
फरवरी 2010 में एएमयू के मॉर्डन इंडियन लैंग्वेज डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉ.श्रीनिवासन रामचंद्र सिरास गे-स्कैंडल से चर्चाओं में आए सिरास ने सुसाइड कर ली थी। पारिवारिक पैरवी और साक्ष्यों के अभाव में मुकदमा दाखिल दफ्तर हो गया। गे-स्कैंडल के चलते अंतर्राष्ट्रीय पटल पर चर्चा बटोर चुकी फिल्म का ट्रेलर 1 फरवरी को जारी हो चुका है। यह ए सर्टिफिकेट मिलने से भी सुर्खियाें में है। लोग इसको लेकर बेहद उत्सुक हैं कि आखिर इसमें ऐसा क्या दिखाया गया है, जिसकी वजह से सेंसर बोर्ड से इसे ए सर्टिफिकेट मिला है।
ये है प्रोफेसर सिरास प्रकरण
नागपुर महाराष्ट्र के प्रोफेसर सिरास क्वार्सी इलाके की दुर्गाबाड़ी की गली नंबर दो निवासी अधिवक्ता सुभाष चंद्र कमल के मकान में किराए पर रहते थे। निलंबन के बाद वह घर की चारदीवारियाें में �कैद रहने लगेे थे। 7 अप्रैल की शाम दुर्गंध आने पर सिरास का शव उनके कमरे में बेड पर पड़ा मिला था। पोस्टमार्टम के बाद उनका शव नागपुर से आए परिजनों के सुपुर्द कर दिया था।
इस घटना के 62वें दिन सिरास के भाई संजीव रामचंद्र ने धारा 306 के तहत मुकदमा दर्ज कराया। जिसमें अज्ञात लोगों पर उनके भाई डा. सिरास का उत्पीड़ित कर उन्हें आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का आरोप लगाया था। बाद में मुकदमा एफआर हो गया। इस दौरान एक फोटो जर्नलिस्ट, दो रिक्शा चालक भी चर्चाओं में आए थे। एक रिक्शा चालक ने तो पुलिस उत्पीड़न से तंग आकर जान देने की कोशिश की थी।
ये हुआ था
फरवरी 2010 में गे-स्कैंडल से चर्चाओं में आए थे डा. एसआर सिरास
9 फरवरी 2010 को मिस कंडक्ट के आरोप में एएमयू से निलंबित
7 अप्रैल 2010 की शाम बदबू आने पर किराये के घर से मिला था शव
6 जून 2010 को सिरास के भाई ने क्वार्सी में दर्ज कराई थी सुसाइड रिपोर्ट
2010 के अंत में साक्ष्यों के अभाव में मुकदमे में लगा दी गई एफआर
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