आगरालीक्स…(28 August 2021 Agra News) श्रीकृष्ण पूर्ण अवतार हैं. वह गुरु हैं तो शिष्य भी हैं. आदर्श पति हैं तो प्रेमी भी. युद्ध में कुशल हैं तो बुद्ध भी. जानिए उनकी कुंडली में ग्रहों की स्थिति…
इस बार 30 अगस्त दिन सोमवार को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिन है। ब्रज समेत पूरे देश में जन्माष्टमी धूमधाम से मनाई जाती है। ब्रज में तो इसका महत्व ही अलग है। अपने लाला के जन्मदिन की ब्रजवासी साल भर प्रतीक्षा करते हैं। दरअसल श्रीकृष्ण पूर्ण अवतार हैं। उनके जीवन में वह सब कुछ है, जिसकी मनुष्य के जीवन में आवश्यकता होती है।
सूरदास ने किया है उनकी कुंडली का वर्णन
सूरदास जी ने श्रीकृष्ण जन्म पर पद्य लिखा। कल्याण पत्रिका में एक जगह जिक्र है, जो खुद सूरदास जी ने लिखा है। वह है
नंदजू मेरे मन आनंद भयो, मैं सुनि मथुराते आयो,
लगन सोधि ज्योतिषको गिनि करि, चाहत तुम्हहि सुनायो।
सम्बत्सर ईश्वर को भादों, नाम जु कृष्ण धर्यो है,
रोहिणी, बुध, आठै अंधियारी, हर्षन जोग परयो है।
वृष है लग्न, उच्च के उडुपति, तनको अति सुखकारी।
दल चतुरंग चलै संग इनके हैव्हैं रसिकबिहारी।
चौथी रासि सिंह के दिनमनि, महिमामणडल को जीतैं।
करिहैं नास कंस मातुलको, निहचै कछु दिन बीतै।
पंचम बुध कन्या के सोभित, पुत्र बढैंगे सोई,
छठएं सुक्र तुलाके सनिजुत, सत्रु बचै नहिं कोई।
नीच ऊंच जुवती बहु भोगैं, सप्तम राहु पर्यो है,
केतु मुरति में स्याम बरन, चोरी में चित्त धर्यो है।
भाग्य भवन में मकर महीसुत, अति एश्वर्य बढैगो,
द्विज गुरुजन को भक्त होईकै, कामिनि चित्त हरैगो।
नव निधि जाके नाभि बसत हं, मीन बृहस्पति केरी,
पृथ्वी भार उतारैं निहचै, यह मानो तुम मेरी।
तब ही नन्द महर आनन्दे, गर्ग पूजि पहरायो,
असन, बसन, गज, बाजि, धेनु, धन, भूरि भंडार लुटायो।
बंदीजन द्वारै जस गावै जो जांच्यो सो पायो,
ब्रज में कृष्ण जन्मको उत्सव सूर बिमल जस गायो।
लग्न में बैठे चंद्रमा ने बचपन से नटखट बनाया
ज्योतिषाचार्य अंशु पारीख ने बताया कि चौरासी वैष्णवों की वार्ता में सूरदास जी द्वारा लिखित इस पद्म में श्रीकृष्ण की जन्मकुण्डली का पूरा व्याख्यान किया है। ग्रहों के फलादेश में ऐसा कोई अंश नहीं जो श्रीकृष्ण के चरित्र से मेल न खाता हो। भादों में बुधवार के दिन कृष्ण पक्ष की अष्टमी, रोहिणी नक्षत्र में श्रीकृष्ण जन्म को लग्न में बैठे चंद्रमा ने बचपन से ही नटखट बनाया तो वहीं चंद्रमा के साथ बैठे केतू ने उन्हें श्यामवर्ण दिया। बचपन में उनके चित्त को चोरी में भी लगाया।
सूर्य ने महारथी बनाया तो बुध ने बुद्धिमत्ता दी
लग्न में उच्च के चंद्रमा का प्रभाव था कि मित्रों की टोली नके साथ चलती थी। चतुर्थ भाव में स्वराशि के सूर्य ने महारथी तो पंचम यानि ज्ञान के भाव में बैठे कन्या राशि के बुध ने बुद्धमत्ता और चतुराई दी। छठे भाव में शुक्र के साथ तुला राशि में बैठे उच्च के शनि के कारण बचपन से ही नके सामने कोई शत्रु कभी नहीं टिक पाया। वहीं सप्तम में बैठे राहू ने गोपियों और सखियों के साथ ठिठौली के कारण यशोदा मैया से खूब डांट भी खाई।
मंगल ने बलराम जैसे भाई दिया
भाग्य भाव में बैठे उच्च के मंगल की दृष्टि तीसरे भाव पर पड़ने से बलराम जैसे वीर योद्धा भाई और खुद को भी साहसी बनाया। एकादश भाव में बैठे मीन राशि के गुरु ने उनके हर कर्म को धर्म से जोड़ा। गीता जैसा उपदेश और महाभारत जैसे युद्ध के माध्यम से उन्होंने धर्म की स्थापना की।
उच्च ग्रहों की शक्ति झेलना आम आदमी के वश में नहीं
कुंडली में उच्च राशि के ग्रह मंगल, शनि, बुध और चंद्रमा हैं, स्वराशि के गुुरु, सूर्य और शुक्र हैं। ऐसी स्थिति में ग्रहों की शक्ति को झेलना एक आम इंसान के वश में नहीं हैं। यह तो स्वयं योगेश्वर श्रीकृष्ण थे, जिनके नियंत्रण में सभी ग्रह रहते हैं।