आगरालीक्स…. एग, स्पर्म और इम्ब्रियो (भ्रूण) की रोचक दुनिया है। अब आगरा में भ्रूण के अंदर झांक कर भी देखा जा सकता है। यूपी में एसजीपीजीआई के बाद आगरा के रेनबो हॉस्पिटल में एम्ब्रियोस्कोप से भ्रूण के अंदर देखा जा सकेगा, इससे अच्छी गुणवत्ता के भ्रूण का चयन करने में मदद मिलेगी और वंशानुगत बीमारियां होने से बच सकती हैं।
अभी तक महिलाओं के एग (अंडाणु), पुरुष के शुक्राणु (स्पर्म) की जांच होती थी, अब एग और स्पर्म के फर्टिलाइजेशन बन रहे भ्रूण की जांच भी संभव है। बुधवार को रेनबो आईवीएफ सेंटर में आयोजित प्रेसवार्ता में डॉ जयदीप मल्होत्रा, डॉ नरेंद्र मल्होत्रा ने बताया कि एम्ब्रियोस्कोप में कैमरे लगे होते हैं, इन कैमरों की मदद से लैब में भ्रूण किस तरह विकसित हो रहा है, यह देखा जाता है, इससे यह पता चल सकता है कि भ्रूण की गुणवत्ता कैसी है, कहीं कोई वंशानुगत बीमारी तो नहीं है। भ्रूण को गर्भ में स्थापित करने के बाद कोई समस्या तो नहीं होगी, इस तरह एम्ब्रियोस्कोप से एक अच्छे भ्रूण का चयन किया जाता है। इस भ्रूण को महिला के गर्भ में स्थापित कर दिया जाता है, इससे स्वस्थ्य बच्चे के जन्म की संभावना बढ जाती है।
एम्ब्रियोस्कोप से बढ जाएगा 20 फीसद आईवीएफ का रिजल्ट
डॉ केशव मल्होत्रा, डॉ निहारिका मल्होत्रा व डा दीक्षा ने बताया कि आईवीएफ का सक्सेज रेट 30 से 40 फीसद है। ऐसे में एम्ब्रियोस्कोप की मदद ली जाती है और अच्छे भ्रूण को महिला के गर्भ में स्थापित किया जाता है और आईवीएफ के रेट 20 फीसद तक बढ सकते हैं। वहीं, सामान्य केस में भी 25 फीसद गर्भपात होते हैं, इसमें से 90 फीसद का कारण भ्रूण में खराबी और जैनेटिक प्रॉब्लम होता है।
एसजीपीजीआई के बाद एक करोड की यूपी में पहली मशीन
देश के चुनिंदा सेंटर में ही एम्ब्रियोस्कोप की सुविधा है, यूपी में यह सुविधा एसजीपीजीआई में है, इसके बाद आगरा का रेनबो सेंटर है, जहां एक करोड की कीमत का एम्ब्रियोस्कोप स्थापित किया गया है।