आगरालीक्स… कवि गोपाल दास नीरज ने लिखा था जितना कम सामान रहेगा, उतना सफ़र आसान रहेगा। आगरा में अंतिम बार होश में आने पर उन्होंने कुछ यही लिखा था, एक कागज मंगाया और उस पर लिखा कि मेरी चाबी कहां है, उनके बेटे अरस्तू ने जवाब दिया कि चाबी भी है और बैग भी। नीरज कुछ कहना चाहते थे, इससे पहले ही अरस्तु ने उनके हाथ को पकडा और कहा कि हाथ की अंगूठी भी मेरे पास है।
कवि गीतकार और बॉलीवुड व कवि सम्मेलन की शान गोपाल दास नीरज बेबाकी से अपनी निजी जिंदगी और फक्कडपन के सवालों पर जवाब देते थे। वे अक्सर आते थे, उनकी निजी जिंदगी, पहला प्यार और शादी को लेकर सवाल उठे, उन्होंने अपनी शायरी और गीत भी बचपन के प्यार यशोदा के लिए गाए तो आगरा में उनका पूरा परिवार रहा, यह भी वे स्वीकार करते थे। कवि नीरज 17 जुलाई को आगरा में अपनी बेटी कुंदनिका शर्मा के घर आए थे, नाश्ता करते समय उनकी तबीयत बिगड गई, वे 30 घंटे आगरा के हॉस्पिटल में आईसीयू और वेंटीलेटर पर रहे। होश आने पर वे कुछ कहना चाहते थे लेकिन मुंह में टयूब डली थी।
कागज पर लिखकर की बात, घर जाने की कहते रहे

कवि गोपाल दास नीरज ने एक कागज मंगाया और पेन से उस पर लिखा कि मेरी चाबी कहां है, इस पर उनके बेटे अरस्तु ने जवाब दिया कि चाबी और बैग मेरे पास है। इसके बाद उन्हें बताया किया कि एम्स ले जा रहे हैं तो कागज पर लिखा कि मैं ठीक हूं और घर ले चलो, एम्स जाने के लिए वे अंतिम समय तक मना करते रहे। आगरा में उनकी तबीयत में तेजी से सुधार हुआ था और वे पूरे होश में थे, यहां डॉक्टरों द्वारा 24 घंटे में उनकी टयूब् निकालनी थी, इसके बाद बोलने भी लगते, लेकिन एम्स के डॉक्टर आगे की जांच के लिए बुला रहे थे।
एम्स पहुंचते ही बिगडी तबीयत
18 जुलाई की रात को कवि गोपालदास नीरज को एम्स के पल्मोनरी डिपार्टमेंट में भर्ती किया गया, वहां उनके फेफडे में टयूब डालकर पस को ड्रेन करते ही ब्लड प्रेशर गिरता चला गया, कुछ घंटे पहले तक शरीर के सभी अंग ठीक से काम कर रहे थे, वे एक के बाद एक साथ छोडते गए और 19 जुलाई की रात पौने आठ बजे उनका निधन हो गया।
देहदान करने की अंतिम इच्छा, अलीगढ में अंतिम दर्शन
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जितना कम सामान रहेगा
उतना सफ़र आसान रहेगा
जितनी भारी गठरी होगी
उतना तू हैरान रहेगा
उस से मिलना ना-मुम्किन है
जब तक ख़ुद का ध्यान रहेगा
हाथ मिलें और दिल न मिलें
ऐसे में नुक़सान रहेगा
जब तक मंदिर और मस्जिद हैं
मुश्किल में इंसान रहेगा
‘नीरज’ तू कल यहाँ न होगा
उस का गीत विधान रहेगा
प्रख्यात कवि श्री गोपाल दास ‘नीरज’ जी के निधन पर गहरा दुःख हुआ। नीरज जी ने अपनी काव्य रचनाओं से हिन्दी साहित्य को समृद्ध किया। उन्हें भावनाओं और अनुभूतियों को व्यक्त करने में दक्षता हासिल थी। हिन्दी फिल्मों के लिए नीरज जी द्वारा लिखे गए गीत आज भी लोकप्रिय हैं।
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) July 19, 2018
His works are unforgettable gems and his legacy will live on & inspire many. Condolences to his family and admirers.#GopaldasNeeraj pic.twitter.com/sf85etIngN
— VVS Laxman (@VVSLaxman281) July 19, 2018
प्रसिद्ध कवि पद्मभूषण #GopalDasNeeraj जी का निधन हिंदी साहित्य के एक युग का अंत है। उनकी अमर कविताएं हमेशा हमारी स्मृतियों में गूंजती रहेंगी।
स्वप्न झरे फूल से मीत चुभे शूल से
लुट गये सिंगार सभी बाग के बबूल से।
और हम खड़े-खड़े बहार देखते रहे
कारवां गुजर गया गुबार देखते रहे। pic.twitter.com/gyjrVTqlSa— Vasundhara Raje (@VasundharaBJP) July 19, 2018
#GopaldasNeeraj की हस्तलिपि में एक मुक्तक pic.twitter.com/AdtXMYLosh
— Sujoy (@Sujoy0001) July 19, 2018