आगरालीक्स… आगरा के डीईआई में शोध छात्रा नेहा शर्मा के रेप और मर्डर केस में बीएससी के छात्र उदय स्वरूप और लैब टेक्नीशियन यशवीर संधू पर आरोप तय हो गए हैं। इस मामले में दोनों पक्षों की बहस के बाद दोष निर्धारण होना है। चार साल पहले डीईआई की लैब में शोध छात्रा की हत्या और रेप के आरोपियों को सख्त सजा दिलवाने के लिए लडाई लड रहे उनके पिता रिचपाल शर्मा को धमकी मिल चुकी है, केस भी प्रभावित हो सकता है, ऐसे में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से केस स्थानांतरित करने की मांग की है, सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय अदालत में सुनवाई पर रोक लगा दी है, इस मामले में आगरा के स्थानीय कोर्ट में सितंबर में सुनवाई होनी है।
डीईआई की लैब में 13 मार्च 2013 को नेहा शर्मा की रेप के बाद हत्या कर दी थी, इस मामले में आरोपी उदय स्वरूप एक साल से जेल में है, सीबीआई की जांच में भी उदय स्वरूप पर रेप और हत्या के आरोप लगे हैं। इस मामले में यशवीर संधू जमानत पर है।
चार साल पहले हत्या
डीईआई की बायो नैनो टेक्नोलॉजी लैब में 15 मार्च 2013 को शोध छात्रा नेहा शर्मा की रेप के बाद हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने हत्या में डीईआई के बीएससी के छात्र उदयस्वरूप और लैब टेक्नीशियन यशवीर सिंह संधू को गिरफ्तार कर चार्जशीट दाखिल कर दी। सीबीआइ द्वारा कराई गई जांच में आरोपी उदय स्वरूप का डीएनए मैच हो गया। उदय के खिलाफ सीबीआइ ने चार्जशीट दायर की थी, जबकि संधू को क्लीन चिट दे दी। अदालत में दोनों आरोपियों पर आरोप तय हुए, इसके बाद उन्हें जेल भेज दिया। गवाही से पहले नेहा के पिता को आरोपी पक्ष से लगातार धमकियां मिल रही थीं। उनकी याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर अग्रिम आदेश तक स्थानीय अदालत में सुनवाई को रोक दी है।
भगवान और सुप्रीम कोर्ट से न्याय की उम्मीद
मीडिया से नेहा शर्मा के पिता का कहना है कि निर्भया के तीन माह बाद उनकी बेटी के साथ वही हुआ। मगर, अफसोस कि अभी तक इसका ट्रायल भी नहीं हो सका है। केस ब्लाइंड नहीं था, पुलिस ने उसे बनाया। उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया। वे कोर्ट में प्रार्थना करेंगे कि केस की डेली सुनवाई हो, जिससे आरोपियों को जल्द सजा मिले। आगरा के लोगों ने उनका पूरा साथ दिया है और अभी दे रहे हैं। वे इस न्याय की लड़ाई को अंजाम पर पहुंचाने तक जारी रखेंगे। उन्हें भगवान और न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।
नेहा शर्मा हत्याकांड
– 15 मार्च 2013- शोध छात्रा की निर्मम हत्या। छात्रा की कार खेलगांव के पास सड़क पर लावारिस मिली।
22 अप्रैल 2013- परिस्थितिजन्य और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर उदयस्वरूप तथा यशवीर सिंह संधू को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर पुलिस ने जेल भेज दिया।
12 जुलाई 2013- पुलिस की केस डायरी में हत्याकांड का चश्मदीद सामने आया।
18 जुलाई 2013- पुलिस ने दोनों हत्यारोपियों के खिलाफ चार्जशीट लगा दी।
22 जुलाई 2013- शोध छात्रा की पिता के प्रार्थनापत्र पर शासन ने केस सीबीआइ को स्थानांतरित कर दिया।
10 फरवरी 2014- हाईकोर्ट के आदेश पर उदय और संधू जेल से रिहा।
5 जनवरी 2016- सीबीआइ ने उदय स्वरूप के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी, मगर संधू को क्लीन चिट दे दी।
12 मई 2016- अदालत ने फिर उदयस्वरूप को जेल भेज दिया।
26 नवंबर 2016- उदय स्वरूप और यशवीर सिंह संधू पर कोर्ट में आरोप तय।
2 मई 2017- सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय अदालत में सुनवाई पर रोक लगाई।