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Happy Ashtami tomorrow of Bhadrapada: Glory of Shri Radha Janmotsav, Mahalaxmi and Durvashtami fasting

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आगरालीक्स… खुशियों भरी भाद्रपद की अष्टमी तिथि कल है। श्रीराधा जन्मोत्सव, महालक्ष्मी एव दूर्वाष्टमी व्रत के साथ जानिये इस दिन का महत्व और पूजा विधि।

श्रीराधा अष्टमी की महिमा

श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान एवं गुरू रत्न भण्डार के स्वामी ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजनशर्मा बताते हैं कि ब्रज की महारानी श्री राधा ही हैं जो श्री कृष्ण से मिला सकते हैं, उनके अद्भुत रहस्यों को दर्शाती कुछ कथाएं।

वृषभानु के घर प्रगट हुईं राधा रानी

श्रीराधा

🍁 राधा द्वापर युग में श्री वृषभानु के घर प्रगट होती हैं। कहते हैं कि एक बार श्रीराधा गोलोकविहारी से रूठ गईं। इसी समय गोप सुदामा प्रकट हुए। राधा का मान उनके लिए असह्य हो हो गया

🌷उन्होंने श्रीराधा की भर्त्सना की, इससे कुपित होकर राधा ने कहा- सुदामा! तुम मेरे हृदय को सन्तप्त करते हुए असुर की भांति कार्य कर रहे हो, अतः तुम असुरयोनि को प्राप्त हो। सुदामा कांप उठे, बोले-गोलोकेश्वरी तुमने मुझे अपने शाप से नीचे गिरा दिया। मुझे असुरयोनि प्राप्ति का दुःख नहीं है, पर मैं कृष्ण वियोग से तप्त हो रहा हूं। इस वियोग का तुम्हें अनुभव नहीं है, अतः एक बार तुम भी इस दुःख का अनुभव करो। सुदूर द्वापर में श्रीकृष्ण के अवतरण के समय तुम भी अपनी सखियों के साथ गोप कन्या के रूप में जन्म लोगी और श्रीकृष्ण से विलग रहोगी।

🌸 सुदामा को जाते देखकर श्रीराधा को अपनी त्रृटि का आभास हुआ और वे भय से कातर हो उठी। तब लीलाधारी कृष्ण ने उन्हें सांत्वना दी कि हे देवी ! यह शाप नहीं, अपितु वरदान है। इसी निमित्त से जगत में तुम्हारी मधुर लीला रस की सनातन धारा प्रवाहित होगी, जिसमे नहाकर जीव अनन्तकाल तक कृत्य-कृत्य होंगे। इस प्रकार पृथ्वी पर श्री राधा का अवतरण द्वापर में हुआ

♦पद्मपुराण में राधा का अवतरण

 🍀 पद्मपुराण में भी एक कथा मिलती है कि श्री वृषभानुजी यज्ञ भूमि साफ कर रहे थे, तो उन्हें भूमि कन्या रूप में श्रीराधा प्राप्त हुई। यह भी माना जाता है कि विष्णु के अवतार के साथ अन्य देवताओं ने भी अवतार लिया, वैकुण्ठ में स्थित लक्ष्मीजी राधा रूप में अवतरित हुई। कथा कुछ भी हो, कारण कुछ भी हो राधा बिना तो कृष्ण हैं ही नहीं।

भागवत की जीवन शक्ति राधा हैं

🌹 राधा का उल्टा होता है धारा, धारा का अर्थ है करंट, यानि जीवन शक्ति। भागवत की जीवन शक्ति राधा है। कृष्ण देह है, तो श्रीराधा आत्मा। कृष्ण शब्द है, तो राधा अर्थ। कृष्ण गीत है, तो राधा संगीत। कृष्ण वंशी है, तो राधा स्वर। भगवान् ने अपनी समस्त संचारी शक्ति राधा में समाहित की है। इसलिए कहते हैं

⭐जहां कृष्ण राधा तहां जहं राधा तहं कृष्ण।न्यारे निमिष न होत कहु समुझि करहु यह प्रश्न

राधा नाम की महिमा अपरंपार

🏵इस नाम की महिमा अपरंपार है। श्री कृष्ण स्वयं कहते है- जिस समय मैं किसी के मुख से ‘रा’ सुनता हूं, उसे मैं अपना भक्ति प्रेम प्रदान करता हूं और धा शब्द के उच्चारण करनें पर तो मैं राधा नाम सुनने के लोभ से उसके पीछे चल देता हूं।

♦️ महालक्ष्मी व्रत का महत्व

श्री महालक्ष्मी

महालक्ष्मी व्रत भाद्रपद मास शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से प्रारंभ होता है और अश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तक किया जाता है। 03 सितंबर 2022 से 18 सितंबर 2022 तक यह व्रत सोलह दिनों तक किया जाता है और इस व्रत में सोलह दिनों तक ही शाम के समय चंद्रमा को अर्ध्य भी दिया जाता है। वैसे तो यह व्रत 16 दिनों तक किया जाता है। लेकिन अगर कोई भी व्यक्ति इस व्रत को सोलह दिनों तक नहीं कर पाता तो वह इस व्रत को अपने सामर्थ्य के अनुसार कम दिनों तक भी कर सकता है। महालक्ष्मी व्रत में अन्न ग्रहण नहीं किया जाता और सोलह दिनों का व्रत पूर्ण होने के बाद इस व्रत का उद्यापन कर दिया जाता है।

♦️महालक्ष्मी व्रत पूजन सामग्री

हल्दी,कुमकुम,बैठने के लिये आसऩ,अक्षत,सोना या चाँदी या रुपया,धूप,दीपक,लाल फूल,श्री गज लक्ष्मी का चित्र,लाल कपड़ा,ताँबे का कलश,शुद्ध देसी घी,कटोरी (कलश को ढ़कने के लिये),नैवेद्य,फल,फूल,पूजन सामग्री में चन्दन, ताल, पत्र, पुष्प माला, अक्षत, दूर्वा, लाल सूत, सुपारी, नारियल आदि

♦️महालक्ष्मी व्रत पूजा विधि

🍁सबसे पहले प्रात: काल स्नान करने के बाद साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के आंगन में चावल के घोल का अल्पना बनाएं। अल्पना में मां लक्ष्मी के पैर अवश्य बनाएं।

🍁 इसके बाद करिष्य हं महालक्ष्मि व्रतमें त्वत्परायणा ।तदविध्नेन में यातु समप्तिं स्वत्प्रसादत: ।।

मंत्र का जाप करके व्रत का संकल्प लें।

🍁इसके बाद हाथ की कलाई पर 16 गांठों वाला धागा बांधना चाहिए। इसके बाद माता लक्ष्मी का आसन आम के पत्तों से सजाएं। इसके लिए आंवले का पत्ता और धान की बालियों भी अवश्य लें।

🍁 इसके बाद कलश स्थापित करें और भगवान गणेश और गज लक्ष्मी का चित्र स्थापति करें। भगवान गणेश के साथ कलश की भी पूजा करें। भगवान गणेश के बाद कलश की पूजा भी अवश्य करें।

🍁 इसके बाद मां लक्ष्मी को पुष्प माला, नैवेध, अक्षत,सोना या चाँदी आदि सभी चीजें अर्पित करें और उनकी विधिवत पूजा करें।

🍁 पूजा के बाद माता लक्ष्मी की कथा पढ़ें और उनके मंत्रों का जाप करें।

🍁  इसके बाद माता लक्ष्मी की धूप व दीप से आरती उतारें।

🍁 सुबह पूजा करने के बाद शाम के समय भी मां लक्ष्मी की इसी विधि से पूजा करें और दीप जलाएं।

🍁 एक दीप मां लक्ष्मी के आगमन के लिए अपने घर के बाहर भी अवश्य जलाएं।

🍁 इसके बाद चंद्रमा को अर्ध्य भी अवश्य दें और घर की बहु बेटियों और पड़ोस की सुहागन महिलाओं को भी अवश्य भोजन कराएं।

——————-दूर्वाष्टमी व्रत——–

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को दूर्वाष्टमी का व्रत किया जाता हैं। इस दिन प्रात: स्नानादि से निर्वत हो लाल रंग के वस्त्र पहनकर एक पाटे पर दूर्वा, बालको की मुर्तिया , सर्पों की मूर्ति ,  एक मटका और एक स्त्री का चित्र मिट्टी से बनाकर चावल , जल , दूध , रोली , आटा , घी , चीनी मिलाकर मोई बनाकर पूजा करे। गंध , पुष्प , धुप , दीप , खजूर , नारियल , अक्षत , माला आदि से मन्त्रो से पूजा करें।

🏵त्वं दूर्वे अमृत जन्मासि वन्दिता व सुरसुरे:।

सौभाग्यं संतति कृत्वा सर्वकार्यकरी भव।।

यथा शाखाप्रशाखाभिविरस्त्रितासी महीतले।

तथा ममामी संतानं देहि त्वमजरामरे।।

🌟 मीठे बाजरे का बायना निकाल कर दक्षिणा ब्लाउज पिस सासुजी को पाँव लग कर दे। फिर दूर्वाष्टमी की कथा सुनकर इस दिन ठंडा भोजन करना चाहिये।

♦️पूजन का शुभ मुहूर्त

🌸03 सितंबर शनिवार दोपहर 12.28से ,04 सितम्बर प्रात 10.40 तक अष्टमी रहेगी। 

Written by
Agraleaks Team

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