आगरालीक्स…आगरा के बाह और पिनाहट में चंबल का जलस्तर हुआ कम. दलदल बने रास्ते. पटरी पर धीरे—धीरे लौटने लगी जिंदगी, कई गांवों का रास्ता हुआ साफ
चंबल की बाढ़ की विभीषिका से जूझे नदी किनारे के गांवों की जिंदगी पटरी पर लौटने लगी है। बाह के गोहरा, रानीपुरा, भटपुरा, गांव का संपर्क जुड़ गया। इन गांवों के रास्तों पर जमी सिल्ट को हटा दिया गया है। खेडा राठौर के प्रधान विजय उर्फ भूरे, ने बताया कि ट्रैक्टर, जेसीबी आदि चलवा कर सिल्ट हटवाई है। गांवों में आवागमन शुरू हो गया है। उन्होंने बताया कि सोमवार को रास्ता खुलने के साथ ही गांवाें की बिजली जुड़ गई है। जिससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। लेकिन बाह के गुढ़ा और झरनापुरा के गांव की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं।दोनों गांवों के रास्तों पर कीचड़ भरा हुआ है। गांव वालों को रास्ता साफ होने के लिए अभी कुछ और दिन का इंतजार करना पड़ेगा। रास्ता साफ हो तभी गांवों की बिजली जुड़ सकेगी। बतादें कि बाढ़ में चंबल नदी खतरे के निशान 130 मीटर को पार कर 134 मीटर पर पहुंच गई थी। सोमवार को नदी का जलस्तर 3 मीटर और घट कर 121 मीटर रह गया है। 4 दिनों में नदी के जलस्तर में 13 मीटर की गिरावट दर्ज हुई है।
भयंकर बाढ़ से चंबल घाट पहुंच मार्ग क्षतिग्रस्त, आवागमन ठपचंबल नदी में आई भीषण बाढ़ ने क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा के कारण पिनाहट चंबल घाट को जोड़ने वाला मुख्य पहुंच मार्ग पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है। नदी की तेज धारा और कटान के चलते सड़क का बड़ा हिस्सा कट गया है, जिससे ग्रामीणों और यात्रियों को आवाजाही में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि यह आसपास के कई गांवों को जोड़ने वाला प्रमुख रास्ता भी है। सड़क के टूट जाने से न केवल जनजीवन प्रभावित हुआ है, बल्कि आपात स्थिति में भी राहत और बचाव कार्यों में बाधा उत्पन्न हो रही है।
स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से जल्द से जल्द सड़क मरम्मत कराने की मांग की है ताकि आवागमन बहाल हो सके और जनजीवन सामान्य हो सके।