आगरालीक्स…यूपीएसीकान में छाई रही प्रो. असोपा सर्जरी. सर्जरी की टेक्निक के साथ ही डॉ. असोपा के सामाजिक जीवन पर की गई चर्चा…
एसोसिएशन आफ सर्जन्स आफ इंडिया, उत्तर प्रदेश के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर में आयोजित गोल्डन जुबली समारोह में प्रो. एचएस असोपा की सर्जरी की तकनीकी छाई रही। तीन दिवसीय समारोह का रविवार को समापन हुआ और पहली बार प्रो. असोपा ओरिएशन आयोजित किया गया।
2027 में एसोसिएशन के अध्यक्ष बनने जा रहे डॉ. अमित श्रीवास्तव ने प्रो. असोपा टेक्निक पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बच्चों के मूत्रमार्ग का रास्ता टेढ़े होने की जन्मजात विकृति हाइपोस्पेडियास की सर्जरी के लिए यह टेक्निक विकसित की थी, यह टेक्निक जून 1971 में “इंटरनेशनल सर्जरी” पत्रिका में प्रकाशित हुई। इसके बाद असोपा II आपरेशन 1984 में प्रकाशित, असोपा ऑपरेशन का एक परिष्कृत संस्करण, जिसमें फोरस्किन ट्यूब का उपयोग किया गया है। असोपा प्रक्रिया 1990 संस्करण ऑपरेशन का एक और संशोधन, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है।
आगरा सर्जन्स एसोसिएशन के डॉ. सुनील शर्मा ने प्रो. असोपा के सामाजिक जीवन पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि सर्जन आपरेशन के दौरान स्वाब छोड़ देते थे तो उसे प्रो. असोपा इस तरह से निकालते थे कि बगल में खड़े सर्जन को भी पता नहीं चलता था। वहीं, शहर के किसी भी डाक्टर को आपरेशन के दौरान समस्या आ जाती थी वह उनसे संपर्क करता था, रास्ता सकरा होने पर वे स्कूटर लेकर पहुंच जाते थे और सर्जरी में मदद करते थे। किसी भी सर्जन का केस बिगड़ने पर मरीज को असोपा हास्पिटल में भर्ती करा दिया जाता था तो उस मरीज की खुद सर्जरी करते थे और कोई पैसा नहीं लेते थे।
डॉ. एसके मिश्रा एनएमसी चेयरमैन एकेडेमिक्स,डॉ. समीर कुमार ईसी मेम्बर, डॉ. निखिल सिंह अध्यक्ष, डॉ. आनंद मिश्रा चेयरमैन, डॉ. अक्षय आनंद सेक्रेटरी,डॉ. एचएल राजपूत,डॉ. सोमेंद्र पाल सिंह ,डॉ. मयंक जैन,डॉ. अंकुर बंसल, डॉ. अनुभव गोयल आदि मौजूद रहे।