आगरालीक्स ….आगरा में युवक की बाईं आख और मुंह की लार अनकंट्रोल हो गई, शांति वेद इंस्टीटयूट आफ मेडिकल साइंसेज के विशेषज्ञों ने लेफ्ट सीपी एंगल टयूमर (ब्रेन ट्यूमर) डायग्नोज किया, न्यूरोसर्जरी के बाद पूरी तरह से ठीक। खर्चा भी बहुत कम।
45 साल के रमेश चंद्र का बांई आंख और मुंह की लार पर अपना कंट्रोल नहीं था, वे कई जगह दिखा चुके थे। इसके बाद शांति वेद इंस्टीटयूट आफ मेडिकल साइंसेज, सिकंदरा की ओपीडी में दिखाया। यहां लेफ्ट सीपी एंगल टयूमर (ब्रेन ट्यूमर) डायग्नोज किया गया। इस बीमारी का देर से पता चलने पर आंख की रोशनी चली जाती है, इसके साथ ही ब्रेन ट्यूमर घातक हो जाता है।
पहली न्यूरोसर्जरी हुई सफल
रमेश चंद्र को शांति वेद इंस्टीटयूट आफ मेडिकल साइंसेज, सिकंदरा में नौ मार्च को भर्ती किया गया। कई तरह की जांच कराने के बाद 11 मार्च को न्यूरोसर्जन नीरज बसंतानी ने एनेस्थीसियालाजिस्ट मिहिर, आकाश मनदीप और पुरुषोत्तम ओटी टेक्नीशियन की टीम के साथ आपरेशन किया। करीब 4 30 घंटे आपरेशन चला। इंस्टीटयूट की पहली न्यूरोसर्जरी सफल रही। जटिल एवं कठिन न्यूरोसर्जरी करने में शांति वेद इंस्टिट्यूट में उपलब्ध अत्याधुनिक उपकरणों एवं आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर से भी मदद मिली।

14 मार्च को किया डिस्चार्ज, पूरी तरह से ठीक
रमेश चंद्र नौ मार्च को भर्ती हुए थे, पांच दिन बाद 14 मार्च को डिस्चार्ज कर दिया गया। वे पूरी तरह से ठीक हैं, उनका अपनी आंख और लार पर भी नियंत्रण हो गया है।
खर्चा भी बहुत कम, लाखों रुपये होते हैं खर्च
इस तरह की न्यूरोसर्जरी में खर्चा बहुत अधिक आता है। मगर, आगरा के अत्याधुनिक सुविधाओं वाले शांति वेद इंस्टीटयूट आफ मेडिकल साइंसेज, सिकंदरा में खर्चा भी बहुत अधिक नहीं हुआ। रमेश चंद्र मध्यमवर्गीय परिवार से हैं, उनकी बहुत कम खर्चे पर न्यूरोसर्जरी हो गई।