
मुख्य अतिथि डीआईजी अजय मोहन शर्मा नेब्रेन डेड की स्थिति में अंगदान करने के लिए न सिर्फ खुद को बल्कि अपने परिजनों व रिश्तोदारों को भी जागरूक करने को कहा। अंग प्रत्यारोपण के लिए यूपी पुलिस की ओर से हर सम्भव सहयोग करने का आश्वासन देते हुए गुजरात की तरह ग्रीन कॉरिडोर की व्यवस्था में भी सहयोग की बात कही। जागरूकता के लिए उन्होंने इस कार्यक्रम को स्कूल व कॉलेजों में भी करने का सुझाव दिया। संस्था के अध्यक्ष नीलेश मांडलेवाला ने कहा कि अंगदान करने से हम सिर्फ एक व्यक्ति को नहीं बल्कि पूरे परिवार को जीवन दान देते हैं। उन्होंने बताया कि ब्रेन डेड की स्थिति में भारत में मात्र .005 प्रतिशत लोग ही अंगदान करते हैं। डोनेट लाइफ का उद्देश्य बताते हुए उन्होंने कहा कि अंग प्रत्यारोपण की स्थिति पैदा न हो सबसे पहले हम इसके लिए लोगों को स्वस्थ रहने के लिए जागरूक करेंगे। यदि अंग प्रत्यारोपण की स्थिति आती हैं तो लिविंग डोनर के बजाय ब्रेन डेड मरीजों के परिजनों को अंगदान के लिए प्रेरित करेंगे।
इससे पूर्व संस्था के उपाध्यक्ष संदीप कुमार (आईआरएस) ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। जेपी हॉस्पीटल के डॉ. अनिल प्रसाद भट्ट व डॉ. मनोज गुप्ता ने अंगदान के सामाजिक व कानूनी पहलू पर प्रकाश डाला। आईएमए अध्यक्ष डॉ. जेएन टंडन ने अंग प्रत्योपण के दौरान होने वाली जटिलताओं व कानूनी समस्याओं पर विचार विमर्श किया। संस्था के ट्रस्टी निर्मल सुख बैजल ने संस्था को एक लाख का चैक प्रदान किया। इस मौके पर जिला जज राजीव लोचन, डॉ. आरएस पारीक, विशप अल्बर्ट डिसूजा, मुकेश जैन, अशोक जैन (सीए) ने भी अपने विचार रखे।
ब्रेन डेड होने पर कर सकते हैं अंगदान
न्यूरोसर्जन डॉ. आरसी मिश्रा ब्रेन डेड की स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि जब ब्रेन काम करना बंद कर दे और दिल की धड़कने चल रही हो, उस स्थिति को ब्रेन डेड कहा जाता है। डॉक्टरों के लिए किसी मरीज को ब्रेन डेड घोषित करना बहुत ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ब्रेन डेड की स्थिति में जब मरीज के बचने की सम्भावना न हो तो उसे अंगों से कम से कम 7 लोगों को नई जिन्दगी दी जा सकती है।
डॉ. संदीप अग्रवाल, जेपी तिवारी, संदेश जैन, अनुपम सिन्हा, संतोष कैसरी, अंशुमान बावरी, सुदर्शन दुआ, बीडी अग्रवाल, जगदीश बागला, योगेश, बृजमोहन अग्रवाल, रघुवीर सिंह, वत्सला प्रभाकर, डॉ. एमबी जैन, डॉ. अरुण जैन, विजयदत्त पालीवाल, नरेश पारस, सुशील जैन मौजूद रहे।
किस अंग कितनी है जरूरत
-किडनी ट्रांसप्लाट के लिए भारत में प्रतिवर्ष दो लाख किडनी दान करने वालों की जरूरत है। जबकि हो रही हैं मात्र 4 हजार।
-लिवर की प्रतिवर्ष एक लाख ट्रांसप्लांट की जरूरत है जबकि हो रहे हैं सिर्फ 200
-हृदय ट्रांसप्लांट के लिए हर साल 50 हजार लोगों को जरूरत पड़ती है जबकि ट्रांसप्लांट हो रहे हैं महज 50।
-कार्निया की हर साल एक लाख ट्रांसप्लांट की डिमांड रहती है लेकिन हो रही हैं महज 25 हजार।
Leave a comment