आगरालीक्स.. आगरा में चिकित्सकों ने बताया कि प्रत्येक गर्भवती महिला खास है और उसे विशेष देखभाल मिलनी चाहिए। न ही सिर्फ घर पर परिवार के लोग उसका ध्यान रखें बल्कि अस्पतालों में भी गुणवत्ता युक्त सुविधाएं दी जानी चाहिए। गर्भवती महिलाओं की ऐसी ही विशेष देखभाल और गुणवत्तापूर्ण सुविधाओं पर आगरा में एक महत्वपूर्ण परिचर्चा हुई।
फाॅग्सी और जाॅन हाॅप्किन्स प्रोग्राम फाॅर इंटरनेशनल एजूकेशन इन गायनेकोलाॅजी एंड आॅब्सटेट्रिक (जेएचपीआईईजीओ) ने मिलकर उच्च स्तरीय सुविधाओं से सुसज्जित और गुणवत्तापरक मैटरनिटी होम्स को मान्यता प्रमाण-पत्र देने संबंधी एक वार्ता आगरा के रेनबो हाॅस्पिटल में आयोजित की। इसमें प्रसव के दौरान मातृ मृत्यु दर को कम करने पर काम कर रही संस्था एमएसडी फाॅर मदर्स की भारत में डायरेक्टर डा. पांपी श्रीधर ने बताया कि भारत में हर साल लगभग 45000 माताओं की मृत्यु बच्चे को जन्म देने के दौरान हो जाती हैं। इन्हें कम किया जा सकता है। मान्यता भी इसी का एक हिस्सा है। इसके तहत 16 बिंदु निर्धारित किए गए हैं, जिन्हें अस्पतालों को पूरा करना होता है और इसके बाद मान्यता सर्टिफिकेट प्रदान किया जाता है। फाॅग्सी के पूर्व अध्यक्ष एवं रेनबो हाॅस्पिटल के निदेशक डा. नरेंद्र मल्होत्रा ने बताया कि चिकित्सकों और स्टाॅफ की मौजूदगी से लेकर साफ-सफाई, आधुनिक संसाधन, नवीनतम तकनीकें और जांचें आदि मानक देखे जाते हैं। इसमें एमएसडी फाॅर मदर्स यह मुहिम मातृत्व देखभाल के लिए स्वास्थ्य केंद्रों को बेहतर बनाने के लिए है। खास तौर पर प्रसूति ग्रहों में हर वो सुविधा मौजूद होनी चाहिए जिसकी एक महिला और उसके शिशु को गर्भकाल में आवश्यकता पड सकती है। आगरा में अब तक लगभग 10 अस्पतालों को यह प्रमाण-पत्र प्रदान किए जा चुके हैं। जपाइगो के राज्य कार्यक्रम प्रबंधक डा. परवेज मैमन ने बताया कि अस्पतालों को मान्यता प्रमाण पत्र देने के लिए जो मानक बनाए गए हैं उनमें एचआईवी, एनीमिया जैसी जटिलताओं का निदान, प्रसव के दौरान सुरक्षित देखभाल की तैयारी, भर्ती के समय ही गर्भवती की स्थिति का आंकलन करने की क्षमता आदि जैसे 16 मानक शामिल हैं।
देश भर से 40 युवा चिकित्सक हुए परीक्षा में शामिल
फाॅग्सी की पूर्व अध्यक्ष एवं रेनबो आईवीएफ कीं निदेशक डा. जयदीप मल्होत्रा ने बताया कि इंडियन काॅलेज आॅफ आॅब्सटेट्रिशियंस एंड गायनेकोलाॅजिस्ट्स (एआईसीओजी) की ओर से आगरा में सर्टिफिकेट कोर्स इन रिप्रोडक्टिव मेडिसिन की परीक्षा आयोजित गई थी। इसके लिए आगरा के रेनबो हाॅस्पिटल को एक्सीलेंसी सेंटर के रूप में चुना गया था। इस परीक्षा में देश भर से करीब 40 युवा चिकित्सक शामिल हुए थे, जिन्होंने न सिर्फ परीक्षा दी बल्कि फाॅग्सी के पूर्व अध्यक्ष डा. प्रकाश त्रिवेदी और आईसीओजी कीं चेयरपर्सन डा. शांता कुमारी ने इस इससे जुडे़े तमाम विषयों पर युवा चिकित्सकों को महत्वपूर्ण जानकारी और प्रशिक्षण भी प्रदान किया। यह परीक्षा एआरटी में महारथ के लिए दी जाती है।
युवा दें अपने दिल पर ध्यानः डा. प्रवीण चंद्रा
पिछले काफी समय से मेदांता मेडिसिटी गुड़गांव के पद्मश्री डा. प्रवीण चंद्रा आगरा में सोना रेनबो कार्डियक सेंटर में सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में आगरा में बढ़ती युवा ह्दय रोगियों की संख्या पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि यहां देश के कई हिस्सों की तरह ही आगरा में भी देखने आया है कि युवा खान-पान और व्यायाम जैसी चीजों को लेकर लापरवाही बरत रहे हैं। विकसित देशों में जिस उम्र में हार्ट अटैक होता है, हमारे देश के लोग उसके 10 से 15 साल पहले इसके शिकार हो जाते हैं। वहां 70 प्रतिशत तक हार्ट अटैक 70 की उम्र के बाद होते हैं, वहीं हमारे देश में दो तिहाई हार्ट अटैक 60 से कम उम्र वालों को हो जाते हैं। यहां तक कि अब 30 से 40 की आयु वालों का भी दिल सुरक्षित नहीं है। वजह है हमारी खराब जीवनशैली। हमें खान-पान पर ध्यान, योग व्यायाम जैसी चीजें जो स्वतः ही करनी चाहिए हम डाॅक्टर के कहने पर करते हैं। इतना ही नहीं हमारे जवान भारत में नींद की भी कमी है। ऐसे में शरीर को आराम नहीं मिलता। तनाव आदि के शिकार हो जाते हैं। इसका असर दिल पर भी पड़ता है। ऐसे में हार्ट अटैक के मामले दिनोंदिन बढ़ रहे हैं। हमें चाहिए कि हम अपने दिल का ख्याल रखें