आगरालीक्स…. आगरा में ईवीएम में छेडखानी के आरोप लगाते हुए बडा प्रदर्शन, हाईवे पर लगाया जाम, लोगों का कहना है कि हमारा वोट कहां चला गया, एत्मादपुर सीट पर ईवीएम में धांधली हुई है। इसके चलते ही बसपा के बजाय भाजपा की जीत हो गई।
आगरा के टेढी बगिया क्षेत्र में मंगलवार सुबह जाटव और मुस्लिम समाज के लोगों ने आगरा अलीगढ हाईवे पर जाम लगा दिया। उनका कहना था कि हमारा वोट कहां चला गया, ईवीएम में धांधली नहीं होती तो बसपा प्रत्याशी जीत जाता, भाजपा प्रत्याशी राम प्रताप चौहान को 1 35 लाख वोट कैसे मिल गए, पिछले चुनाव में भाजपा के ही राम प्रताप चौहान को 50 हजार वोट ही मिले थे। पुलिस प्रशासन ने उन्हें समझा बुझाकर शांत किया।

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन ईवीएम में एक कंट्रोल यूनिट होती है. एक बैलट यूनिट और 5 मीटर की केबल. मतदाता को अपनी पसंद के प्रत्याशी के सामने दिया बटन दबाना होता है और एक वोट लेते ही मशीन लॉक हो जाती है. इसके बाद सिर्फ नए बैलट नंबर से ही खुलती है. एक मिनट में ईवीएम में सिर्फ 5 वोट दिए जा सकते हैं.
ईवीएम पिछले 15 सालों से भारत में इलेक्शन का हिस्सा बनी हुई है.
ईवीएम को हैक करने की दी जा चुकी है धमकी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ईवीएम मशीनों को हैक करने के लिए कई बार धमकी दी जा चुकी है. सिर्फ भारत ही नहीं कई देशों में ये हुआ है. हैकरों ने ईवीएम रिजल्ट बदलने से लेकर वोटरों की जानकारी जगजाहिर करने तक की घमकी दी है. इसके अलावा, सिर्फ सिक्योरिटी के लिए ईवीएम का इलेक्शन सॉफ्टवेयर भी बदला जा चुका है. हालांकि, इसके बाद भी ईवीएम को हैक करना काफी आसान है.
पूर्व चुनाव आयुक्त टीएस कृष्णमूर्ति ने कहा साबित नहीं किए जासके आरोप
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार पूर्व चुनाव आयुक्त टीएस कृष्णमूर्ति का कहना है कि , “जो मशीन भारत में इस्तेमाल की जाती है, वो मज़बूत मशीनें हैं और मुझे नहीं लगता कि उन्हें हैक किया जा सकता है.”
उन्होंने कहा, “ऐसा हो सकता है कि पोलिंग बूथ पर मशीन चलाने वाले ठीक से इसे चला ना पाएं लेकिन मतदान से पहले इन मशीनों को कड़ी जांच से गुजरना पड़ता है.” “इससे पहले भी कई लोगों ने ईवीएम मशीनों से छेड़छाड़ के आरोप लगाए थे, लेकिन अदालत में ये आरोप साबित नहीं किए जा सके और सुप्रीम कोर्ट ने मामले को ख़ारिज कर दिया था.”
कुछ देशों में ईवीएम की गई बैन
जर्मनी ने ईवोटिंग को असंवैधानिक कहा था क्योंकि इसमें पारदर्शिता नहीं है.
इटली ने इसलिए ईवोटिंग को खारिज कर दिया था क्योंकि इनके नतीजों को आसानी से बदला जा सकता है.
नीदरलैंड ने पारदर्शिता ना होने के कारण ईवीएम बैन कर दी थी.
आयरलैंड ने 3 साल की रिसर्च कर के बाद सुरक्षा और पारदर्शिता का कारण देकर ईवीएम को बैन कर दिया था.
जर्मनी ने ईवोटिंग को असंवैधानिक कहा था क्योंकि इसमें पारदर्शिता नहीं है.
इटली ने इसलिए ईवोटिंग को खारिज कर दिया था क्योंकि इनके नतीजों को आसानी से बदला जा सकता है.
यूएस- कैलिफोर्निया और अन्य राज्यों ने ईवीएम को बिना पेपर ट्रेल के बैन कर दिया था.
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