आगरालीक्स ..आगरा में यमुना एक्सप्रेस वे पर भीषण सडक हादसे में तीन डॉक्टरों की मौत, कार आगे चल रहे टैंकर में जा
घुसी, मौके पर ही तीन डॉक्टरों की मौत हो गई, उनके तीन साथी डॉक्टरों को गंभीर चोट आई हैं। ये सभी एम्स के डॉक्टर बताए जा रहे हैं और शनिवार रात को नोएडा से कार से आगरा आ रहे थे।
शनिवार रात को यमुना एक्सप्रेस वे पर रात तीन बजे नोएडा से आ रही इनोवा कार सीएच 01 एएस 2431 शनिवार आगरा की ओर आ रही थी। मथुरा के थाना सुरीर क्षेत्र में माइल स्टोन 88 के पास रात तीन बजे आगे चल रहे टैंकर में इनोवा कार घुस गई, भीषण हादसे से इनोवा का आगे का हिस्सा कैंटर में घुस गया। तेज आवाज और चीख पुकार सुनकर पुलिस और स्थानीय लोग पहुंचे।
तीन डॉक्टरों की मौके पर ही मौत
हादसे के बाद इनोवा में फंसे खून से लथपथ लोगों को बाहर निकाला गया, हादसे में मौके पर ही डॉ हेमबाला, डॉ हर्षद और डॉ यशप्रीत की मौत हो गई। वहीं, डॉ महेश, डॉ अभिनव और डॉ अभिनव गंभीर घायल हैं। जबकि जितेंद्र को भी चोट आई है, यह कार चालक बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि ये सभी एम्स के डॉक्टर थे और नोएडा से आगरा घूमने के लिए आ रहे थे।
कार को काटकर निकाले घायल और शव
भीषण हादसे के बाद कार का आगे का हिस्सा टैंकर में घुस गया, कार को काटकर घायल और शवों को बाहर निकाला जा सका। घायलो की हालत गंभीर होने पर एम्स दिल्ली रेफर कर दिया गया।
यमुना एक्सप्रेस वे पर हादसे में हो रहीं मौतें
आगरा डेवलेपमेंट फाउंडेशन (एडीएफ) ने यमुना एक्सप्रेस वे पर हो रहे हादसों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है, जनहित याचिका सं0 55980/2017 दायर कर अनेक मुद्दों को उठाया है और विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। याचिका को 24 नवंबर को उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश दिलीप बी. भोसले व न्यायधीश मनोज कुमार गुप्ता की खण्डपीठ ने नोटिस जारी कर सम्बन्धित विभागों से जवाब मांगा है। इस मामले में अगली सुनवाई 20 दिसंबर को होगी। मुख्य न्यायाधीश की खण्डपीठ द्वारा सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय के सचिव, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और ट्रान्सपोर्ट कमिश्नर, उ0प्र0 को भी पक्षकार बनाकर उनसे जवाब मांगा है।

जनहित याचिका में इन मुददों को उठाया गया है
1. पूर्व में एडीएफ द्वारा दायर की गई जनहित याचिका संख्या 28428/2015 में पारित आदेश दि0 18.5.2015 के उपरान्त भी सम्बन्धित विभागों ने कोई कारगर कार्यवाही नहीं की।
2. दिनांक 1.1.2017 से 31.7.2017 के मध्य निर्धारित गतिसीमा का उल्लंघन करने वाले वाहनों की संख्या 18,15,272 थी, जबकि स्थल पर दि0 1.1.2017 से 30.6.2017 तक कुल4,557 वाहनों का चालान किया गया।
3. दिनांक 15.8.2012 से 30.6.2017 तक यमुना एक्सप्रेसवे पर 4508 हादसे हुए जिनमें 636 व्यक्तियों की मृत्यु हो गई।
4. यमुना एक्सप्रेसवे पर अनेक स्थानों पर नम्बरप्लेट रीडर व गतिसीमा को रिकाॅर्ड करने हेतु कैमरे लगे है, उसके बावजूद भी गतिसीमा का उल्लंघन आधे से अधिक वाहन करते हैं।
5. पुलिस के पास गतिसीमा का उल्लंघन करने वाले वाहनों के आंकड़े हैं पर वे चालान नहीं करती है।
6. 50 प्रतिशत वाहन गतिसीमा का उल्लंघन करते हैं।
7. उत्तर प्रदेश सुरक्षा नियमावली, 2014 की प्रबन्ध कमेटी द्वारा फण्ड का प्रयोग नहीं किया जा रहा है।
8. उत्तर प्रदेश सड़क सुरक्षा परिषद् अपने कर्तव्यों का निर्वाहन नहीं करती है।
9. सेन्ट्रल रोड रिसर्च इन्स्टीट्यूट (सीआरआरआई) की रिपोर्ट में की गई संस्तुति को सही ढंग से लागू नहीं किया जा रहा है।
10. यमुना एक्सप्रेसवे का कन्वेन्शनल रोड सेफ्टी आॅडिट होना चाहिए।
हर साल हो रहे हादसे
यमुना एक्सप्रेस वे पर वर्ष 2013 में 118 मृत्यु हुयी जबकि वर्ष 2014 में 127 लोग मारे गये। वर्ष 2015 में 142 व वर्ष 2016 में 128 लोगों की मौत यमुना एक्सप्रेस वे पर हादसों में हुयी। इन चारों वर्षो में हादसों में हुयी मौतों के मुकाबले वर्ष 2017 की पिछली छमाही में हुयी 78 मौतें चैकानंे वाली हैं।
फाइल फोटो