
इस तरह करें स्थापना
पंडाल में पहले चौकी को स्थापित करें, इसके बाद गणपति की मूर्ति को स्नान कराएं या जल के छीटें माकर शुदृध कर लें, उत्तर या पूर्व की तरपफ गजानन की मूर्ति का मुख कर चौकी पर स्थापित करें। सिंदूर से पूजन और लडडू का भोग लगाएं।
27 सितंबर को होगा विसर्जन
गणेश चतुर्थी के साथ ही गणपित बप्पा मोरिया गूंजने लगा है। अब 11 दिन तक पंडालों में प्रथम पूजनीय गजानन की आरती की जाएगी। इस तरह 27 सितंबर को ढोल नगाडों के साथ नाचते झूमते भक्त गणपति का विसर्जन करेंगे।
यमुना में विसर्जन पर रोक
जल प्रदूषण को देखते हुए यमुना में गणपति के विसर्जन पर रोक लगा दी गई है। ऐसे में नगर निगम द्वारा यमुना घाटों पर विसर्जन की व्यवस्था की जाएगी, बडे गडढे बनाए जाएंगे, जहां मूर्ति का विसर्जन किया जा सके।
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