आगरालीक्स…आगरा में आरबीएस के मैकेनिकल स्टूडेंट्स ने बनाया ऐसा हेलमेट जो सर्दियों में रहेगा गर्म तो गर्मी में देगा एसी जैसी ठंडक…
राजा बलवंत सिंह इंजीनियरिंग टेक्निकल कैंपस बिचपुरी आगरा में मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के अंतिम वर्ष में अध्ययनरत चार छात्रों दीपेश धाकड़, नरेश, रोहित कुमार तथा अभय चाहर ने एक ऐसा हेलमेट बनाया है जो चालक के सर को सर्दियों में गरम तथा गर्मियों में ठंडा रखेगा । जैसा हम जानते हैं कि सर्दियों में कोहरे के समय बाइक चालक के हेलमेट के फ्रंट कांच पर संघनन के कारण विजिबिलिटी लगभग जीरो हो जाती है तथा जो चालक नज़र का चश्मा पहनते है उनके लिए यह समस्या और भी बढ़ जाती है जो एक्सीडेंट का कारण भी हो सकती है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए राजा बलवंत सिंह इंजीनियरिंग टेक्निकल कैंपस के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के अंतिम वर्ष में अध्यनरत छात्रों ने एक ऐसा पेल्टियर मॉडुल आधारित हेलमेट बनाया है जो बैटरी से पावर लेकर हेलमेट के अंदर गरम हवा के बहाव को सुनिश्चित करता है। जिसके कारण जलवाष्प का संघनन हेलमेट के फ्रंट कांच की सतह पर नहीं हो पता जिससे चालक की विजिबिलिटी वही रहेगी जो बाहर हो। इस पेल्टियर मॉडल की ये भी खासियत है कि अगर इसकी पोलेरिटी बदल दी जाये तो यह हेलमेट के अंदर ठंडी हवा देता है।छात्रों द्वारा बनाये गए इस हेलमेट में चार 3.7 वोल्ट के लेड सेल्स का उपयोग किया गया है जो 4 घंटे तक इस पल्टिएर मॉडल को ऊर्जा दे सकते हैं तथा यह पूरा सिस्टम मोबाइल चार्जर द्वारा रिचार्ज भी किया जा सकता है। इस सिस्टम को बाइक से सीधे पावर लेकर भी लम्बी यात्रा के दौरान उपयोग किया जा सकता है इसके लिए एक चार्जर पॉइंट को बाइक में लगाना होगा । इस प्रोजेक्ट को संस्थान के निदेशक प्रो. बी के सिंह जी ने काफी सराहा तथा छात्रों की इस पहल को बाइक चालकों के लिए बहुत उपयोगी बताया तथा सर्दियों में विजिबिलिटी काम होने के कारण बाइक एक्सीडेंटों में कमी भी आएगी।
संस्थान के निदेशक वित्त एवं प्रशासनिक प्रो. पंकज गुप्ता जी ने छात्रों के इस नवाचार को बहुत उपयोगी बताया तथा कहां की मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र हमेशा से ही देश व समाज के लिए नित नए अविष्कार करते आ रहे हैं। उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग को "दि फ्यूचर ऑफ़ इंडिया" की संज्ञा दी। मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के डीन डॉ अमित अग्रवाल जी ने कहा कि छात्रों द्वारा बनाए गए इन नवाचारों को लेकर कोई भी अपना स्टार्टअप शुरु कर सकता है जिस से कई लोगों के लिए रोजगार का सृजन होगा । प्रोजेक्ट गाइड इंजी. अभिषेक दीक्षित तथा इंजी. राघवेंद्र सिंह ने बताया कि इस हेलमेट को बनाने में छात्रों को 6 माह का समय लगा तथा कुल 2700 रुपए की लागत आई है। छात्रों के इस कार्य में विभाग के इंजी. अनुराग कुलश्रेष्ठ, इंजी. अरुण सिंह तथा इंजी. दीपेश शर्मा का अहम योगदान रहा ।