
शुक्रवार रात को आगरा बर्तन भंडार के संचालक सुनील जैन के बेटे संभव जैन अपनी एसएक्स 4 गाडी से घर लौट रहे थे। उनकी नुनिहाई में 22 नंबर फैक्ट्री है। नुनिहाई पर उनकी कार सामने से आ रहे ट्रैक्टर ट्रॉली में भिड गई, बताया जा रहा है कि ट्रैक्टर ट्रॉली में लाइट नहीं थी, इसलिए उन्हें सामने से आ रहा ट्रैक्टर दिखाई नहीं दिया। भीषण हादसे की तेज आवाज सुनकर स्थानीय लोग आ गए, हादसा इतना भीषण था कि कार के परखच्चे उड गए। नुनिहाई रोड पर हुए हादसे के बाद लोगों की भीड जुट गई और गाडी में भंसे संभव जैन को बाहर निकलाने के प्रयास में जुट गए।
गाडी के परखच्चे उडे, एयरबैग में फंसे
भीषण हादसे में एसएक्स 4 के परखच्चे उड गए, संभव जैन सीट बेल्ड पहने हुए थे। वहीं, लग्जरी गाडी होने से एक्सीडेंट होते ही एयरबैग खुल गया, संभव जैन एयरबैग में फंसे हुए थे। उन्हें स्थानीय लोगों ने बमुश्किल एयरबैग में फंसे होने पर बमुश्किल बाहर निकाला। घायलों को हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।
जाने एयरबैग और एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम
एयरबैग एक ऐसा उपकरण है जिसे कार ड्राइव कर रहे व्यक्ति और गाड़ी में बैठे पैसेंजर्स की सुविधा के लिए बनाई गई है. 80 के दशक में इसे सबसे पहले कारों के लिए प्रयोग किया गया. 1998 में अमेरिका में सभी कारों में एयरबैग्स लगाना अनिवार्य कर दिया गया.एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम कार को आपात स्थिति में सुरक्षित तरीके से रोकने के काम आता है. यानी ऐक्सिडेंट जैसी आपात स्थिति में इसका प्रयोग करके ड्राइवर गाड़ी के पहियों को अनियंत्रित तरीके से फिसलने से बचा सकता है. इसलिए एयरबैग और एबीएस का प्रयोग ड्राइवर पैसेंजर्स की सुरक्षा उपायों के लिए जरूरी माना जाता है. जिन कारों में एयरबैग लगे होते हैं, उनमें एक डाइग्नोस्टिक सिस्टम लगा होता है, जिन्हें हम SRS (सप्लीमेंटल रिस्ट्रेंट सिस्टम) के नाम से जानते हैं। यह सिस्टम हमें बताता है कि हमारे कार में लगे एयरबैग ठीक तरीके से काम कर रहे हैं या नहीं। इस सिस्टम को समझने का तरीका बेहद आसान है। जैसे ही आप अपनी कार स्टार्ट करते हैं, आपकी कार के मीटर में लगे SRS इंडिकेटर्स कुछ सेकेंड के लिए जल जाते हैं। अगर SRS इंडिकेटर कुछ सेकेंड्स के बाद ऑफ नहीं होते या फिर जलते रह जाते हैं तो समझ जाइए कि आपके एयरबैग में कोई ना कोई दिक्कत ज़रूर है।
सीट बेल्ट जरूरी पहनें
कार में लगी सीट बेल्ट का भी एयरबैग की फंक्शन से संबंध होता है। एयरबैग को बनाते वक्त इस बात का भी ख्याल रखा जाता है कि गाड़ी में बैठे आदमी ने सीट बेल्ट लगा रखा हो। इसलिए सिर्फ एयरबैग के भरोसे ना बैठें। गाड़ी में बैठते ही सीट बेल्ट जरूर लगाएं। टक्कर के बाद एयरबैग के खुलने की रफ्तार 322 किलोमीटर प्रति घंटे तक हो सकती है।
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