आगरालीक्स…पूरे नौ दिन के होंगे इस बाद के चैत्र नवरात्रि. डोली में होगा माता का आगमन, 89 साल बाद बनेगा विशेष दुर्लभ संयोग –
चैत्र नवरात्र 19 मार्च गुरुवार से शुरू हो रहा है। 89 साल बाद नवरात्र पुराने साल में शुरू और नए साल में समाप्त होगा। माँ दुर्गा इस बार पालकी (डोली) पर सवार होकर आएंगी। धार्मिक मान्यतानुसार पालकी पर माता का आगमन शुभ नहीं माना जाता, इससे दुनिया में महामारी के संकेत भी मिल सकते हैं। श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भण्डार वाले प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा के मुताबिक 19 मार्च से शुरू हो रहे नए संवत्सर का नाम 'रौद्र' है जिसे "रौद्र संवत्सर" के नाम से जाना जाएगा। जिसका राजा गुरु और मंत्री मंगल होगा। 19 मार्च गुरुवार से इस वर्ष चैत्र नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना के साथ होगी। इस दिन गुड़ी पड़वा के साथ हिंदू नववर्ष मनाया जाएगा। 27 मार्च शुक्रवार तक भक्त देवी की आराधना करेंगे और नवरात्रि का समापन होगा। 27 मार्च शुक्रवार को ही रामनवमी होगी। नया विक्रम संवत 2083 एवं शक संवत 1948 होगा।सनातन धर्म में नया वर्ष चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से प्रारंभ होता है। यहीं से विक्रम संवत का आरंभ होता है। नए साल की शुरुआत माता रानी की उपासना से होती है। इस बार आठ दशक बाद ऐसा हुआ है कि तिथि तो दूर एक संवत्सर का ही लोप जाएगा। हिंदू नवसंवत्सर प्रतिपदा के बजाय द्वितीय तिथि से शुरू होगा। इस संवत्सर का नाम रौद्र संवत्सर रहेगा। वर्ष के आरंभ में चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा की तिथि का क्षय है। प्रतिपदा तिथि अमावस्या में मिलने के कारण पहली तिथि टूटने का योग बन रहा है, लेकिन इसके बावजूद नवरात्र पूरे नौ दिनों के ही रहेंगे। प्रतिपदा तिथि 19 को सूर्योदय के बाद प्रारंभ होगी और अगले दिन 20 मार्च को सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी। शास्त्रों के अनुसार जिस दिन प्रतिपदा तिथि होती है, उसी दिन नवरात्र घटस्थापना करना श्रेष्ठ माना गया है।
ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी ने बताया कि एक संवत्सर और तिथि के लोप के साथ पुराने साल में ही नवरात्र की शुरुआत होगी। 19 मार्च को बृहस्पतिवार है। सुबह 6:40 बजे तक अमावस्या रहेगी। इसके बाद प्रतिपदा तिथि शुरू हो जाएगी। मंदिरों और घरों में कलश स्थापना होगी और नौ गौरी के दर्शन होंगे। 20 मार्च से नए पंचांग के अनुसार साल की शुरुआत होगी। राजा गुरु होने से धार्मिक कार्यों में उन्नयन होगा। मंत्री मंगल होने से कुछ अशांति की स्थिति रहेगी।ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी ने बताया चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि की हानि से यह चैत्र शुक्ल पक्ष 14 दिनों का होगा। 89 वर्ष बाद बृहस्पति संवत्सर का लोप हुआ है; इससे पहले 1937 में हुआ था। प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 06:40 से 20 मार्च को सुबह 06:21 तक रहेगी। ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी ने बताया की इस साल की चैत्र नवरात्रि के पहले ही दिन पर 3 शुभ योग शुक्ल, ब्रह्म और सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहे हैं। ये तीनों ही योग शुभ फलदायी होते हैं।
शुक्ल योगः 19 मार्च, प्रातःकाल 06 बजे से लेकर देर रात 01:17 Am (19 मार्च) तक
ब्रह्म योगः 19 मार्च, देर रात 1:17 Am से 20 मार्च को देर रात 04:05 तक
सर्वार्थ सिद्धि योग: 19 मार्च, देर रात 4:05 Am से 20 मार्च सुबह 6:25 Am तक
चैत्र नवरात्रि 2026 पहले दिन के शुभ मुहूर्त -
चैत्र नवरात्रि के पहले दिन का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:51 बजे से 05:39 Am तक रहेगा.
प्रातः सन्ध्या का मुहूर्त सुबह 05:15 Am से 06:26 Am तक है.
उस दिन का विजय मुहूर्त दोपहर में 02:30 Pm से 03:18 Pm तक है.
गोधूलि मुहूर्त शाम को 06:29 Pm से 06:53 Pm तक रहेगा.
सायाह्न सन्ध्या का समय शाम 06:32 Pm से 07:43 Pm तक है.
अमृत काल रात में 11:32 Pm से देर रात 01.03 Am तक है.
उस दिन का निशिता मुहूर्त देर रात 12:05 Am लेकर 12:52 Am तक है.
पहले दिन का राहुकाल -
चैत्र नवरात्रि के पहले दिन राहुकाल दोपहर 2:00 बजे से 3:30 बजे तक रहेगा। इस समय शुभ कार्य करने से बचना चाहिए।
मां दुर्गा का वाहन -
हर बार नवरात्र में देवी अलग-अलग वाहन पर आती हैं, और उस वाहन के हिसाब से अगले छह महीने की स्थिति का अनुमान लगाया जाता है। ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी के अनुसार इस बार मां दुर्गा पालकी पर सवार होकर आएंगी। देवी भागवत में पालकी में माता के आगमन का फल "ढोलायां मरणं धुवम्" बताया गया है जो जन हानि रक्तपात होना बताता है। अर्थात पालकी (डोली) पर माता का आगमन शुभता का संकेत नहीं है। माता का डोली पर आगमन सामाजिक-राजनीतिक उथल-पुथल व महामारी का परिचायक माना गया है।
इस वर्ष चैत्र नवरात्रि पूरे 9 दिनों तक मनाई जाएगी।
नौ दिन और नौ देवियां -
19 मार्च गुरुवार - नवरात्रि दिन 1- अमावस्या, प्रतिपदा मां शैलपुत्री पूजा और घटस्थापना
20 मार्च शुक्रवार - नवरात्रि दिन 2- मां ब्रह्मचारिणी पूजा
21 मार्च शनिवार - नवरात्रि दिन 3- मां चंद्रघंटा पूजा
22 मार्च रविवार - नवरात्रि दिन 4- मां कुष्मांडा पूजा
23 मार्च सोमवार - नवरात्रि दिन 5- मां स्कंदमाता पूजा
24 मार्च मंगलवार - नवरात्रि दिन 6- मां कात्यायनी पूजा
25 मार्च बुधवार - नवरात्रि दिन 7- मां कालरात्रि पूजा
26 मार्च गुरुवार - नवरात्रि दिन 8- मां महागौरी पूजा ( इस दिन अष्टमी मनाई जाएगी और कन्या पूजन कर सकते हैं। )
27 मार्च शुक्रवार - नवरात्रि दिन 9- मां सिद्धिदात्री पूजा ( नवरात्रि का समापन और नवमी कन्या पूजन किया जाएगा )