आगरालीक्स… आगरा के कोर्ट ने राजकीय महिला संरक्षण गृह की अधीक्षिका गीता राकेश को मानव तस्करी और पॉक्सो एक्ट में आजीवन कारवास की सजा सुनाई है। पूर्व अधीक्षिका गीता राकेश पर 43 संवासनियों और उनके नौ बच्चों को बिना किसी आदेश के छोड़ने पर मानव तस्करी और पॉक्सो मुकदमा दर्ज किया गया था, वह आगरा जेल में थी, आगरा के कोर्ट में सुनवाई हुई, शनिवार को गीता राकेश को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
इलाहाबाद में देह व्यापार के दलदल से 43 संवासनियों और उनके नौ बच्चों निकाला गया था। इन्हें इलाहाबाद के एसडीएम सदर के 20 मई 2016 के आदेश पर इन्हें एक साल के लिए आगरा के नारी संरक्षण गृह में रखा गया था। एक वर्ष पूरा होने से पूर्व ही 18 मई को एसडीएम ने दो साल की अवधि और बढ़ा दी।
इसके बावजूद गीता राकेश ने 21, 22 और 23 मई 2017 को 43 संवासनियों और नौ बच्चों को छोड़ दिया। इसके लिए न तो प्रार्थनापत्र लिए गए, न पहचान पत्र और न ही बंधनपत्र भरवाए गए। इलाहाबाद एसडीएम सदर को सामाजिक संस्था गुड़िया के सुनील ने शिकायत की। इस पर जांच महिला कल्याण विभाग के उप मुख्य परिवीक्षा अधिकारी पुनीत कुमार मिश्र ने रिपोर्ट दर्ज कराई।इस पर एक जून 2017 को गीता राकेश को गिरफ्तार कर लिया गया। एफआईआर में आशंका जाहिर की गई है कि संवासनियों को मानव तस्कर न ले गए हों। इन्हें देह व्यापार में झोंके जाने की भी आशंका है।
यह था मामला
इलाहाबाद से 20 मई 2016 को 67 महिलाएं और 37 बच्चे नारी संरक्षण गृह में निरुद्ध कराए गए थे। इनमें से 22 महिलाओं को अलग-अलग कोर्ट के आदेश पर उनके परिवारीजनों के सुपुर्द किया गया। शेष 45 में से 43 को बगैर आदेश के प्रक्रिया पूरी किए छोड़ दिया गया। दो अभी निरुद्ध हैं; 43 में से पांच संवासनियां आगरा की भी हैं। इनमें से तीन जगनेर क्षेत्र की हैं और दो शहर के हरीपर्वत क्षेत्र की। एक बस्ती जिले की है, चार धौलपुर, दो अलवर, दो पश्चिमी बंगाल, एक दिल्ली, एक पुणे की है जबकि शेष अन्य इलाहाबाद की हैं।