
विवि के बीएड सत्र 2005 में 83 कॉलेजों के 8930 छात्रों ने परीक्षा दी थी, लेकिन मार्कशीट 12 हजार छात्रों को दे दी गई। साथ ही चार्ट में नंबर भी बढाए गए। विवि के अधिकारी और कर्मचारियों ने करोडों की कमाई कर बीएड की फर्जी मार्कशीट बांटने के बाद चार्ट में नंबर दर्ज कर दिए, इसके आधार पर हजारों अभ्यर्थी सरकारी शिक्षक भी बन गए हैं और सैलरी ले रहे हैं। बीएड के छात्र सुनील कुमार ने अपनी डुप्लीकेट मार्कशीट विवि से मांगी तो होश उड गए, पहले दी गई मार्कशीट और डुप्लीकेट मार्कशीट में अंतर था, इस पर सुनील कुमार द्वारा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई।
दो साल से जांच कर रही एसआईटी, नहीं दिए रिकॉर्ड
इस मामले में विशेष जांच दल एसआईटी द्वारा दो साल से जांच की जा रही है, लेकिन विवि के अधिकारी बीएड के मूल चार्ट, अवार्ड लिस्ट, सीडी और कर्मचारियों का रिकॉर्ड नहीं दे रहे हैं, इससे यह पता नहीं चल पा रहा है कि बीएड फर्जीवाडा किस स्तर से किया गया है और कौन कौन आरोपी हैं।
अधिकारियों से नोकझोंके के बाद गर्माया मामला
गुरुवार को एसआईटी की टीम शाम को कुलसचिव अशोक अरविंद से मिलने के लिए उनके कार्यालय पहुंची। टीम ने रिकॉर्ड मांगे, इसी को लेकर विवाद बढता चला गया, नोकझोंक के बाद टीम ने मुख्यालय में बात की और यह 2005 से 2016 तक रहे कुलसचिवों पर रिकॉर्ड गायब करने के मामले में आरपाधिक मुकदमा दर्ज करने का फैसला ले लिया गया। इस प्रकरण में एक कर्मचारी जेल में है, दो के कुर्की के आदेश जारी हो चुके हैं और विवि के अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज किया गया है।
ये रहे हैं कुलसचिव
शिवपूजन, बालजी यादव, शत्रुघ्न सिंह, सीबी सिंह, बीके पांडे, प्रभात रंजन, केएन सिंह, अशोक अरविंद सहित एक दर्जन कुलसचिव रहे हैं।
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