आगरालीक्स …आगरा के यूरोलॉजिस्ट डॉ मधुसूदन अग्रवाल ने पाकिस्तान में बैठे डॉक्टरों की क्लास ली, उन्हें गुर्दे की पथरी को लेजर से चूरा कर बाहर निकालने की पीसीएनएल तकनीकी का प्रशिक्षण दिया।
यूरोलाॅजिकल सोसाइटी आॅफ इंडिया के तत्वावधान में आगरा यूरोलाॅजी एसोसिएशन द्वारा 20 और 21 अप्रैल 2019 को सिकंदरा स्थित रेनबो हाॅस्पिटल में मिनीमल इनवेसिव यूरोलाॅजी (गुर्दे की पथरी एवं प्रोस्टेट का दूबीन व लेजर विधि से आॅपरेशन) दो दिवसीय मास्टर क्लास का आयोजन किया गया। सुबह आठ से शाम छह बजे तक चली मास्टर क्लास के अंतर्गत यूरोलाॅजी सोसायटी आफ इंडिया के अध्यक्ष एवं आगरा के वरिष्ठ यूरोलाॅजिस्ट डा. मधुसूदन अग्रवाल ने सभागार में बैठे देश-विदेश से आए चिकित्सकों को लाइव वर्कशाॅप के जरिए जबकि पाकिस्तान, बांग्लादेश सहित दुनिया के विभिन्न देशों में चिकित्सकों को वेबकास्ट (web cast) की मदद से मिनीमल इनवेसिव यूरोलाॅजी (PCNL), यूआरएस (URS) और आरआईआरएस (RIRS) तकनीकों पर प्रशिक्षण दिया। आगरा में डा. मधुसूदन अग्रवाल के द्वारा समय-समय पर यह कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं ताकि देश-दुनिया भर में मरीजों को लाभ पहुंचाया जा सके। इस दौरान वड़ौदरा से आए डा. अजय भंडारकर, लखनउ के डा. अनीष श्रीवास्तव, मेरठ के डा. अनिल एल्हेंस, हैदराबाद के डा. चंद्र मोहन, इंदौर के डा. राजेश कुकरेजा, जालंधर के डा. स्वप्न सूद, आगरा के डा. अनुराग यादव, डा. विजय बोरा, कोर्स को-आॅर्डिनेटर डा. दिलीप मिश्रा, डा. सुधीर वर्मा, डा. विनय तिवारी, डा. मनोज शर्मा ने भी अपनी विशेषज्ञता वाले विषयों पर महत्वपूर्ण जानकारी दी।
यूरोलाॅजी सोसायटी आफ इंडिया के अध्यक्ष एवं आगरा के वरिष्ठ यूरोलाॅजिस्ट डा. मधुसूदन अग्रवाल
गुटखा, तंबाकू है सबसे बडी वजहः डा. मधुसूदन अग्रवाल
डा. मधुसूदन अग्रवाल ने बताया कि उत्तर भारत में गुर्दे की पथरी के मामले तेजी से बढ रहे हैं। यहां के मरीजों में पथरी का आकार भी बडा होता है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह गुटखा, तंबाकू है। यदि इस समस्या से बचाना है तो गुटखे का सेवन बिलकुल न करें। पानी खूब पिएं। उन्होंने बताया कि यूरिनरी इनफेक्शन के कारण भी गुर्दे की पथरी होने की आशंका रहती है। दूध के उत्पादों का सेवन भी कम करना चाहिए। इससे दोबारा पथरी होने की आशंका रहती है। अक्सर कामकाजी लोग टाॅयलेट की सुविधा न होने से पानी कम पीते हैं। इससे भी गुर्दे की पथरी के केस बढ़ रहे हैं।
मरीज को आॅपरेशन का अहसास भी नहीं होताः डा. अजय भंडारकर

वड़ौदरा से आए डा. अजय भंडारकर ने बताया कि इस तकनीक की मदद से गुर्दे की पथरी के आॅपरेशन के बाद टांका लगाने की आवश्यकता भी नहीं होती। दो से तीन मिलीमीटर के छेद से पथरी कब निकल गई, मरीज को इसका अहसास तक नहीं होता। उन्होंने बताया कि एक से दो साल के बच्चों में भी गुर्दे की पथरी देखने को मिल रही है, यह हैरान करने वाला है।
डा. अनीष ने बताया उत्तर भारत में क्यों ज्यादा होती है पथरी

यूरोलाॅजिकल सोसायटी आॅफ इंडिया, बोर्ड आॅफ एजूकेशन के चेयरमैन डा. अनीष श्रीवास्तव ने बताया कि कुछ विशेष क्षेत्र पहाड़ी इलाकों, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान जैसे उत्तरी इलाकों में इसका खतरा ज्यादा है। शरीर में कैल्शियम या प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होना। ज्यादा नमक या प्रोटीन डाइट जैसे मटन, चिकन, पनीर, फिश, अंडा, दूध आदि ज्यादा खाना। गर्म जगहों पर काम करना जैसे भठ्ठी के पास या गर्म स्थानों पर रहना, यूरिनरी ब्लैडर की बनावट में कोई गड़बड़ी होना, लंब समय तक बेड पर लगातार लेटे रहना जैसे पैरालाइसिस या कमर की हड्डी टूटने वाले मरीज, लगातार कब्ज रहना, किडनी में इनफेक्शन होना इसके होने की मुख्य वजह हैं।
डा. अनिल ने बताए किडनी में पथरी के कारण

मेरठ से आए डा. अनिल एल्हेंस ने बताया कि ऐसे तो गुर्दे में पथरी के कई कारण हैं, लेकिन इनमें से कई मुख्य हैं। जैसे- भौगोलिक, आनुवांशिक, प्रोटीन युक्त खाद्य वस्तुओं को अधिक लेना, निश्चित अंतराल पर कम पानी पीना। इतना ही नहीं दिल्ली और उत्तर प्रदेश क्षेत्र को स्टोन बैल्ट भी कहते हैं। कारण, यहां के लोगों में पथरी होने की तकलीफ अधिक पाई जाती है।
छह सालों में रेनबो हाॅस्पिटल में मरीज उठा रहे नई तकनीक का लाभ
रेनबो हाॅस्पिटल के निदेशक डा. नरेंद्र मल्होत्रा ने बताया कि अस्पताल में पिछले छह वर्षों से मरीज इस आधुनिक तकनीक का लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने बताया कि यहां होने वाली इस कार्यशाला का लाभ लाइव वेबकास्ट के जरिए दुनिया भर में बैठे चिकित्सक लेते हैं। पीसीएनएल विधि में मरीज को महज दो दिन ही अस्पताल में स्टे करना होता है, दर्द कम होता है, चीरे की तकलीफ नहीं होती। पैन की रिफिल के बराबर छेद से पथरी निकाल दी जाती है।
यूरोलाॅजी में एक चौथाई मरीज पथरी केः डा. चंद्र मोहन

हैदराबाद से आए डा. चंद्र मोहन ने बताया कि लोगों में होने वाली पथरी की भयावह स्थिति का इसी बात से अंदाजा लगाया जाता है कि वर्तमान में किसी भी यूरोलाॅजिस्ट की ओपीडी में आने वाले मरीजों में हर चौथा मरीज पथरी की तकलीफ से पीड़ित होता है।
इलाज न कराने के नुकसानः डा. राजेश कुकरेजा

इंदौर के डा. राजेश कुकरेजा ने बताया कि समय पर इलाज न कराने के बेहद नुकसान हैं। दर्द के कारण मरीज परेशान रहेगा। संक्रमण के कारण किडनी खराब होने का डर बना रहता है। मरीज सेप्टीसीमिया का शिकार हो सकता है, जिससे उसकी मौत भी हो सकती है। डायबिटीज व बीपी के मरीजों में तो यह और भी घातक हो सकता है। इसलिए ऐसे मरीजों को बिना देरी किए चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।