आगरालीक्स ..सीएम अखिलेश यादव, Paytm के सीईओ विजय शेखर शर्मा और मणिराम का टूटा रिक्शा, सीएम की फेसबुक पोस्ट से मणिराम चर्चा में है, उसके पास घर, ई रिक्शा और छह हजार रुपये हैं जो सीएम अखिलेश यादव ने उसे दिए थे।
27 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के सर्वाेच्च नागरिक सम्मान यश भारती ग्रहण करने के बाद श्री शेखर को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिलने उनके सरकारी आवास 5, कालीदास मार्ग जाना था। रास्ते में उनकी कार जाम में फंस गयी। मुख्यमंत्री से मिलने का समय तय था, देरी के कारण उन्होंने कार छोड़ दी और रिक्शे पर सवार होकर मुख्यमंत्री आवास पहुंच गये।
गेट से अंदर पहुंचते ही खुली किस्मत
रिक्शा से विजय शेखर शर्मा सीएम अखिलेश यादव के घर पहुंचे, सुरक्षा कर्मियों ने गेट पर रोक लिया। रिक्शा चालक भी किराए के 50 रुपये लेकर जाने लगा, लेकिन विजय शेखर ने उससे कहा कि अंदर तक छोड दे। सुरक्षा कर्मियों ने पूछताछ के बाद रिक्शा चालक से अंदर जाने के लिए कह दिया। विजय शेखर शर्मा को छोडकर रिक्शा चालक मणिराम जाने लगा, सीएम अखिलेश यादव ने आवाज लगाई और उसे रोक लिया।
मुख्यमंत्री के मुरीद हो गए मणिराम
सीएम अखिलेश यादव ने रिक्शा चालक को मणिराम को एक घर, 6000 रूपये और एक ई-रिक्शा उपहार के रूप में दिया। मणिराम बेहद खुश है। उसका कहना है, ‘ भैया, हमय बहुत जानकारी नाहीं है, मुला पहलिन बार मिलन हैं और हम मुख्यमंत्री कय मुरीद होइ गयन।’
मेट्रो बनने के बाद नहीं लगेगा जाम
सीएम अखिलेश यादव ने विजय शेखर शर्मा से कहा कि जल्द ही लखनऊ मेट्रो चलने लगेगी, इसके बाद जाम में नहीं फंसोगे।
सीएम अखिलेश यादव फेसबुक पोस्ट
A traffic jam forced Paytm CEO Vijay Shekhar Sharma to visit 5 Kalidas in a cycle rickshaw. The Lucknow Metro will help solve the traffic jams in the city. More phases of the Lucknow Metro are planned for the future.
शर्मिले मध्यमवर्गीय परिवार के विजय शेखर शर्मा 7,300 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी के मालिक
के सीईओ विजय शेखर का जन्म यूपी के अलीगढ़ में हुआ था। उन्होंने दिल्ली इंजीनियरिंग कॉलेज से पढ़ाई की है। वे पेटीएम के फाउंडर और सीईओ हैं। हुरून इंडिया 2016 रिपोर्ट में अमीरों की लिस्ट में उनके पास 7,300 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी बताई गई है। पिछले एक साल में उनकी कुल कमाई 162 गुना बढ़ी है।
विजय शेखर शर्मा के पिता टीचर और मां हाउस वाइफ थी। परिवार में दो बड़ी बहनें और एक छोटा भाई था। स्कूल में डबल प्रमोशन पाकर 14 साल की छोटी उम्र में ही 12वीं क्लास पास कर आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली पहुंचे। बचपन मैं मेरा एक छोटा-सा सपना था कि एक इंजीनियर बन कर किसी कंपनी में 10,000 रुपये की सैलरी पर काम करूँ। इसी उद्देश्य के तहत मैंने इंजीनियर के लिए दिल्ली कॉलेज आॅफ इंजीनियरिंग में प्रवेश लिया।
अंग्रेजी का सवाल नहीं समझ पाए
इंजीनियरिंग की कक्षा में टीचर ने अंग्रेजी में सवाल पूछा, हिंदी मीडिया से पढाई करने की वजह से समझ नहीं सके, इस पर शर्मिंदगी महसूस हुई, साथियों ने भी मजाक उडाया, क्लास रूम से ज्यादा टाइम लाइब्रेरी में अंग्रेजी के न्यूजपेपर, मैग्जीन पढी
2010 में पेटीएम शुरू किया
1998-99 में ग्लोबल कॉरपोरेट वर्ल्ड की शानदार नौकरी छोड़कर वे भारत लौट आए।
यहां उन्होंने इंटरनेट कंपनी स्थापित की तो परिवार ने खूब समझाया पर उनकी जिद के आगे उन्हें समझौता करना पड़ा। विजयशेखर की पहली कंपनी थी वेब सॉल्यूशंस एक्सएस कॉरपोरेशन, जिसे एक साल बाद उन्होंने यूएसए की कंपनी को बेच दिया।
मोबाइल मार्केट में नए प्रयोग
2001 में उन्होंने वन 97 कम्युनिकेशंस की स्थापना की। दो साल बाद इस कंपनी ने मोबाइल से म्यूजिक मैसेजिंग सर्विस शुरू की। 2004 में लैंडलाइन नेटवर्क से वॉइस आधारित रोमिंग शुरू हुई। 2005 में इंटरएक्टिव आउट डायलर सेवा और एक साल बाद कंटेट सेवा लॉन्च की। 2010 में पेटीएम की लॉन्च से वन 97 कम्युनिकेशंस को बड़ा ब्रेक मिला। 1200 कर्मचारियों की पीटीएम का मुख्यालय नई दिल्ली में है। पुणे, चेन्नई, बेंगलुरु और कोलकाता में क्षेत्रीय कार्यालय तो अफ्रीका, यूरोप, मध्यपूर्व और दक्षिण-पूर्वी एशिया में भी कंपनी सक्रिय है। पीटीएम मोबाइल सॉल्यूशंस प्रा.लि. में रतन टाटा सहित ग्लोबल निवेशकों ने 61 करोड़ डॉलर निवेश किए हैं।
विजयशेखर कहते हैं, जिसने असफलता का सामना किया हो, वह समस्या के समाधान नहीं खोज सकता। 2010 में मैं आईपीओ के जरिए शेयर मार्केट से पूंजी जुटाना चाहता था। ऐसा नहीं हुआ। इस असफलता से पीटीएम जन्मा। पहले हमारी पहचान बनी रिचार्ज पोर्टल, फिर पेमेंट सेवा और आज है एक बड़ा मार्केट प्लेस।
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