आगरालीक्स…5 शुभ संयोग में इस बार इस दिन मनाई जाएगी शनि जयंती व साल की पहली शनि अमावस्या. जानिए पूजा मुहूर्त और महत्व
प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी ने बताया की शनि अमावस्या का अर्थ है शनिवार को पड़ने वाली अमावस्या. इसे शनिश्चरी अमावस्या भी कहा जाता है. इस बार शनि जयंती व साल की पहली शनि अमावस्या 16 मई को ज्येष्ठ माह में पड़ेगी. इस दिन व्रत और शनिदेव की पूजा करने से कष्टों से मुक्ति मिलती है. जिन लोगोंं की राशि पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या का प्रभाव है, उनको शनि अमावस्या पर स्नान, दान, व्रत और पूजा जरूर करनी चाहिए. शनि अमावस्या का संयोग साल में एक या दो बार ही बनता है.
5 शुभ संयोगों से खास बनेगी शनि अमावस्या –
ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी के अनुसार साल की पहली शनि अमावस्या इस बार कई शुभ योगों के कारण और भी विशेष मानी जा रही है। इस दिन एक साथ 5 महत्वपूर्ण संयोग बन रहे हैं, जो इसे अत्यंत पुण्यदायी बनाते हैं.
सबसे खास बात यह है कि इसी दिन शनि जयंती यानी शनिदेव का जन्मोत्सव भी मनाया जाएगा।
इसके साथ ही यह ज्येष्ठ माह की अमावस्या है, जिसे दर्श अमावस्या के रूप में भी जाना जाता है।
इसी दिन वट सावित्री व्रत का संयोग भी बन रहा है, जो विवाहित महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।
ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह दिन खास है, क्योंकि सुबह से लेकर 10 बजकर 26 मिनट तक सौभाग्य योग रहेगा, जो जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ाने वाला माना जाता है।
इसके बाद 10 बजकर 26 मिनट से शोभन योग शुरू होगा, जो पूरी रात तक रहेगा और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल समय प्रदान करेगा।
शनि जयंती के दिन भरणी नक्षत्र प्रातःकाल से लेकर शाम 5:30 बजे तक रहेगा, इसके बाद कृत्तिका नक्षत्र का प्रभाव शुरू होगा। भरणी नक्षत्र के स्वामी शुक्र और देवता यमराज माने जाते हैं, जबकि कृत्तिका नक्षत्र के स्वामी सूर्य और देवता अग्नि हैं। इन सभी संयोगों के कारण इस वर्ष शनि जयंती का महत्व और भी अधिक बढ़ गया है।
शनि जयंती पूजा मुहूर्त –
शुभ-उत्तम मुहूर्त: प्रातः 07:12 से प्रातः 08:54 तक
चर-सामान्य मुहूर्त: दोपहर 12:18 से दोपहर 02:00 तक
लाभ-उन्नति मुहूर्त: दोपहर 02:00 से दोपहर 03:42 तक
अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: दोपहर 03:42 से सायं 05:23 तक
शनि जयंती पर ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:07 से 04:48 तक
अभिजीत मुहूर्त: 11:50 से दोपहर 12:45 तक
शनि अमावस्या का महत्व –
प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा ने बताया की शनि अमावस्या का दिन पूजा, व्रत, स्नान और दान के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन लोग शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। साथ ही पितरों की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध जैसे कार्य भी किए जाते हैं, जिससे पितृ दोष से राहत मिलने की मान्यता है। इस बार शनि अमावस्या के साथ शनि जयंती का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो इसे और अधिक खास बनाता है।