आगरालीक्स…आगरा की यूनिवर्सिटी में शुरू हुई स्पेशल ओलिपिंक भारत की महिला और पुरुष वर्ग की राष्ट्रीय हैंडबॉल प्रतियोगिता. 23 राज्यों की टीमें शामिल होंगी, 198 से अधिक विशेष खिलाड़ी
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में स्पेशल ओलिपिंक भारत की महिला और पुरुष वर्ग की राष्ट्रीय हैंडबॉल प्रतियोगिता मंगलवार से प्रारंभ हो गई। विश्वविद्यालय के विवेकानंद (खंदारी) परिसर स्थित जेपी सभागार में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, स्पेशल ओलिंपिक भारत की चेयरपर्सन डा. मलिका नड्डा, विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी और स्पेशल ओलिंपिक भारत उप्र के चयरमैन मुकेश शुक्ला ने किया। प्रतियोगिता के उद्घाटन पर टीयर्स दिव्यांगजन संस्थान और हर्षित मेमोरियल दिव्यांगजन संस्थान के विशेष विद्यार्थियों ने एक से बढ़कर एक आकर्षक प्रस्तुतियां दीं, जिनमें राम आएंगे, ऐसा देश है मेरा आदि को सभी ने खूब सराहा।

स्पेशल ओलिंपिक भारत की चेयरपर्सन डा. मलिका नड्डा का कहना था कि इस आयोजन का उद्देश्य इन विशेष बच्चों से प्रोत्साहन लेना और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करना है। यह बच्चे कमजोर नहीं, बल्कि विशेष हैं, जिन्हें आगे बढ़ने के लिए इनके अभिभावक पूरा ध्यान दे रहे हैं। वर्मतान समय में देश की जनसंख्या में से तीन प्रतिशत दिव्यांगजन हैं, प्रदेश में इनकी संख्या 75 लाख के करीब है, जो करीब एक प्रतिशत है। ऐसे में प्रत्येक सामान्य व्यक्ति को संकल्प लेना चाहिए कि वह एक दिव्यांग या विशेष बच्चे का मेंटर या साथी बनकर उन्हें समाज की मुख्य धारा में लाने का प्रयास करेगा। यह कोई उपकार नहीं होगा, बल्कि आप राष्ट्र के एक वर्ग को सक्षम बनाकर राष्ट्र सेवा ही करेंगे। उन्होंने बताया कि इन बच्चों को थोड़ा प्रोत्साहन दिया जाए, तो यह राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परचम फहरा सकते हैं। हाल ही जर्मनी में हुए हुए वर्लिन वर्ल्ड गेम्स में भारत के डेलीगेशन में 198 खिलाड़ी शामिल हुए और उन्होंने 200 पदक जीते। उनमें दो खिलाड़ी प्रदेश के भी थे। आठ मार्च को विंटर वर्ल्ड गेम्स के लिए 49 खिलाड़ी इटरी जा रहे हैं, जिसमें प्रदेश के तीन खिलाड़ी शामिल हैं। उन्होंने इन विशेष बच्चों की सहायता के लिए ईच वन-रीच वन का संदेश दिया।
मुख्य अतिथि उच्च शिक्षामंत्री योगेंद्र उपाध्याय का कहना था कि इन विशेष बच्चों को यहां इस तरह से प्रस्तुति देते देख में बेहद भावुक व उत्साहित हूं। पहले ऐसे बच्चों को घर में छिपाकर रखा जाता था, लेकिन अब अभिभावकों की मनोस्थिति में परिवर्तन आया है और वह भी ऐसे बच्चों को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए सामान्य बच्चों की तरह ही आगे बढाने में मदद कर रहे हैं। जल्द ही मैं प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ बैठक करूंगा, जिसमें स्पेशल ओलिंपिक भारत की चेयरपर्सन डा. मलिका नड्डा के साथ बैठकर विश्वविद्यालयों में इनके लिए ढांचागत सुविधाएं देने का खाका तैयार किया जाएगा।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी का कहना था कि विश्वविद्यालय सदैव ही ऐसे जन-सरोकार वाले कार्यों में प्रमुखता से लगा रहता है। यह बच्चे लाचार नहीं, विशेष हैं, जिन्हें थोड़ी सी सहायता और सही मार्गदर्शन मिले, तो यह भी सामान्य बच्चों की तरह ही देश का नाम रोशन कर सकते हैं। इसी सोच के साथ इस तरह के आयोजन में हम पूरी सहभागिता निभाते हैं। इस आयोजन में हमारे विश्वविद्यालय के शिक्षक, विद्यार्थी और कर्मचारी इन विशेष बच्चों को पूरा सहयोग करेंगे।
स्पेशल ओलिंपिक भारत उप्र के चयरमैन मुकेश शुक्ला ने बताया कि देशभर में करीब सात करोड़ विशेष बच्चे हैं, जिनके लिए बेहद सीमित प्रयास होते थे। इस संस्था के माध्यम से इन बच्चों को उचित मंच प्रदान कर इनके सपनों को पंख दिए जाने का काम किया जा रहा है। इस आयोजन में करीब 23 राज्यों की टीमें शामिल होंगी, जिसमें 198 से अधिक विशेष खिलाड़ी अपने कोच आदि के साथ शामिल होंगे। सभी मैच विश्वविद्यालय परिसर में ही होंगे।