आगरालीक्स… आगरा के अंबेडकर विवि के वरिष्ठ सहायक सतेंद्र सिंह की हत्या के आरोपी कॉलेज संचालक ओमेंद्र यादव को बरी कर दिया गया है। विशेष न्यायाधीश एससी एसटी एक्ट रामक्रष्ठ शुक्ला ने साक्ष्यों के अभाव में ओमेंद्र यादव को बरी करने के आदेश दिए हैं। सतेंद्र सिंह की विवि से बाहर निकलते ही पालीवाल परिसर में सात महीने पहले फरवरी को हत्या कर दी थी। इस मामले में पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था, विवेचना में मैनपुरी निवासी कॉलेज संचालक ओमेंद्र यादव को आरोपी बनाया था। लेकिन पुलिस ओमेंद्र यादव को हिरासत में नहीं ले सकी थी, उसने मैनपुरी में सरेंडर कर दिया था। पुलिस ने ओमेंद्र को रिमांड पर लिया और उसकी निशानदेही पर तमंचा बरामद हुआ था, पुलिस ने कुछ गवाह बनाए थे और मोबाइल लॉकेशन को भी विवेचना में शामिल किया गया था।
गवाह मुकरे, नहीं आई फोरेंसिक रिपोर्ट
पुलिस ने कोर्ट में जो गवाह पेश किए, वे मुकर गए। तमंचे के लिए फोरेंसिक रिपोर्ट आनी थी, वह भी नहीं आ सकी। इसके चलते सुबूतों के अभाव में कोर्ट ने ओमेंद्र यादव को बरी कर दिया। इससे विवि के कर्मचारी भी सकते में हैं, उन्होंने विविकर्मी सतेंद्र की हत्यारोपी को पकडने के लिए आंदोलन किया था, कई दिनों तक विवि बंद रहा था।
इस तरह हुई थी हत्या
डा. बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी के परीक्षा विभाग के वरिष्ठ सहायक सतेंद्र सिंह (47) की शुक्रवार रात करीब सवा सात बजे यूनिवर्सिटी के पास ही पालीवाल पार्क में गोली मारकर हत्या कर दी गई। वे ऑफिस से स्कूटर पर घर जा रहे थे। गोली उनके सीने में सटाकर मारी गई।
मूल रूप से बमरौली अहीर निवासी सतेंद्र सिंह 18 साल पहले क्लर्क भर्ती हुए थे। तभी से शाहगंज के गयासपुरा में राजीव टाकीज के पास हाथी वाली गली में रह रहे थे। शुक्रवार शाम को यूनिवर्सिटी में अपने ऑफिस (कमरा नंबर 32) में कुछ लोगों से उनकी कहासुनी हुई थी।
उनके बेटे आशीष ने बताया कि दो दिन पहले भी दो निजी कालेज संचालकों से विवाद हुआ थे। वे फीस का ड्राफ्ट लेकर घर पर आए थे। ड्राफ्ट में कुछ कमी के चलते पापा ने जमा करने से मना कर दिया था। वे उन कॉलेजों पर सख्ती कर रहे थे जिन्होंने अभी तक फीस जमा नहीं कराई है। इसलिए शक है कि उन दो कॉलेज संचालकों ने ही उनकी हत्या कराई है।
उधर मौका ए वारदात पर सबसे पहले पहुंचे पालीवाल पार्क के चौकीदार नगीना यादव ने पुलिस को बताया कि सतेंद्र सिंह के स्कूटर से गिर जाने पर उन्हें घटना का पता चला । तब तक हत्यारे भाग चुके थे।
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