आगरालीक्स…आगरा में मुगल-ए-आजम ‘डाइड्रोजेस्टेराॅन द शहंशाह फिल्म’ का हुआ प्रीमियर. फिल्म में आगरा की सभ्यता व इतिहास के साथ बांझपन के उपचार और सुरक्षित गर्भावस्था का भी ज्ञान. आगरा के डॉक्टरों ने किया अभिनय
- आगरा के इतिहास और सभ्यता के साथ ही बांझपन के उपचार, सुरक्षित गर्भावस्था के ज्ञान पर आधारित फिल्म में आगरा के डाॅक्टरों ने किया अभिनय
- आधे घंटे की फिल्म शिक्षण-प्रशिक्षण से जुड़ी है, जिसे वेबिनार, सेमिनार से अलग रोडिनार की थीम दी गई है
यूट्यूब और ओटीटी के इस दौर में शाॅर्ट फिल्मों की ओर लोगों का रूझान बढ़ने लगा है। कम समय में कुछ अच्छा देखने के लिए शाॅर्ट फिल्में अच्छा विकल्प हैं, लेकिन जब आपको इनमें कुछ एजूकेशनल देखने को मिले तो बात ही कुछ और है।
एरिस लाइफसाइंसेज ने आगरा में ‘मुगल-ए-आजम ड्राइडोजेस्टेरोन द शहंशाह फिल्म’ शूट की है। इसका मकसद शहर के इतिहास, सभ्यता के साथ ही बांझपन के उपचार, सुरक्षित गर्भावस्था से जुड़ी शिक्षा को प्रसारित करना है। आगरा में फिल्माई गई इस फिल्म के मुख्य किरदारों में वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डाॅ. जयदीप मल्होत्रा, डाॅ. नरेंद्र मल्होत्रा, डाॅ. अमित टंडन, डाॅ. वैशाली टंडन मुख्य कलाकारों के रूप में नजर आएंगे। फिल्म का प्रीमियर शो आगरा आॅब्स एंड गायनी सोसायटी के तकरीबन 150 चिकित्सकों की मौजूदगी में शनिवार को होटल डबल ट्री हिल्टन में किया गया। डाॅक्टरों ने इस विषय पर चर्चा की।

आगरा आए एरिस लाइफसाइंसेज के जनरल मैनेजर ऋषिकेश देशमुख ने कहा कि इस तरह की फिल्में दिल्ली, चंडीगढ़, रांची, पटना, वाराणसी, आसाम, चेन्नई, कोयम्बटूर, कोलकाता, कोचीन, मुंबई, पुणे समेत 30 शहरों में किए जा रहे हैं। हर शहर में फिल्माई गई कहानी की थीम उन्हीं शहरों के आधार पर हैं और मकसद बांझपन के उपचार और सुरक्षित गर्भावस्था के ज्ञान को प्रसारित करना है। इसी वजह से इसे ‘गायनी रोडिनार साइंस एंड मोशन’ थीम दी गई है।
वरिष्ठ स्त्री रोग एवं आईवीएफ विशेषज्ञ डाॅ. जयदीप मल्होत्रा ने बताया कि शिक्षा को इस तरह मनोरंजन से जोड़कर प्रसारित करना एक नया प्रयोग है, जो इस क्षेत्र में क्रांति को जन्म दे सकता है। डाॅ. वैशाली टंडन ने कहा कि मुगल-ए-आजम डाइड्रोजेस्टेराॅन द शहंशाह एक फिल्म है जो इस शहर की सभ्यता, इतिहास को मेडिकल साइंस के साथ जोड़कर दर्शाई गई है। डाॅ. नरेंद्र मल्होत्रा ने बताया कि भारत में प्रीटर्म बर्थ, मिस्कैरेज, रिकरेंट प्रेग्नेंसी फेल्योर अन्य देशों की तुलना में काफी अधिक हैं। इसलिए इन पर अलग-अलग तरह से चर्चा होना जरूरी है। डाॅ. अमित टंडन ने कहा कि स्वास्थ्य से जुड़े ज्ञान को आगे बढ़ाने का अपने आप में यह अनौखा तरीका है।

इस दौरान आगरा आॅब्स एंड गायनी सोसायटी कीं अध्यक्ष डाॅ. आरती मनोज गुप्ता, डॉ रति खम्बाटा, डॉ रत्ना शर्मा, डॉ निधि गुप्ता, डॉ मनप्रीत शर्मा, डॉ नीरजा सचदेव, डॉ सुधा बंसल, डॉ सीमा सिंह, डॉ योगेश त्यागी, डॉ कहकशा खान, एरिस लाइफसाइंसेज के सलीम अहमद, जगजीत बत्रा आदि मौजूद थे।