आगरालीक्स…आगरा में आज अंधेरा होते ही अस्पतालों का रंग हो गया लाल. सिर्फ लाल लाइट्स ही जलीं. जानें क्या है इसका कारण
आगरा में आज शाम को अंधेरा होने के साथ ही अस्पतालों का रंग लाल हो गया. रंग लाल मतलब अस्पतालों में लाल रंग की लाइट ही जलीं. यह देखकर अधिकतर लोग चौंक भी गए. लेकिन इस लाल रंग के पीछे कारण है आज विश्व थैलेसिमिया दिवस. थैलेसिमिया एक आनुवांशिक बीमारी है जिसमें शरीर में रक्त का निर्माण आंशिक अथवा पूर्ण रूप से बनना बंद हो जाता है. इसलिए इन मरीजों को बार—बार रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है. विश्व थैलेसिमिया दिवस पर लोगों को जागरूक करने के लिए ही शाम होने के बाद अस्पतालों की लाइट्स लाल हो गईं.
आईएपी आगरा ने चलाया जन जागरूकता अभियान
इसी को ध्यान में रखते हुए IAP AGRA के सदस्यों ने समर्पण ब्लड बैंक में रक्त दान शिविर का आयोजन किया, जिसमें IAP सचिव डॉ योगेश दीक्षित, डॉ सुनील अग्रवाल, डॉ अनिल अग्रवाल, डॉ अरुण जैन एवं डॉ स्वाति द्विवेदी ने रक्त दान किया. आज सुबह सेंट्रल पार्क आवास विकास कॉलोनी में आयोजित एक कार्यक्रम में लोगों को Thallessemia के बारे में जानकारी दी और लोगों को रक्तदान करने के लिये प्रोत्साहित किया.

कार्यक्रम में संयुक्त सचिव डॉ स्वाति दिवेदी ने बताया कि थैलेसिमिया बच्चों में माता पिता दोनों के जीनोम से आता है अतः Thallessemia वाले बच्चे के माता पिता दोनों की जांच जरूरी है. डॉ अश्विनी यादव ने बताया कि यदि माता-पिता दोनों कैरियर हैं तो 25% बच्चों में बीमारी गम्भीर यानी Thallessemia मेजर के रूप में होती है. डॉ मनीष कुमार सिंह ने बताया कि ईन बच्चों में आजीवन रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है जिससे शरीर में आयरन की मात्रा अत्याधिक रूप से बढ़ जाती है और आयरन शरीर के विभिन्न अंगों में जमा होने लगता है और उन अंगों की क्रियाशीलता को प्रभावित करता है.
डॉ मुकेश भारद्वाज ने बताया कि इसका स्थायी इलाज बोन मैरो ट्रांसप्लांट है जो कि आज देश के कई शहरों में किया जा रहा है परंतु इसे जितना जल्दी करवाया जाये उतने नतीजे बेहतर होंगे। अंत में डॉ अनुभव जैन ने बताया कि यद्यपि बोन मैरो ट्रांसप्लांट मंहगा होता है परंतु केंद्र, राज्य सरकारों की विभिन्न योजनाओं तथा समाजसेवी संस्थाओं द्वारा काफी मात्रा में आर्थिक मदद दी जाती है. इसी क्रम में होटल Holliday inn में एक गोष्टी का आयोजन किया गया जिसमें डॉ रोहित मंगल Hemato-oncologist ने Thallessemia के विभिन्न उपचार के तरीकों के बारे में बताया और बताया कि आगरा में भी बोन मैरो ट्रांसप्लांट की शुरुआत हो चुकी है.
गोष्ठी की अध्यक्षता IAP AGRA के प्रेसिडेंट डॉ अमरकांत गुप्ता ने की। गोष्ठी में डॉ अनिल अग्रवाल, डॉ आर एन द्विवेदी, डॉ संजय saxena, डॉ अनिल मित्तल, डॉ अजय अरोरा, डॉ पंकज, डॉ मधु नायक, डॉ प्रीति, डॉ राम क्षितिज आदि ने भाग लिया.