आगरालीक्स…सिद्धि योग और स्वाति नक्षत्र में वैशाख पूर्णिमा “बुद्ध पूर्णिमा”. सोलह कलाओं से परिपूर्ण होगा चंद्रमा. जानिए क्यों खास है यह पूर्णिमा और क्या है इसका महत्व
हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि अत्यंत ही पवित्र और शुभ मानी जाती है. लेकिन वैशाख महीने की पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है. प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी ने बताया की वैशाख माह में पड़ने वाली पूर्णिमा को "बुद्ध पूर्णिमा" भी कहा जाता है. इसी तिथि पर भगवान गौतम बुद्ध की जयंती भी मनाई जाती है, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण हुआ था, इसलिए यह दिन बौद्ध धर्म में भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. साथ ही इस दिन भगवान विष्णु के दशावतार मे से द्वितीय (2) अवतार "कूर्म (कछुआ) अवतार" का जन्म हुआ था इसलिए इस दिन को कूर्म जयंती के नाम से भी जानते हैं. प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी ने बताया की शास्त्रों के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु के कूर्म यानी कछुए के अवतार की पूजा की जाती है. सतयुग में समुद्र मंथन के वक्त भगवान विष्णु ने विशाल मंदराचल पर्वत उठाने के लिए कछुए का अवतार ले लिया था.गौतम बुद्ध ने 35 वर्ष की आयु में निर्वाण प्राप्त कर लिया था. स्कंद पुराण की मानें तो महात्मा बुद्ध भगवान विष्णु के दशावतार मे नवे (9) अवतार माने जाते हैं. यही कारण है कि, केवल हिंदू धर्म ही नहीं बल्कि बौद्ध धर्म के लिए भी यह पूर्णिमा काफी महत्वपूर्ण होती है. बौद्ध धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, वैशाख पूर्णिमा पर ही गौतम बुद्ध का जन्म हुआ, उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई और महापरिनिर्वाण हुआ. इसलिए दुनियाभर के बौद्ध अनुयायी इस दिन को बुद्ध पूर्णिमा के रूप में मनाते हैं. वहीं हिंदू धर्म में वैशाख पूर्णिमा पर स्नान-दान और व्रत का विशेष महत्व होता है.
प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी के अनुसार इस वर्ष वैशाख पूर्णिमा बेहद खास मानी जा रही है, क्योंकि इस दिन सिद्धि योग और स्वाति नक्षत्र का अद्भुत संयोग बन रहा है. सूर्योदय से लेकर रात 9 बजकर 13 मिनट तक सिद्धि योग रहेगा, उसके बाद व्यतीपात योग बनेगा. जो साधना, जप और ध्यान के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। वैशाख पूर्णिमा पर स्वाति नक्षत्र प्रात:काल से लेकर 2 मई को 04:35 Am तक है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है. माना जाता है कि इस दिन किया गया दान और स्नान पुण्य लाभ देता है. पौराणिक कथाओं में बताया गया है, कि भगवान कृष्ण के परम मित्र सुदामा जब द्वारका में भगवान कृष्ण मिलने आए थे, तब उन्हें भगवान कृष्ण ने पूर्णिमा के व्रत का महत्व बताया था.प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी के अनुसार वैशाख पूर्णिमा पर पवित्र नदी में स्नान और इसके बाद दान करने का महत्व होता है. मान्यता है कि, इससे मोक्ष की प्राप्ति होती है. हिंदू धर्म के लोग सुख-शांति समृद्धि के लिए वैशाख पूर्णिमा पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा भी करते हैं. इस दिन दान करने का भी महत्व है, जिसमें पंखा, जल से भरा घड़ा, छाता, वस्त्र, अन्न आदि का दान करना उत्तम होता है वहीं बौद्ध धर्म को मानने वाले वैशाख पूर्णिमा पर ध्यान, प्रार्थना और शांति का संदेश फैलाते हैं. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सच्चे मन से पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं. इस दिन गंगा स्नान और दान-पुण्य करना अत्यंत फलदायी माना जाता है. माना जाता है कि इस दिन किए गए धार्मिक कार्य और दान अक्षय फल देते हैं. वैशाख पूर्णिमा के दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है. अपनी क्षमतानुसार गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र, जल, फल आदि का दान करें. इस दिन भगवान विष्णु और चंद्रमा की पूजा करना भी शुभ माना जाता है. व्रत रखने वाले इस दिन सत्यनारायण की कथा सुनते हैं. पशु-पक्षियों को पानी और दाना डालना भी पितरों को प्रसन्न करता है. ऐसा माना जाता है कि इस विधि से वैशाख पूर्णिमा पर तर्पण और पिंडदान करने से पितरों को तृप्ति मिलती है और उनकी आत्मा को शांति एवं मोक्ष प्राप्त होता है.
कोई भी नया कार्य शुरू करने का शुभ समय -ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी के अनुसार वैशाख पूर्णिमा के दिन कोई भी नया कार्य शुरू करने के लिए यह सबसे शुभ दिन रहेगा. पूजा-पाठ पर किसी प्रकार की मनाही नहीं होगी.
वैशाख पूर्णिमा को पीपल पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता -
प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी ने बताया की वैशाख पूर्णिमा को पीपल पूर्णिमा इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस दिन पीपल के वृक्ष की विशेष पूजा, उसे जल चढ़ाने और पीपल का नया पौधा लगाने का बहुत अधिक महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पीपल में स्वयं भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का वास होता है, और पीपल के नीचे भगवान बुद्ध को ज्ञान मिला था। ज्योतिष के अनुसार, इस दिन पीपल पर जल, दूध और काले तिल चढ़ाने से शनि, गुरु और राहु-केतु जैसे ग्रहों के दोष दूर होते हैं।