आगरालीक्स…. सूर्य देव कंभ राशि से निकलकर मीन राशि में करेंगे प्रवेश. रुकेंगे मांगलिक काम
सनातन धर्म में खरमास का बहुत महत्व माना जाता है. खरमास एक माह की अशुभ अवधि मानी जाती है, इसलिए इस दौरान शादी-विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नामकरण और मुंडन संस्कार जैसे शुभ और मांगलिक काम करने की मनाही होती है. खरमास साल में दो बार तब लगता है, जब ग्रहों के राजा भगवान सूर्य धनु और मीन राशि में प्रवेश करते हैं.ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी के अनुसार आत्मा के कारक सूर्य देव इस साल 14 मार्च को कुंभ राशि से निकलेंगे और इसी दिन देर रात्रि 01 बजकर 08 मिनट पर (अंग्रेजी तारीख 15 मार्च) उनका प्रवेश मीन राशि में होगा. मीन राशि में सूर्य देव के प्रवेश करते ही 14 मार्च से खरमास की शुरुआत हो जाएगी. भगवान सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करने पर मीन संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा. सूर्य देव 14 अप्रैल को सुबह 9 बजकर 38 मिनट पर मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे. मेष में आते ही खरमास का समापन हो जाएगा.
पंचांग के अनुसार, 14 मार्च को देर रात्रि 01:08 Am बजे सूर्य मीन राशि में प्रवेश कर जाएंगे। जहां पर पहले से मौजूद शुक्र और शनि के साथ संयोग करके त्रिग्रही योग का निर्माण होगा। त्रिग्रही योग तब बनता है जब तीन ग्रह एक साथ एक ही राशि या भाव में संयोग करेंगे। इसका शुभ-अशुभ दोनों परिणाम देखने को मिल सकते हैं।इसके साथ ही इस दिन चैत्र कृष्ण पक्ष एकादशी (पापमोचिनी एकादशी व्रत) तिथि मान्य होगी। संग मे इस दिन श्रवण नक्षत्र एवं परिघ योग (15 मार्च को सुबह 10:25 तक रहेगा) का शुभ योग रहेगा।
इस साल 15 मार्च से शादी-विवाह समेत तमाम शुभ और मागंलिक काम रोक दिए जाएंगे. यही नहीं खरमास के दौरान न किसी बिजनेस की शुरूआत की जाएगी और न ही नया प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा.
धर्म शास्त्रों के अनुसार, जब सूर्य देव का प्रवेश धनु या मीन राशि में होता है, तो उनकी गति और ऊर्जा थोड़ी मंद हो जाती है. इससे उनकी शुभता में कमी आ जाती है. धनु और मीन राशि का स्वामित्व गुरु बृहस्पति के पास है. सूर्य जब इन दोनों राशि में प्रवेश करते हैं, तो गुरु का प्रभाव भी कम हो जाता है. शुभ कार्यों को करने के लिए सूर्य और गुरु का शुभ होना जरूरी है. यही कारण है कि खरमास में तमाम तरह के शुभ और मांगलिक काम रोक दिए जाते हैं.