आगरालीक्स…आगरा में चित्रकूट धाम बना रोहता का पीएस गार्डन, चित्रकूट के स्वामी श्री रामस्वरूपाचार्य जी महाराज के मुखारबिन्द से बही श्रीराम कथा की गंगा
श्रीराम की महिमा सुनाने के लिए दक्षिण में ऋषि कुम्भज को हिमालय की चोटियों से शिवजी के रूप में ऐसा श्रोता मिला जिसके बराबर कोई ज्ञानी नहीं। एक बार त्रेता जुग माहीं, संभु गए कुम्भज ऋषि पाहीं, रामकथा मुनि बर्ज बखानी, सुनि महेश परम सुखुमानी… चौपाई के संगीतमय वर्णन ने मानों श्रद्धालुओं को उस त्रैतायुग के दर्शन करा दिए, जहां श्रीराम का अवतरण हुआ। त्रित्रकूट धाम बना कथा स्थल पर सियाराम और बजरंगबली के जयकारों के संग भक्तों ने श्रीराम कथा का आनन्द लिया।श्रीकामतानाथ सेवा समिति द्वारा पीएस गार्डन में आयोजित श्रीराम कथा में प्रथम दिन व्यासपीठ से कथावाचक चित्रकूट के स्वामी श्री रामस्वरूपाचार्य जी महाराज ने तुम्ह पुनि राम राम दिन राती, सादर जपहु अनंग आराती… चौपाई के माद्यम से बताया कि शिवजी दिन रात श्रीराम के नाम का जप करते हैं। भगवान शिव ग्यारवें रूद्र में हनुमान बने तो उन्होंने सियाराम को हृदय में रखा। इसके पहले भगवान शिव ने सीताराम के चरित्र को अपने हृदय में रखा। हृदय में वही रखा जाता है जो अतिप्रिय हो। शिवजी को सियाराम का नाम अतिप्रिय है। त्रिभुवन में शिवजी के बराबर रामनाम जापक कोई नहीं। शिव सर्वत्र हैं। सबके लिए सुलभ हैं शिवजी। भगवान शिव का प्रिय ग्रंथ है श्रीराम कथा। जो श्रीराम कथा सुनता है वह शिवजी की कृपा पात्र बन जाता है। शिवजी व माता सती की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि विचारों में संकीर्णता और संशय दूरियां पैदा करती है। संशय को दूर करना है तो रामकथा की परम्परा से जुड़ जाओ। जो रामकथा के दिव्य संस्कारों को पति-पत्नी और पुत्र-पुत्री और समाज को हर व्यक्ति स्वीकार कर ले तो हर घर शिवालय और रामालय बन जाएगा।
करुणा कर अपना लो राम, अपनी शरण में ले लो राम… कीर्तन में हर श्रद्धालु भक्ति में डूबा नजर आया। इस अवसर पर मुख्य रूप से ऋषिकेश से पधारे वैष्णव रामानन्द सम्प्रदाय के दयाराम देवाचार्य जी महाराज, आयोजन समिति के अध्यक्ष राम सेवक शर्मा (जय भोले) व महामंत्री धर्मेन्द्र त्यागी ने सभी श्रद्धालुओं को कथा श्रवण के लिए आमंत्रित किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से मुख्य यजमान सिलेंद्र विथरिया, हाकिम सिंह त्यागी, दीनदयाल मित्तल, हाकिम सिंह त्यागी, ऋषि उपाध्याय, रामवीर सिंह चाहर, अशोक फौजदार, रामवीर सिंह, अशोक फौजदार महावीर त्यागी, किशोर लवानिया , रनवीर सोलंकी, सौरभ शर्मा, सतेंद्र परासर, जितेंद्र प्रधान, राजेंद्र बरुआ, भगवान दास, राकेश मंगल, रविन्द्र सिंह,मुरारी लाल त्यागी, सोम मित्तल, किशन यादव, सहित हजारों लोगों की उपस्थिति रही।भोले के साथ भाले भी हैं शिवजी
शिवजी जैसा कोई सरल नहीं और उनके जैसा कोई रौद्र रूप धारण करना वाला भी कोई नहीं। इसीलिए भगवान शिव को रूद्र रूप भी कहा गया है।
सिर्फ जन नहीं सुजन बनिए
स्वामी श्री रामस्वरूपाचार्य जी महाराज ने कहा कि सिर्फ जन नहीं सुजन बनिए। जिसमें चेहरे की नहीं विचारों की सुन्दरता हो। वर्तमान में पारीवारिक समस्याओं और विघटन का दूर करने का समाधान बताते हुए कहा कि पति पत्नी एक दूसरे के पूरक बनें। एक दूसरे का आदर करे। संतान को जन्म देना सरल परन्तु उसे संस्कारवान बनाना कठिन है। परिधान वो होने चाहिए जिनमें मर्यादा हो। आज के परिधान भारतीय संस्कृति को लज्जित कर रहे हैं। जब परिधान भारतीय संस्कृति से सुसज्जित होंगे तो घोर कलिकाल में ही हम हमारे बच्चों में राम और सीता के ही दर्शन होंगे।
सूर्य देव की कृपा है श्रीराम कथा पर
स्वामी श्री रामस्वरूपाचार्य जी महाराज ने कहा कि सूर्यवंशी श्रीराम की कथा का शुभारम्भ रविवार के दिन हुआ है। रविवार का दूसरा नाम एतवार भी है जिसका अर्थ विश्वास है। सूर्य देवता आरोग्यता प्रदान करते हैं और विश्वास का भी प्रतीक हैं। कहा श्रीराम की कथा में सूर्य देवता प्रत्यक्ष रूप से प्रसन्न है, जिससे अपना वो प्रभाव नहीं दिखा रहे जिससे श्रद्धालुओं को गर्मी से परेशानी हो। इसका अर्थ है सूर्य देवती की कृपा है।