आगरालीक्स…झाड़-फूंक नहीं इलाज से ठीक होता है पीलिया, आगरा गैस्ट्रो लिवर सेंटर के सीनियर गैस्ट्रोएंट्रोलाॅजिस्ट डाॅ. विनीत चौहान ने बताया कि हम ऐसे मामले देखते हैं जो आसानी से ठीक हो सकते थे लेकिन अंधविश्वास ने बात बिगाड़ दी.
आगरा में असाध्य बीमारियों के इलाज के लिए लोगों का झाड़-फूंक, टोने-टोटके का सहारा लेना एक आम बात है। आज हम आपको अंधविश्वास की कड़ी में पीलिया के इलाज के बारे में बताने जा रहे हैं।
आगरा गैस्ट्रो लिवर सेंटर के सीनियर गैस्ट्रोएंट्रोलाॅजिस्ट डाॅ. विनीत चौहान ने बताया कि कुछ लोग पीलिया रोग में झाड़-फूंक और टोने-टोटकों पर ज्यादा यकीन करते हैं। वह इस बीमारी को गंभीरता से नहीं लेते। यदि समय पर इसका इलाज डाॅक्टर से न कराया जाए तो यह जानलेवा हो जाता है। इस तरह के कई मामले हमारे पास आते हैं जहां लोगों ने अंधविश्वासी होकर जान दाव पर लगा दी। इसलिए सलाह है कि पीलिया के लक्षण सामने आने पर विशेषज्ञ डाॅक्टर से संपर्क करना चाहिए।
पीलिया क्यों होता है ?
डाॅ. विनीत चौहान बताते हैं कि ऐसे तो पीलिया होने के तमाम कारण हैं लेकिन मुख्यतः यह लिवर से जुड़ी एक बीमारी है। शरीर में सीरम बिलीरूबीन की मात्रा ज्यादा होने पर पीलिया होता है। नवजात बच्चे भी इसकी चपेट में आ जाते हैं। हालांकि सही समय पर पहचान और इलाज से इस बीमारी से छुटकारा पाया जा सकता है।
ऐसे पहचानें
पीलिया होने पर आंखों में पीलापन होता है। आंख का सफेद हिस्सा पीला हो जाता है। पेशाब में भी पीलापन आ जाता है। इसके साथ ही बुखार, उल्टी, भूख न लगना, थकान, शरीर में खुजली जैसे लक्षणों से इसे पहचाना जा सकता है। आगे चलकर यह बड़ी समस्या पैदा करता है।
क्यों होता है ?
पीलिया जिसे हेपेटाइटिस या जाॅन्डिस भी कहा जाता है। आम भाषा में इसे पीलिया के नाम से जानते हैं। डाॅ. चौहान के मुताबिक आम तौर पर खानपान में गड़बड़ी और लाइफ स्टाइल में खराबी की वजह से पीलिया होता है। यह मुख्य तीन तरह का होता है। पहला प्री हिपेटिक, जिसमें शरीर में खून नष्ट होने लगता है जैसे हिमोलिटिक एनीमिया या आनुवंशिक कारण, दूसरा हिपेटिक जिसमें वायरल हेपेटाइटिस और लिवर सिरोसिस के कारण हो सकता है, हेपेटाइटिस ए, बी, सी, इसके कारण हो सकते हैं, ए और ई प्रदूषित खाने और पानी से, बी ब्लड और असुरक्षित यौन सम्बन्धों की वजह से हो सकता है। हेपेटाइटिस बी और सी लिवर सिरोसिस के मुख्य कारण होते हैं। तीसरा पोस्ट हेपेटिक जिसमें सीरम बिलीरुबिन लिवर से आगे नही बढ़ता, पित्त की नली में स्टोन या गांठ के कारण रुकावट हो सकती है, इसमें तुरंत उपचार और एक्सपर्ट की जरूरत होती है। झाड़ फूंक की वजह से बात बिगड़ सकती है। इसका पता करने के लिए सीरम बिलीरूबीन और अल्ट्रासाउंड के साथ ही कई तरह के टेस्ट कराए जाते हैं। लिवर संबंधी समस्या होने पर इमेजिंग टेस्ट बेहतर हैं। इसमें एमआईआर, स्कैन, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, ईआरसीपी आदि।
प्रमुख कारण
- असंतुलित खानपान
- दूषित पानी
- हेपेटाइटिस
- आनुवांशिक
प्रमुख लक्षण
- आंखें पीली होना
- पेशाब पीला आना
- बुखार बना रहना
- भूख न लगना
- जी घबराना
- उल्टी आना
- कमजोरी और थकान
- कुछ खाने में कड़वापन
कुछ कारण ये भी हैं
- वायरल संक्रमण जैसे हेपेटाइटिस ए, बी, सी या ई
- लिवर सिरोसिस और शराब का अत्यधिक सेवन
- आॅटोइम्यून डिजीज
- कुछ विशेष प्रकार की दवाएं
- गिल्बर्ट सिंड्रोम
- जिगर की बीमारी
- गैलस्टोन या पित्ताशय की थैली विकार
- ब्लड विकार
ये सावधानियां बरतें
पीलिया से बचने के लिए सबसे जरूरी है लिवर को स्वस्थ रखना। भोजन जितना सादा होगा लिवर उतना स्वस्थ रहेगा। अपने खानपान में मूली, गोभी, दही को शामिल करें। भरपूर मात्रा में पानी पीएं।
नजरअंदाज न करें लक्षण
पीलिया के सामान्य लक्षण हैं बुखार, कमजेारी, भूख न लगना, वजन कम होना, उल्टी आना, पेट दर्द, कब्ज, सिरदर्द, शरीर में जलन, खुजली। कोई भी लक्षण मिलने पर डाॅक्टर को दिखाना चाहिए।