
हरियाणा में भ्रूण लिंग जांच पर पाबंदी होने के पर दलाल महिलाओं की मेरठ के सेंटरों पर भ्रूण की जांच करा रहे हैं। गर्भस्थ शिशु कन्या होने पर गर्भपात कराया जा रहा है। इसी सूचना पर पानीपत के सीएमओ ने सात जुलाई 2015 को मेरठ के मलियाना में स्टिंग किया था। दो महिला पुलिसकर्मियों को भ्रूण लिंग जांच कराने के लिए भेजा गया था। स्टिंग के बाद मेरठ पुलिस की मदद से हरियाणा की टीम ने मलियाना स्थित आरडी डायग्नोसिस व अल्ट्रासाउंड सेंटर के मालिक डा. संजय अग्रवाल व उनके कर्मचारी पुष्पेंद्र निवासी बागपत और दलाल बंटी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस-प्रशासन की रिपोर्ट के बाद शासन ने डाक्टर संजय अग्रवाल व पुष्पेंद्र पर रासुका लगा दी। इस पूरे प्रकरण में हरियाणा सरकार को भी सूचना दी गई है।
रासुका के गिरफ्तारी
कानून के तहत आरोपी को पहले तीन महीने के लिए गिरफ्तार किया जा सकता है। फिर, आवश्यकतानुसार, तीन-तीन महीने के लिए गिरफ्तारी की अवधि बढ़ाई जा सकती है। एकबार में तीन महीने से अधिक की अवधि नहीं बढ़ाई जा सकती है। अगर, किसी अधिकारी ने ये गिरफ्तारी की हो तो उसे राज्य सरकार को बताना होता है कि उसने किस आधार पर ये गिरफ्तारी की है। जब तक राज्य सरकार इस गिरफ्तारी का अनुमोदन नहीं कर दे, तब तक यह गिरफ्तारी बारह दिन से ज्यादा समय तक नहीं हो सकती है। अगर यह अधिकारी पांच से दस दिन में जवाब दाखिल करता है तो इस अवधि को बारह की जगह पंद्रह दिन की जा सकती है। अगर रिपोर्ट को राज्य सरकार स्वीकृत कर देती है तो इसे सात दिनों के भीतर केंद्र सरकार को भेजना होता है। इसमें इस बात का जिक्र करना आवश्यक है कि किस आधार पर यह आदेश जारी किया गया और राज्य सरकार का इसपर क्या विचार है और यह आदेश क्यों जरूरी है।
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