आगरालीक्स… आगरा में डॉक्टरों ने बताया कि महिलाओं को अत्यधिक ब्लीडिंग हो रही है तो क्या किया जाए। डायग्नोस्टिक हिस्टेरोस्कोपी क्या है, यह कैसे की जाती है, आॅपरेटिव हिस्टेरोस्कोपी क्या है, यदि गर्भाशय में सेप्टम है तो क्या किया जा सकता है, गर्भाशय में फाइब्राॅयड या पाॅलिप है तो क्या करना है, यदि कोई असामान्यता नहीं है व अत्यधिक रक्तस्त्राव है तो क्या हो सकता है, किन परिस्थितियों में डाॅक्टर को दिखाना आवश्यक होता है? इन सभी सवालों के जवाब जानने के साथ ही इनकी आधुनिक तकनीकों पर मंथन हुआ रेनबो हाॅस्पिटल में आयोजित दो दिवसीय लेप्रोस्कोपी एंड हिस्टेरोस्कोपी कार्यशाला में।

दो दिवसीय कार्यशाला मंगलवार को संपन्न हुई। इसमें देश-विदेश से आए चिकित्सकों को लेप्रोस्कोपी एवं हिस्टेरोस्कोपी की बारीकियां जानने का अवसर प्राप्त हुआ। दुनिया के जाने-माने डा. ओसामा शाओकी ने देश-विदेश के कई गायनेकोलाॅजिस्ट को हिस्टेरोस्कोपी की ट्रेनिंग दी। डा. ओसामा ने बताया कि हिस्टेरोस्कोपी एक तरह से इंडोस्कोपी प्रणाली है। यह बच्चेदानी की बीमारियों की पहचान और निदान में इस्तेमाल होती है। उन्होंने बताया कि अभी आईवीएफ यानि टेस्ट ट्यूब बेबी प्रणाली में इसका इस्तेमाल अधिक होता है लेकिन मुख्य रूप से इस तकनीक से बच्चेदानी से जुड़ी हर समस्या का बिना आॅपरेशन निदान किया जा सकता है। जैसे यूट्रस फायब्रायड, बच्चेदानी के अंदर बनने वाली झिल्ली को हटाने में, फैलोपिन ट्यूब से जुडी वैसी समस्याओं को दूर करने में इस प्रणाली का इस्तेमाल किया जा सकता है। रेनबो हाॅस्पिटल के निदेशक डा. नरेंद्र मल्होत्रा ने कहा कि कार्यशाला में बांझपन से जुडी विभिन्न समस्याओं पर लाइव आॅपरेटिंग प्रोसीजर, साइंटिफिक लेक्चर व डमी के जरिए प्रशिक्षण दिया गया। इंडोनेशिया से आए डाॅक्टरों के दल को प्रशिक्षण के बाद प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। फेडरेशन आॅफ आॅब्सटेट्रिकल एंड गायनेलाॅजिकल सोसायटी आॅफ इंडिया (फाॅग्सी) की अध्यक्ष डा. जयदीप मल्होत्रा ने बताया कि बांझपन की कई वजह सामने आ रही हैं। इनमें नल बंद होना, बच्चेदानी की गांठ या ट्यूमर, रसौली व एंडोमेट्रियोसिस, पेल्विक टीबी प्रमुख हैं। उचित इलाज के अभाव में तमाम दंपति निःसंतान रह जाते हैं। ऐसे दंपतियों के लिए गाइनी लेप्रोस्कोपी सर्जरी व हिस्टेरोस्कोपी वरदान से कम नहीं है। डा. निहारिका एम बोरा और डा. मनप्रीत शर्मा ने बताया कि वर्कशाॅप का उद्देश्य सभी गायनेकोलाॅजिस्ट को आमंत्रित कर विशेषज्ञों के माध्यम से नई तकनीकों के बारे में बताना रहा। तकरीबन 100 गायनेकोलाॅजिस्ट ने कार्यशाला में हिस्सा लिया।
इस दौरान डा. एमसी पटेल, डा. अर्चना वर्मा, डा. निहारिका एम बोरा, डा. ऋषभ बोरा, डा. केशव मल्होत्रा, डा. निधि गुप्ता, डा. अमित टंडन, डा. आरएन गोयल, डा. अनुपम गुप्ता, डा. मनप्रीत शर्मा, डा. शैमी बंसल, डा. नीलम माहेश्वरी, डा. दीक्षा गोस्वामी, डा. शैली गुप्ता, डा. सरिता दीक्षित आदि मौजूद थे।