आगरालीक्स… आमलकी (रंग भरनी) एकादशी 14 मार्च को है। एकादशी का व्रत कल्याणकारी और मनोकामनाएं पूरी करता है।
श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान, गुरु रत्न भंडार के ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा के मुताबिक 13 मार्च रविवार सुबह 10:21 से 14 मार्च दोपहर 12:05 तक रंग भरनी एकादशी है । एकादशी व्रत के पुण्य के समान और कोई पुण्य नहीं है ।
-जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से होता है, उससे कई गुना अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।
-जो पुण्य गौ-दान सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ से होता है, उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।
-धन-धान्य, पुत्रादि की वृद्धि होती है ।
-कीर्ति बढ़ती है, श्रद्धा-भक्ति बढ़ती है, जिससे जीवन रसमय बनता है ।
एकादशी के दिन करने योग्य
-एकादशी को दिया जला के विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें विष्णु सहस्त्र नाम नहीं हो तो 10 माला गुरुमंत्र का जप कर लें l अगर घर में झगडे होते हों, तो झगड़े शांत हों जायें ऐसा संकल्प करके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें तो घर के झगड़े भी शांत होंगे l
एकादशी के दिन ये सावधानी रहे
-महीने में १५-१५ दिन में एकादशी आती है एकादशी का व्रत पाप और रोगों को स्वाहा कर देता है लेकिन वृद्ध, बालक और बीमार व्यक्ति एकादशी न रख सके तभी भी उनको चावल का तो त्याग करना चाहिए
रंग भरनी एकादशी
धर्म की नगरी कशी में फाल्गुन शुक्ल एकादशी को रंगभरी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। फाल्ल्गुन शुक्ल एकादशी के दिन बाबा विश्वनाथ का विशेष श्रृंगार किया जाता है। रंगभरी एकादशी के दिन से ही होली का पर्व शुरू हो जाता है।
-शास्त्रों के अनुसार रंगभरी एकादशी के दिन आंवले के वृक्ष की पूजा का विधान है।
-आंवले के वृक्ष की पूजा प्रातः काल स्नान आदि से निवृत होकर आंवले के वृक्ष में जल अर्पित करें।