अग्र महिला मंडल द्वारा आयोजित 'बेटियों का मायका' कार्यक्रम न केवल समाज के प्रति हमारी ज़िम्मेदारी की याद दिलाता है, बल्कि यह दर्शाता है कि बेटियां कहीं की भी हों, यदि समाज उन्हें अपनाए, तो हर सावन उनका मुस्कुराता हुआ पर्व बन सकता है।
मेरे लिए यह कार्यक्रम केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि एक सच्ची सामाजिक क्रांति है। जिन बेटियों को कभी मां-बाप का साया नहीं मिला, आज उन्हें मायके का दुलार, बहनों की बातें और भाई की कलाई मिली, इससे बड़ा पुण्य समाज में और क्या हो सकता है। सुरेश चंद गर्ग ने कहा कि बेटियों को मायके जैसा स्नेह देना, उन्हें राखी, मेंहदी, झूला और नानी का दुलार देना यह केवल परंपरा का निर्वहन नहीं, बल्कि उनके आत्मसम्मान को पुनर्स्थापित करने का प्रयास है।
सचिव ऊषा बंसल ने बताया कि 4 अगस्त, सोमवार को विदाई समारोह आयोजित होगा, जहां सभी बेटियों को स्नेह और आशीर्वाद के साथ उनके घरों को विदा किया जाएगा। कार्यक्रम में ऊषा अग्रवाल, निर्मल अग्रवाल संरक्षक सदस्य रजनी अग्रवाल, संगीता अग्रवाल आदि उपस्थित रहीं।